48 घंटे में भारत छोड़े पाकिस्तानी, अटारी बॉर्डर बंद और वीजा रद्द, कई बड़े फैसले, मुस्लिम समाज ने घोर निंदा कर उठाई सूक्ष्म जांच की मांग
Pakistanis should leave India within 48 hours, Attari border closed and visas cancelled, many big decisions, Muslim community strongly condemned and demanded a thorough investigation
नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पहल्गाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। हमले में 27 लोगों की जान गई. जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था. जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए. इसके बाद बुधवार शाम कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक बुलाई गई.
इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल भी मौजूद थे. बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाकिस्तान के खिलाफ लिए गए पांच सख्त फैसलों की जानकारी दी. जम्मू कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पंजाब में वाघा-अटारी बॉर्डर पर बीएसएफ की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को बंद कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की है. मगर माना जा रहा है कि इस पर जल्द आदेश जारी किया जाएगा. बॉर्डर पर सूर्यास्त से पहले हर दिन बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी होती है. जिसमें भारत और पाकिस्तान के सैनिक नाटकीय अंदाज में अपने-अपने देश के झंडे उतारते हैं.
CCS की बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ लिए गए 5 बड़े फैसले
सिंधु जल संधि स्थगित
विदेश सचिव ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया गया है। यह तब तक लागू नहीं होगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह से नहीं छोड़ देता.
अटारी बॉर्डर चेकपोस्ट बंद
भारत और पाकिस्तान के बीच एकमात्र सक्रिय चेकपोस्ट अटारी बॉर्डर को तुरंत बंद कर दिया जाएगा। केवल वे लोग जिन्हें वैध अनुमति मिल चुकी है, वे 1 मई 2025 तक वापस आ सकेंगे.
SAARC वीजा छूट योजना (SVES) रद्द
अब पाकिस्तानी नागरिक SAARC वीजा छूट योजना के तहत भारत की यात्रा नहीं कर सकेंगे। पहले से जारी सभी वीजा रद्द माने जाएंगे और भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के अंदर देश छोड़ना होगा.
पाक उच्चायोग के सैन्य अधिकारी ‘अवांछित’ घोषित
नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, सैन्य, नौसेना और वायु सलाहकारों को ‘persona non grata’ घोषित किया गया है। उन्हें 7 दिन के भीतर भारत छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
भारतीय रक्षा अधिकारियों को इस्लामाबाद से बुलाया जाएगा
भारत ने इस्लामाबाद में स्थित अपने उच्चायोग से सभी रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इन पदों को तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी हमले के बाद सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर बुधवार सुबह जल्दी भारत लौटे. उन्होंने एयरपोर्ट पर उतरते ही विदेश मंत्री जयशंकर और NSA डोभाल के साथ तत्काल बैठक की, जिसमें विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री भी शामिल हुए.
CCS के इन फैसलों से यह साफ है कि भारत अब पाकिस्तान के साथ किसी भी स्तर पर सामान्य संबंध बनाए रखने के लिए तैयार नहीं है, जब तक कि सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह से बंद नहीं होता.
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रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में शहीद हुए रायपुर निवासी दिनेश मिरानिया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और उनकी अंतिम यात्रा में कंधा देकर अंतिम विदाई दी.
इस दौरान मुख्यमंत्री ने परिजनों से भेंट कर संवेदना व्यक्त की और प्रदेश सरकार की तरफ से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूतों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता.
साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री मिरानिया के पावन स्मृतियों को सहेजने और चिर स्थायी बनाने लिए सरकार किसी सड़क या चौक को उनके नाम पर करने की बात कही.
साय ने कहा कि आतंकवादियों की इस कायराना हरकत ने देश की आत्मा पर चोट किया है. पूरे प्रदेश के लिए भी यह दुख और पीड़ा का क्षण है. घिनौनी आतंकवादी घटना में प्रदेश ने अपना एक बेटा खो दिया है. उन्होंने कहा कि धारा 370 हटने से जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित हुई. जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला और घाटी के विकास को गति मिली थी. आतंकवादियों ने पर्यटकों के जरिए कश्मीर और देश को अस्थिर करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि पूरा देश एकजुटता के साथ इस अमानवीय कृत्य का बदला लेगा. साय ने कहा कि पाकिस्तान के शह पर हुई इस हमले का अंजाम उसे भुगताना पड़ेगा.
