राजिम कुंभ कल्प का हुआ समापन, सीएम विष्णुदेव साय ने भगवान राजीव लोचन की पूजा-अर्चना कर की प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना
Rajim Kumbh Kalpa concluded, CM Vishnudev Sai prayed to Lord Rajiv Lochan and wished for the happiness and prosperity of the people of the state
राजिम : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में राजिम कुंभ कल्प का महाशिवरात्रि के अवसर पर समापन हो गया. 12 फरवरी से शुरु हुआ राजिम कुंभ कल्प के समापन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे. सीएम साय ने छावा फिल्म के राज्य में टैक्स फ्री करने की भी घोषणा की है.
उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम पर 144 साल बाद महाकुंभ का दुर्लभ संयोग, संतों की दिव्य उपस्थिति, और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था की लहरों से राजिम महाकुंभ का समापन ऐतिहासिक बन गया. मुख्यमंत्री के साथ केबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने इस पावन मौके पर भगवान राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया.
राजिम कुंभ कल्प के अंतर्गत आयोजित महानदी मैया की भव्य महाआरती में मुख्यमंत्री साय मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के मध्य विधि-विधान से शामिल हुए. मुख्यमंत्री श्री साय ने महानदी मैया से प्रदेश की खुशहाली की कामना की. इस अवसर पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, वन एवं जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप, राजिम विधायक रोहित साहू, बसना विधायक संपत अग्रवाल तथा अन्य गणमान्य नागरिक, संत महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे.
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम है.
सीएम साय ने यह भी ऐलान किया कि राजिम कुंभ के विस्तार के लिए 54 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है. आने वाले वर्षों में इसे और भव्य बनाने के लिए संतों के सुझावों पर अमल किया जाएगा.
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महाशिवरात्रि पर त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी - भगवान कुलेश्वर नाथ के दर्शन करने श्रद्धालुओं की लगी लंबी कतार
स्नान उपरांत सूर्यदेव को अर्ध्य दिया तथा रेत से शिवलिंग बनाकर किया जलाभिषेक
धार्मिक नगरी राजिम में आयोजित कुंभ कल्प में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था, भक्ति और विश्वास की डूबकी लगाई। पुण्यकाल और मुहूर्त का इंतजार किए बिना श्रद्धालु आधी रात से ही आस्था की डुबकी लगने त्रिवेणी संगम पहुंच गए। स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ संगम घाट, स्वर्ण तीर्थ घाट, नेहरू घाट, स्नान कुंड में उमड़ पड़ी। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दीपदान भी किया। महिलाओं, पुरुषों सहित बच्चों ने स्नान उपरांत सूर्यदेव को अर्ध्य दिया तथा रेत से शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक किया।
महाशिवरात्रि पर इस पुण्य स्नान का काफी महत्व माना जाता है, इसलिए लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान कर दीपदान किया। स्नान के बाद दीपदान करने की परंपरा सदियों पुरानी चली आ रही है। इस परंपरा और श्रद्धा का पालन आज भी श्रद्धालुओं को करते देखा गया है। नदी की धार में दोने में रखी दीपक की लौ किसी जुगनू की भांति चमकती नजर आई। कई महिलाओं ने रेत का शिवलिंग बना कर बहुत ही श्रद्धा के साथ बेल पत्ता, धतुरा के फूल चढ़ाकर पूजा आरती भी की।
इसके बाद श्रद्धालुओं की लम्बी लाइन श्री कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर और श्री राजीव लोचन मंदिर, बाबा गरीब नाथ की ओर लग गई। त्रिवेणी संगम के बीच स्थित भगवान श्री कुलेश्वर नाथ महादेव के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर से आधा किलोमीटर तक दिखाई दी, जो धीरे-धीरे बढ़ते चली गई। रास्ते भर हर-हर महादेव और जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष लगाते श्रद्धालुओं ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान भी किए। कई स्थानों पर भंडारों का आयोजन हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
महाशिवरात्रि पर संगम स्नान का है खास महत्व
