विवादित पेपर की प्रिंटिंग के लिए बदले गए नियम, DPI की कमेटी ने चुने प्रश्न, गरियाबंद में सड़कों पर उतरा जनसैलाब, बलि का बकरा बने DEO?

Rules changed for printing the controversial paper, DPI committee selected questions, crowds took to the streets in Gariaband, DEO became the scapegoat?

विवादित पेपर की प्रिंटिंग के लिए बदले गए नियम, DPI की कमेटी ने चुने प्रश्न, गरियाबंद में सड़कों पर उतरा जनसैलाब, बलि का बकरा बने DEO?

​गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद के बाद अब गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग एक ऐसे विवाद में फंस गया है. जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है. मैनपुर विकासखंड में आयोजित अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान चौथी कक्षा के अंग्रेजी के प्रश्न पत्र में कुछ ऐसा छपा. जिसे हिंदू संगठनों ने सीधे तौर पर भगवान राम का अपमान करार दिया है.
​मामला तब सामने आया जब कक्षा चौथी के छात्र अंग्रेजी का पेपर देकर घर लौटे. आरोप है कि प्रश्न पत्र में भगवान राम की तुलना को लेकर ऐसे शब्दों या संदर्भों का प्रयोग किया गया है. जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. देखते ही देखते यह खबर आग की तरह फैल गई और अब इसे लेकर गरियाबंद सर्व समाज और विश्व हिंदू परिषद ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया.
​इसके खिलाफ आक्रोशित बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने दोपहर 2 बजे तिरंगा चौक पर मांग किया कि  इस गंभीर लापरवाही के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) पर तत्काल FIR दर्ज की जाए और दोषियों को सस्पेंड किया जाए.
​फिलहाल शिक्षा विभाग इस मामले को लेकर कहा कि पेपर गरियाबंद में नहीं बनाया गया है. गरियाबंद को मिलाकर अन्य 14 जिलों में भी यही प्रश्न पत्र गया है. ये प्रश्न पत्र रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में भी बांटा गया है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं सवाल यह उठता है प्रश्नपत्र को किसी ने पढ़ा नहीं होगा क्या? जब स्कूली किताबों या पेपरों में इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है. क्या यह वास्तव में छपाई की गलती थी या फिर इसके पीछे कोई गहरा एजेंडा?
मिली जानकारी के मुताबिक Lok Shikshan Sanchanalaya (DPI) द्वारा गठित कमेटी ने प्रश्नों का चयन किया और उसके बाद संभाग स्तर पर एक ही printing press को सभी जिलों की जिम्मेदारी सौंप दी गई. यहां से सवाल उठता है कि जब local exams guidelines जिला स्तर पर संचालन और छपाई की अनुमति देती हैं. तो फिर इस प्रक्रिया को संभाग स्तर पर क्यों ले जाया गया?
वहीं विवादित प्रश्न पत्र राजनांदगांव के शुभम प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया था. प्रिंटिंग प्रेस के मालिक आदेश श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने प्रश्न पत्र वैसा ही छापा जैसा उन्हें दिया गया था.
माध्यमिक  शिक्षा मंडल की official guidelines के मुताबिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की स्थानीय परीक्षाओं का संचालन district administration के तहत होना चाहिए. छात्रों की संख्या के हिसाब से हर जिले को अलग-अलग exam printing budget allocation किया जाता है—गरियाबंद को करीब ₹18 lakh, जबकि बड़े जिलों को ₹30 lakh से अधिक शिक्षा.. इसके बावजूद सभी जिलों के बजट को अप्रभावी कर centralized division-level printing का रास्ता अपनाया गया. आरोप है कि इसका मकसद politically connected printing operators को आर्थिक लाभ पहुंचाना था. इस प्रक्रिया में DPI as nodal authority की भूमिका निर्णायक रही.
तिल्दा में सेट हुआ था विवादास्पद प्रश्न पत्र ?
मीडिया रिपोर्टर्स के मुताबिक रायपुर संभाग के महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार और रायपुर सभी जिलों के लिए एक ही प्रश्न पत्र रायपुर से सेट किया गया था. विवादास्पद प्रश्न वाला अंग्रेजी का प्रश्न पत्र तिल्दा में सेट किया था. इसलिए विवादास्पद प्रश्न पत्र सिर्फ महासमुंद नहीं बल्कि सभी जिलों में बंट गया.
विवादास्पद प्रश्न को लेकर विहिप और बजरंग दल ने इसका खुलासा महासमुंद में करते हुए प्रदर्शन किया था। इसलिए शुरु में ऐसा लगा कि महासमुंद में ही गड़बड़ी हुई, जबकि यही प्रश्न पत्र सभी जिलों में बांटा गया. मामले को लेकर शिक्षक और अधिकारी पर कल निलंबन की गाज गिर सकती है.
जिला शिक्षा अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार- रायपुर संभागीय संयुक्त संचालक
रायपुर संभागीय संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि महासमुंद DEO विजय लाहरे दोषी पाए गए हैं. उनको जानकारी थी कि प्रश्नपत्र और छपे हुए प्रश्नपत्र एक जैसे नहीं थे. इसके बावजूद उन्होंने गलती को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. जिला शिक्षा अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं.
अगर जांच सिर्फ निचले अधिकारियों तक सीमित रही. तो यह साफ होगा कि system बचाया गया और अफसरों की बलि दी गई. लेकिन अगर DPI और प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका की भी जांच होती है. तभी यह माना जाएगा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है.
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