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मुस्लिम समाज ने घोर निंदा कर उठाई सूक्ष्म जांच की मांग
रायगढ़ : जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का सर्व मुस्लिम समाज रायगढ़ ने कड़ी निंदा करते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की है. सर्व मुस्लिम समाज रायगढ़ के सरपरस्त शेख कलीमुल्लाह वारसी सदर हाजी अशरफुद्दीन चिश्ती नायब सदर हाजी शेख मुबस्सीर हुसैन, मोहम्मद जावेद,शब्बीर भाई, भोलू अली जाफरी, सेक्रेटरी अब्दुल कदीर साबरी खजाँची मोहम्मद मतीन कुरैशी .प्रवक्ता सैय्यद शाहबाज रिजवी, इमरान आलम खान ,कानूनी सलाहकार एडवोकेट असलम खान, एडवोकेट डॉ मुशर्रफ अली, संगठन सचिव शब्बीर अहमद साबरी, शमशुल कादरी प्रचार सचिव सैयद असगर साबरी सह सचिव सैय्यद साबीर, मुमताज़ आलम, हिदायत खान फिरोज अली ईरानी आदि ने कहा इस कायराना हमले की जितना निंदा की जाए कम है. आतंकवादियों पर कड़ी कार्रवाई हो.
यह सिर्फ देश के दुश्मन नहीं है. बल्कि कश्मीरीयो के भी दुश्मन है. जम्मू कश्मीर राज्य का पर्यटन सबसे बड़ा उद्योग है. इस हमले के बाद पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा, आम कश्मीरी को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा. हम मोदी सरकार से मांग करते हैं कि आतंकवादियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जावे ताकि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना हो.सर्व मुस्लिम समाज ने कहा कि पुलवामा की तरह यह मामला ठंडे बस्ते में नहीं जाना चाहिए. बल्कि इस घटना की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए.
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पहलगाम आतंकी हमले के शहीदों को बिलासपुर में विनम्र श्रद्धांजलि
बिलासपुर : भाई चारा एकता मंच द्वारा बुधवार की शाम देवकीनंदन चौक, बिलासपुर में पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में शहीद हुए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
इस मौके पर कैंडल मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी तादाद में शहर के गणमान्य नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
सर्व प्रथम खालिद खान ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया. साथ ही कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता. इस्लाम ने हमेशा भाईचारे का संदेश दिया है. जो लोग आतंकी संगठन से जुड़े है वे देश द्रोही है और उन्हें फांसी की सजा होनी चाहिए.
कार्यक्रम में भाई चारा एकता मंच के सदस्य शाहरुख अली ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की. इस श्रद्धांजलि सभा में प्रियंका शुक्ला (अधिवक्ता) ने कहा कि ये हमला निंदनीय है इंसाफ मिलना चाहिए.
सज्जाद, अब्दुल वाहिद सिद्दीकी, लखन सुबोध, वीरेंद्र भारद्वाज, रेहान रज़ा, नंदकश्यप भैया और रमीज अली सहित कई अमन चैन पसंद लोग मौजूद रहे.
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रायपुर : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अभी देश में जो हालात है पूरे चिंतित और पूरे विश्व को और देश को झकझोर कर देने वाली घटना पहलगाम में हुआ. पहलगाम के आतंकी हमला में 28 लोगो की जाने चली गयी और हंसता खेलता परिवार उजड़ गया. जो परिवार खुशियां बांटने गया था. पर्यटन के लिये गये थे. कोई शादी का सालगिरह मनाने गया था. कोई अपने परिवार के साथ गये थे. उनकी बहुत ही दर्दनाक ढंग से आंतकवादियों ने हत्या की है. इस घटना की कांग्रेस पार्टी ने कड़ी शब्दो में निंदा की है.
पहलगाम की घटना में बहुत सारे प्रश्न छोड़ गये है. यह बहुत बड़ी घटना है और इस घटना की गंभीरता इससे लगाया जा सकता है. पूरे देश के 140 करोड़ जनता इससे व्यतीत है, दुखी है. आक्रोशित है. विश्व के कई राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी इस घटना में शोक व्यक्त किया है. आज ही सीडब्लूसी की बैठक हुई उसमें भी प्रस्ताव पारित किया गया. कल भी मेरे निवास में पूर्व मंत्रीगण, विधायक एवं पूर्व विधायक गण कांग्रेस के कार्यकर्ता पदाधिकारीगण सभी मौजूद थे. वहां मेरे निवास में दो मिनट का मौन श्रद्धांजलि अर्पित किया. जितने भी घायल व्यक्ति है वो भी जल्द से जल्द स्वस्थ हो यही कामना करता हूं.