वैसे तो पर्व व त्यौहार में स्नान का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन महाशिवरात्रि पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने का खास कारण है। बताया जाता है महाशिवरात्रि में किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की प्रार्थना कि जाए, तो मॉ पार्वती और भोलेनाथ सीधे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है। भगवान शंकर के शरीर पर श्मशान के भस्म, गले में सर्पाे की हार, कंठ में विष, जटाओं में पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकारी ज्वाला उनकी पहचान है। माना जाता है कि महानदी, सोंढूर, पैरी के संगम में स्नान करने से तन पवित्र तो होते ही है मन की मलिनता भी दूर हो जाती है। इस दिन संगम की सूखी रेत पर सूखा लहरा लेने की भी परंपरा है।
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महाशिवरात्रि पर नागा साधुओं सहित साधु संतों ने निकाली शोभायात्रा, पर्व स्नान करने उमड़ी नागा साधु-संतों की भीड़
केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा हुए शामिल
अस्त्र-शस्त्रों से लैस नागा बाबाओं, साधु-संतों ने किया शौर्य प्रदर्शन
राजिम कुंभ कल्प मेला के अंतिम दिवस महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर नागा बाबाओं, साधु-संतों, विभिन्न अखाड़ों ने शाही स्नान के लिए ऐतिहासिक शोभायात्रा संत समागम स्थल परिसर से सुबह 7 बजे निकाली। इस शोभा यात्रा में समस्त नागा, साधु-संतों के साथ केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राजिम विधायक रोहित साहू सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि व विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए। शोभायात्रा में सुसज्जित पालकियों शाही बग्गी, घोड़ों में विभिन्न साधु-संत सवार थे।
शोभायात्रा संत समागम स्थल से शुभारंभ होकर श्रीकुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के पीछे मार्ग से नेहरू बाल उद्यान होते हुए, राजिम पुल, पं. सुंदरलाल शर्मा चौक, गौरवपथ राजिम, व्हीआईपी मार्ग होते हुए मेला में बने शाही कुंड में पहुंचे। शोभायात्रा का स्वागत दोनों शहर नवापारा और राजिम में विभिन्न चौक चौराहों में फूल बरसा कर किया गया। शोभायात्रा में विभिन्न चौक में अनेकों अस्त्र-शस्त्रों से लैस नागा बाबाओं, साधु-संतों ने शौर्य प्रदर्शन करते हुए अखाडा चलाते रहे। नागा साधुओं के तलवार और फरसा भांजते खुशी से नाचते देखकर मेले में आए अंचलवासी भी रोमांचित हो उठे। धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए शोभायात्रा शाही कुंड के पास पहुंची। यहां नागा साधुओं ने विधि विधान के साथ शस्त्र पूजन पश्चात कुंड में छलांग लगाई।
नागा बाबाओं के साथ केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राजिम विधायक रोहित साहू, संजय श्रीवास्तव, राजिम नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष महेश यादव भी कुंड में डुबकी लगाने के लिए उतर गए। शाही स्नान करने विभिन्न अखाड़ों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस विहंगम दृष्य को देखने मेला क्षेत्र के अलावा कुंड के पास बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ी हुई थी। शाही यात्रा की भव्यता का आनंद लेने विदेशी पर्यटक भी शामिल हुए। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की चाकचौबंध व्यवस्था थी। इस शाही यात्रा में सबसे पहले श्री पंच दशनामी सन्याशी अखाड़ा के नागा साधु, अखिल भारतीय पंच रामानंदी वैष्णव अखाड़ा के तीनों अनी श्रीपंच निर्माेही अनि अखाड़ा, श्रीपंच निर्माेही दिगम्बर अखाड़ा, श्रीपंच निर्माेही निर्वाण, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के अलावा रामदास अखाड़ा, रविदास अखाड़ा, भैरवी शक्ति, हरिद्वार मंडली, करीब पंथ, सतनाम पंथ के संतों एवं उनके अनुयायियों ने भाग लिया।
शाही स्नान पश्चात डिप्टी सीएम विजय शर्मा, केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधायक रोहित साहू पैदल भगवान कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर पहुंचे। जहां भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
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राजिम कुंभ कल्प मेला के सांस्कृतिक मंच पर प्रख्यात गायिका स्वाति मिश्रा ने बांधा समा
भक्तिमय भजनों से गुंजा राजिम कुंभ स्थल
