शराब दुकान खोलने को कर जनता-अध्यक्ष आमने-सामने, अध्यक्ष- नशे से बर्बादी आएगी, अब नगर पंचायत नहीं, जनता तय करेगी खुलेगी या नहीं!

The public and the president are face to face over the opening of a liquor shop. The president said that addiction will lead to ruin, now the public and not the Nagar Panchayat will decide whether it will be opened or not!

शराब दुकान खोलने को कर जनता-अध्यक्ष आमने-सामने, अध्यक्ष- नशे से बर्बादी आएगी, अब नगर पंचायत नहीं, जनता तय करेगी खुलेगी या नहीं!

गरियाबंद/कोपरा : गरियाबंद जिले के नगर पंचायत कोपरा में सोमवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला. जब नगरवासियों ने शराब दुकान खोलने की मांग को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष को आवेदन सौंपा. आमतौर पर शराब दुकानों का विरोध होते देखा जाता है. लेकिन यहां मामला बिलकुल उलट था. सैकड़ों की तादाद में लोग दुकान खुलवाने के समर्थन में आगे आए.
मिली जानकारी के मुताबिक कोपरा हाल ही में नगर पंचायत बना है. इसी के चलते आबकारी विभाग ने शराब दुकान खोलने के लिए नगर पंचायत से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मांगा था. हालांकि नगर पंचायत अध्यक्ष ने इस पर सहमति देने से इंकार कर दिया. अध्यक्ष का कहना है कि ऐसा विकास नहीं चाहिए. मैं इसके पक्ष में नहीं हूं. इधर नगर के लोगों ने सैकड़ों हस्ताक्षरों के साथ आवेदन जमा कर शराब दुकान खोलने की मांग कर डाली.
अब इस फैसले की बागडोर नगर पंचायत के हाथ से निकलकर सीधे वार्डवासियों के पास आ गई है. यानी पहली बार ऐसा हो रहा है जब जनता को खुद तय करना होगा कि उनके इलाके में शराब की दुकान खुलेगी या नहीं. आमतौर पर विकास योजनाओं, सड़कों और सफाई व्यवस्था को लेकर जनता की राय मांगी जाती है. लेकिन कोपरा में "शराब दुकान खोलनी है या नहीं". यह तय करने के लिए वार्ड स्तर पर रायशुमारी होगी. नगर पंचायत ने इस विवाद को हल करने के लिए जनता की तरफ गेंद फेंक दी है. अब नगरवासी ही तय करेंगे कि "पीने की आजादी" मिलेगी या नहीं.
नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि हर वार्ड में लोगों से उनकी राय ली जाएगी और बहुमत के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. यानी, कोपरा में अब चुनाव सिर्फ नेता चुनने के लिए नहीं. बल्कि "शराब दुकान खोलने या नहीं खोलने" के लिए भी होने जा रहा है.
आखिर क्यों मांग रहे शराब दुकान?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोपरा के आसपास के गांवों में शराब दुकानें मौजूद हैं. जहां लोग शराब लेने जाते ही हैं. ऐसे में उन्हें अन्य स्थानों पर जाने की बजाय नगर में ही सुविधा मिलनी चाहिए. कुछ लोगों ने तर्क दिया कि अगर शराब की बिक्री से राजस्व आता है. तो इससे नगर के विकास में मदद मिलेगी.
शराब दुकान पर ‘सियासी नशा’ भी तेज
नगर पंचायत अध्यक्ष के इनकार के बाद यह मामला राजनीतिक रुप भी ले सकता है. कुछ नेताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शराब दुकान खोलने से सामाजिक बुराइयां बढ़ सकती हैं. अपराध और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ सकते हैं. वहीं समर्थक इसे आर्थिक हितों से जोड़कर देख रहे हैं.
अब देखना दिलचस्प होगा कि नगर पंचायत अध्यक्ष जनता की इस अनोखी मांग के आगे झुकते हैं या अपने फैसले पर अडिग रहते हैं. और वार्डवासी विकास को शराब से जोड़कर देखते हैं या सामाजिक नुकसान को ज्यादा अहमियत देते हैं. नगर पंचायत का यह अनोखा प्रयोग पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया. अब कोपरा में असली घमासान इस बात पर होगा कि "शराब दुकान खुलेगी या वार्डवासी इसे ठुकरा देंगे. आबकारी विभाग की तरफ से भी जल्द इस मामले पर फैसला लिया जा सकता है.
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बता दें कि छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल 2025 से 67 नई शराब दुकानें खोली जा रही हैं. नई आबकारी नीति में नई दुकान खोलने का फैसला लिया गया है. साथ ही प्रीमियम शॉप के संचालन की भी अनुमति दी गई है. नई 67 दुकानें खुलने से दुकानों की तादाद बढ़कर 741 हो जाएगी. जिससे शासन के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी.
हालांकि कांग्रेस ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है. और नहीं करने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है. कांग्रेस का कहना है कि राज्य में जब कांग्रेस की सरकार थी. तो भाजपा शराबबंदी की बात करती थी. अब वही भाजपा सरकार शराब दुकानों की तादाद बढ़ाकर समाज को नशे की ओर धकेलने जा रही है.
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