पहली बात यह है कि ये आंतकवाद ने हम सब को झकझोर कर दिया है. जो 28 लोगो की मौत हुयी है. दूसरी बात यह है कि इसमें धर्म पूछ-पूछकर हत्या की गयी, वहां जो पिट्ठू वाले, टट्टू घोड़े चला रहे थे और जो होटल वाले थे, जो टैक्सी वाले थे. उन्होंने मानवीयता का उत्कृष्ट मिसाल पेश किया कि जितने भी प्रभावित परिवार के लोग फंसे हुये थे उनको सुरक्षित स्थान में लाने के लिये अपनी जान की परवाह न करते हुये अपने जान को जोखिम में डालते हुये मदद की और उसमें दो लोगो की मौत हुई. बहुत सारे लोग ऐसे थे जो जंगल में छुपे हुये थे. आये नदी, पहाड़ क्रास कर और वहां अपने घरो में उनको आश्रय दिया.
तो दूसरा पहलू भी हमको दिखाई देता है. क्योंकि हम लोग भी छत्तीसगढ़ से है. नक्सल प्रभाव से पीड़ित है. बहुत सारे नक्सली घटनायें हुयी. जिसमें अनको परिजनों और अपने परिचितो को खोया है और हमने अपने नेताओं को खोया है. उस आतंकी और नक्सली हमला के बारे में बहुत करीब से अनुभव कर सकते है. ऐसे ही झीरम घाटी की जो घटना घटी थी और पहलगाम की जो घटना है जिसमें दो समानताएं देखने को मिलता है. पहली समानता यह है कि दोनों जगह सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी. न ही पहलगाम सुरक्षा व्यवस्था थी और न ही झीरम घाटी में सुरक्षा व्यवस्था थी. पहलगाम में भी 28 लोगों की मौतें हुयी और झीरम घाटी में भी 28 लोगों की मौतें हुयी.
नक्सली बम ब्लास्ट करते है या अंधाधुंध फायरिंग करते है. आतंकवादी का काम भी उसी तरह का है वो दहशतगर्दी है. चाहे बमबारी करे. चाहे गोलीबारी करे. झीरम घाटी में नक्सली रुक कर बैठे रहे उनको मालूम था सुरक्षा बल इनकी मदद के लिए नहीं आयेंगे. यहां भी पुलिस बल और सैनिक उनकी मदद में नहीं आयेंगे. ये विश्वास कैसे आया, ये प्रश्न वाचक चिन्ह है? झीरम घाटी की घटना को ताजा कर दिया। देश में जो रिएक्शन आ रहा है बेहद दुखद है। भारतीय जनता पार्टी के लोग आपदा में अवसर तलाशने का काम कर रहे है. जितने भी राजनीतिक दल के नेता है सभी ने इस घटना की कड़ी निंदा की. क्षेत्रीय दल हो या राष्ट्रीय दल हो सबने इस घड़ी में शोक व्यक्त किया। सभी ने एकजुट होकर सरकार को समर्थन देने की बात ने कही.
इस अवसर पर हम सब सरकार के साथ है। दुर्भाग्यजनक है कि भारतीय जनता पार्टी सोशल मीडिया में जिस तरह की बातें कही. जिस तरह प्रचारित करने की कोशिश की. किसी ने भी सवाल नहीं उठाया कि इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी? सुरक्षा वहां क्यों नहीं था? इंटेलिजेंस की भूमिका क्या रही? इसके पहले प्रधानमंत्री का दौरा था, स्थगित हुआ. उसके पहले गृह मंत्री ने कश्मीर के मामले में समीक्षा बैठक की. ये सब होने के बाद भी इतनी बड़ी घटना कैसे घट गयी.
इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सरकार को जवाबदेही तय करना चाहिए. सवाल 28 जाने कहां है? हमारे बीच में थे कहां है? उनको न्याय कब मिलेगा? चाहे कोई भी कार्यवाही करे, जवाबदारी तय करनी पड़ेगी. पूरे देश, सरकार के साथ है. लेकिन ये बताए इस चूक की जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर हुआ उसके लिए जिम्मेदार कौन है? सहायता नहीं पहुंची उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का उत्तर कौन देगा?