राजिम कुंभ कल्प मेला के समापन की पूर्व संध्या पर प्रख्यात गायिका स्वाति मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वाति मिश्रा ने एक से बढ़कर एक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। स्वाति मिश्रा ने राम आएंगे गीत सुनाकर दर्शकों में जोश भर दिया। कभी राम बनके..., नगरी हो अयोध्या सी..., मेरा आपकी की कृपा से..., रामा-रामा रटते रटते..., शंकर तेरी जटा से बहती..., चौखट पर चलकर आज..., ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने..., राधिका गोरी से..., राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी..., हर घर में एक ही नाम..., जैसे सुमधुर भक्तिमय भजनों से पूरा राजिम कुंभ स्थल गुंज उठा।
मंच पर युगल किशोर साहू की लोक कलामंच की झमाझम प्रस्तुति ने भी खूब तालियां बटोरी। जिसमें तोर चरण मा महतारी..., करियां बदरियां आगे..., जोड़ी तोर सुरता दिन रात सताथे..., जैसे लोकप्रिय गीत और नृत्य ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं यशवंत भेड़िया की लोककला मंच ने छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति की छटा बिखेरी। 11 वर्षिय उपासना भास्कर ने कत्थक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। चेतन देवांगन ने कापालिक शैली में पांडव की गाथा गाकर पंडवानी प्रेमियों के लिए एक नया मिशाल कायम किया। कलाकारों का सम्मान राजिम विधायक रोहित साहू, संयुक्त कलेक्टर राकेश गोलछा ने स्मृति चिन्ह भेंटकर किया।
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राजिम कुंभ कल्प के मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया
राजिम कुंभ कल्प के सांस्कृतिक मंच पर दोपहर 12 बजे से 7 बजे तक एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। मंच पर कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति मोहनलाल मानिकपन की टीम ने भजन संध्या की प्रस्तुति देकर दर्शकों को भाव-विभोर किया। छत्तीसगढ़ के महिमा संगी..., रचा हैं सृष्टि को जिस प्रभु ने..., भजन करो रे... आदि भजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की अगली कड़ी में चुम्मन लाल साहू महासमुंद ने जगराता की भक्तिमय प्रस्तुति दी। इसके बाद मुकुंद यादव ने प्राचीन खेल अखाड़ा का अजीबों-गरीब करतब दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। बकली से आई गीतांजली साहू ने खाली हाथ आए हैं..., उठो सिया श्रृंगार करो..., जैसे भजनों की शानदार प्रसतुति दी।
मुकेश साहू जामगांव ने मंच पर जगराता की भी प्रस्तुति दी। दाऊलाल घृतलहरे ने मंगल भजन की प्रस्तुति दी, जिसमें गुरु घासीदास के महिमा का बखान किया। धमेन्द्र कुमार अभनपुर ने जय सतनाम के माध्यम से गुरू घासीदास बाबा के जीवन का भजन के माध्यम से व्याख्या किया। गौतम साहू जामुल भिलाई ने पांडव पर आधारित पंडवानी का गायन मंच पर किया। विनय बंजारे बरबसपुर में लोककला मंच के माध्यम से छत्तीसगढी के संस्कृति, रीति-रिवाज, तीज-त्यौहारो को गाना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। वहीं भागवत कश्यप बिलासपुर ने भी छत्तीसगढ़ी गीतों का नॉन स्टाप प्रस्तुति देकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
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शिव ही वो गर्भ हैं जिसमें सब कुछ जन्म लेते हैं- हेमंत गिरी गोस्वामी
राजिम कुंभ कल्प में नगरी सिहावा से आए हेमंत गिरी गोस्वामी ने बताया कि राजिम एक पवित्र धाम है, जहां शिवजी की कृपा भक्तों पर बरसती हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा का नाम ही शिव हैं, जो सभी का कल्याण करते हैं। शिव सृष्टि के उत्पत्ति, स्थिति और संहार के अधिपति हैं। शिव काल, महाकाल ही ज्योतिष शास्त्र के आधार हैं। समस्त ब्रह्मांड है और पूरी सृष्टि में शिव विद्यमान है। स्वयं भू शाश्वत सर्वाेच्च सत्ता है और विश्व चेतना हैं।
शिवजी की सौम्य आकृति एवं रौद्र रूप विश्व में विख्यात हैं। शिव हिन्दू धर्म में सबसे प्राचीन और लोकप्रिय देवता है। शिव ही वो गर्भ हैं जिसमें सब कुछ जन्म लेते हैं और वे ही वो गुमनामी हैं जिनमें सब कुछ फिर से समा जाता हैं। सब कुछ शिव से आता हैं और शिव में ही मिल जाता हैं। शिव और रुद्राक्ष का संबंध बताते हुए कहा की रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर दुनिया के कल्याण के लिए सैकड़ों साल तक तप किया। एक दिन अचानक ही उनका मन दुखी हो गया। तब उन्होंने अपनी आंखे खोली तो उनकी आंसूओ की बूंदें गिर गई। इन्ही आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। भगवान शिव हमेशा ही अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। उनकी लीला से ही आंसू आकार लेकर स्थिर अर्थात् जड़ हो गया। जनसाधारण के अनुसार अगर भगवान शिव और माता पार्वती को खुश करना हैं तो रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