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जिस तरह से देश में घटनाएं घट रही हैं. संविधान के मूल्यों को तोड़ा जा रहा है. विपक्षी दल के नेताओं को दबाया जा रहा है. जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं वहां-वहां क्षेत्रीय दल के नेताओं को, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को निशाने में लेकर कार्यवाही कर रही है. जब भी हमारा राष्ट्रीय अधिवेशन होता है जितने भी सेंट्रल एजेंसी है हमारे खिलाफ सक्रिय हो जाती है. रायपुर में राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ कांग्रेस नेताओं के घर में ताबड़तोड़ ईडी के अधिकारी दबिश दिए. ताकि कार्यक्रम फेल हो जाए. उस कार्यवाही के चलते ध्यान भटके और उस पर कोई चर्चा न हो. अहमदाबाद में खड़गे जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ वहां पर भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चाएं हुई. मजदूरों का मनरेगा का काम बंद हो गया है. नौजवानों की भर्ती बंद हो गयी है. जितने भी सार्वजनिक उपक्रम है उनमें भर्तियां बंद है. सरकारी विभागों में भर्तियां बंद है. महंगाई मनमाने बढ़ रही है. रसोई गैस की कीमते बढ़ी. बिजली के दर लगातार बढ़ रहे है. कटौतियां हो रही है. ट्रेन का किराया बढ़ रहा है. कोरोना के समय सीनियर सिटीजन को लाभ मिलता था. उसे खत्म कर दिया था, आज तक छूट वापस नहीं हुई है. जनता के मुद्दों को लेकर आम जनता के बीच में जाना चाहते है.
जैसे ही राष्ट्रीय अधिवेशन समाप्त हुआ, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया जी और नेता प्रतिपक्ष राहुल जी के खिलाफ चार्जशीट 365वें दिन में दाखिल किया, जो कि आखिरी दिन था. उनके पास नेशनल हेराल्ड के मामले में कोई सबूत नहीं था. 1937 से बना नेशनल हेराल्ड एजेएल बना उसके तहत तीन पेपर निकलते थे नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज.. नेशनल हेराल्ड अंग्रेजी में, नवजीवन हिन्दी में और कौमी आवाज उर्दू में निकलता था। आजादी की लड़ाई इनकी भूमिका रही. नेशनल हेराल्ड वह समाचार पत्र है। पं. जवाहर लाल नेहरू, किदवई और पंत ने इसकी स्थापना की थी. जनता की आवाज सरकार तक पहुंचे इसलिये नेशनल हेराल्ड की स्थापना की गई थी. 1942 आंदोलन के समय अंग्रेजो इसमें 1945 तक प्रतिबंध लगा दिया था. यह वह संस्था जो राष्ट्रीय आंदोलन के प्रतीक रूप में था। यह हमारे लिये राष्ट्रीय धरोहर भी है. क्योकि आजादी की लड़ाई कांग्रेस के नेतृत्व में और महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लड़ाई लड़ और आजादी पाई. नेशनल हेराल्ड हमारे लिये महत्वपूर्ण है. देश की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका थी उस समय बड़े नेता खुद अपना समाचार पत्र निकालते थे. देश के आजादी के समय इस समाचार के माध्यमों से आम जनता तक खबरे पहुंचाई जाती थी.
मीडिया से जुड़े लोगों को पता है कि मीडिया चलाने में आर्थिक संकट का सामना पड़ता है. समय के साथ-साथ नेशनल हेराल्ड और उससे जुड़ी कंपनिया घाटे में चली गयी. पं. जवाहर लाल नेहरु और मोतीलाल नेहरु ने अपनी पूरी संपति दान कर दी. नेशनल हेराल्ड कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिये और वहां काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन के लिये कांग्रेस पार्टी द्वारा मदद की गयी. कांग्रेस पार्टी ने नेशनल हेराल्ड के कर्मचारियों के मदद के पैसा दिया तो उसमें मनी लांड्रिंग कहां से हो गया?