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राजिम कुंभ कल्प के नवीन मेला मैदान में 227 जोड़ो का दाम्पत्य जीवन में प्रवेश
नववधुओं को 35 हजार रुपए सहित अन्य सामान उपहार स्वरूप किया गया प्रदान
मंत्री-विधायक ने नवदम्पतियों को दिया आशीर्वाद
राजिम कुंभ कल्प के समापन अवसर पर नवीन मेला मैदान में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। योजना अंतर्गत जिले के 227 बेटियों का विवाह सम्पन्न हुआ। सभी जोड़ों का धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिले के प्रभारी मंत्री एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू, अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू सहित गरियाबंद जिले के नगर पालिका एवं नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्षगण तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं आमजनों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिले के प्रभारी मंत्री एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प मेला में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 227 बेटियां नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। महाशिवरात्रि पर नवविवाहित ये बेटियां लक्ष्मी स्वरूप में घर प्रवेश करेंगी। उन्होंने वर-वधुओं को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए परिवारों का भी मान-सम्मान बनाये रखने के लिए प्रेरित किया। मंत्री श्री बघेल ने कहा कि देश में चार कुंभ होते हैं, लेकिन पांचवे कुंभ कल्प के रूप में राजिम देश-विदेश में विश्व में प्रसिद्ध हो गया है। कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजिम कुंभ की भव्यता लौटाई है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही महिला बाल एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि हमारी सरकार आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं एवं महतारियों के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। जिसमे से एक मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 50 हजार रूपये नवविवाहित जोड़ों को दिया जाता है। इससे विवाह के समय होने वाले खर्च और जरूरी तैयारियों की चिंता दूर हो गई। जिससे कमजोर एवं गरीब परिवारों के बेटियों के विवाह में होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है। उन्होंने दाम्पत्य जीवन में प्रवेश कर रहे जोड़ो के परिवारों से कहा कि इस बात का ध्यान रखें। बहु को बहु नहीं बेटी समझे, तभी परिवार सुख-समृध्दि की ओर आगे बढ़ेगा। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि प्रयागराज में अभी-अभी लोग डुबकी लगा कर आ रहे हैं। वही डुबकी हमें इस राजिम में भी लगानी है। भारत को सशक्त बनाने के लिए आप लोगों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प के आयोजन में आज 227 जोड़ो का दाम्पत्य जीवन में प्रवेश कर रहे। उन्होंने कहा कि बेटी जैसी जन्म लेती थी। माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है, लेकिन अब ऐसा नही होता। हमारी सरकार के महत्वपूर्ण योजना मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह से माता-पिता की चिंता दूर हो गई है। उन्होंने नव दंपत्तियों को वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दी।
राजिम विधायक रोहित साहू ने कहा कि विष्णुदेव साय की सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह की राशि को 30 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया है। हमारे सरकार की सोच है कि गरीब परिवार हंसी खुशी के साथ अपने परिवार में होने वाले विवाह को सम्पन्न करा सकें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू ने नवदाम्पत्य वर-वधु को शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर गरियाबंद जिले के नगर पालिका एवं नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गण सहित जिले के जनप्रतिनिधिगण, गरियाबंद कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग अशोक पांडेय एवं आमजन मौजूद थे.
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