ईडी का काम है कि दो नंबर के पैसे को इधर करने वाले के ऊपर कार्यवाही करना है. लेकिन ईडी बदले की भावना से कार्यवाही करती है. लेकिन भाजपा सरकार सेन्ट्रल एजेंसियों के माध्यम से विपक्ष के नेताओं को टारगेट कर रही है और डराने, धमकाने का काम कर रही है. सरकार सभी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिये वक्फ बोर्ड कानून ले आये है. वक्फ बोर्ड कानून के खिलाफ हिंसा और आगजनी की घटना हो रहा है. इससे ध्यान हटाने के लिये सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर चालान प्रस्तुत कर दिया गया. सरकार एक समस्या का हल नहीं कर पाते इसको दबाने के लिये दूसरी समस्या ले आते है. दूसरी समस्या हल नहीं कर पाते तो तीसरी समस्या ले आते है. ईडी की कार्यवाही सिर्फ विपक्ष को दबाने और डराने के लिये की जा रही है. कांग्रेस पार्टी इस सबसे डरने वाली नहीं है. कांग्रेस पार्टी के नेताओं की छवि धूमिल करने और पार्टी को बदनाम करने भाजपा जो षड्यंत्र कर रही है। इसके लिये पार्टी ने 40 दिन कार्यक्रम करने का निर्देश जारी किया है. प्रदेश भर में रैलियां होगी. 25 अप्रैल को दुर्ग में कार्यक्रम में प्रदेश भर के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे. भीषण गर्मी के कारण यह कार्यक्रम 6 बजे से शुरु होगा. हमारी तैयारी पूरी हो गयी है.
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370 के बाद सब ठीक होगा ये मान लेना गलत : चरणदास महंत
खूबसूरत वादियों वाले जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर आतंकी हमले से अशांति फैल गई है. आतंकियों की गोलीबारी में 26 पर्यटकों की मौत हो गई। मृतकों में रायपुर के कारोबारी दिनेश मरियानी भी शामिल है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक हमले का विरोध किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि ये घटना सरकार की फेलियर के कारण ही हुई है.
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने केंद्र सरकार की फेलियर से आतंकी हमला होने का आरोप लगाया है. सुरक्षाबल वहां तैनात नहीं किए गए थे। 370 हटने के बाद कुछ नहीं होगा ये मान लेना गलत है. सरकार की फेलियर के कारण ही ये घटना हुई है. घटना की जितनी निंदा की जाए कम है.
गौरतलब है कि मंगलवार दोपहर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन इलाके में यह आतंकी हमला हुआ. हमले के वक्त आतंकी वर्दी में थे और उन्होंने यात्रियों की पहचान पूछकर उन पर गोलियां बरसाईं.. रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकी विशेष रूप से पुरुषों को निशाना बना रहे थे. अलग-अलग राज्यों से घूमने पहुंचे लोगों की हमले में मौत हुई है. कुल 27 लोगों को मौत हुई है. वहीं इस हमले में एक स्थानीय निवासी के भी मारे जाने की खबर है.
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टीएस सिंहदेव आतंकी हमले पर बोले– देश को चाहिए निर्णायक कदम
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इसे “अमानवीय, वीभत्स और निंदनीय” करार दिया और कहा कि यह हमला देश में अस्थिरता फैलाने की साजिश है. उन्होंने कहा, “भारत को अब आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की रणनीति अपनानी होगी. यह वक्त केवल बयानबाज़ी का नहीं. बल्कि ठोस और निर्णायक कार्रवाई का है.”
सिंहदेव ने केंद्र सरकार से मांग की कि जिस प्रकार छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ टारगेट तय कर अभियान चलाया गया. उसी तरह आतंकवाद के खिलाफ भी साफ रणनीति बनानी चाहिए. उन्होंने पाकिस्तान को चेताते हुए कहा कि अगर उसकी जमीन से आतंकी गतिविधियां चलती रहीं. तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश का हर नागरिक आज सेना और सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है. उन्होंने कहा, “ऐसी घटनाएं हमारे हौसले को नहीं तोड़ सकतीं. हम और ज्यादा एकजुट होकर आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देंगे.
राज्य में सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरगुजा से रामानुजगंज तक की सड़कें जनता की उम्मीदों पर पानी फेर रही हैं. सिंहदेव ने कहा, “मैंने पहले सरकार को साढ़े 4 अंक दिए थे, लेकिन अब हालात और भी बदतर हो गए हैं, इसलिए अब सिर्फ 4 अंक देता हूं.”
उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के पीछे जनता की एकमात्र उम्मीद थी– विकास, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद सड़कों की स्थिति जस की तस बनी हुई है. इससे साफ है कि सरकार जमीनी स्तर पर काम करने में विफल रही है। सिंहदेव ने लोरमी में आदिवासी सभा में शामिल होने के दौरान प्रेस को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं.
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