रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र-शासकीय सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल, 3 आरोपी गिरफ्तार, कंप्यूटर-प्रिंटर जब्त

Fraud worth lakhs in Raipur under the pretext of securing government jobs; use of forged appointment letters, official seals, and signatures; 3 accused arrested; computer and printer seized.

रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र-शासकीय सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल, 3 आरोपी गिरफ्तार, कंप्यूटर-प्रिंटर जब्त

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का रायपुर ग्रामीण पुलिस ने पर्दाफाश किया है. आरोपी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे. इसके लिए कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र, शासकीय सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जाता था. मामले में मुख्य आरोपी प्रदीप कुमार पंडा सहित तीन आरोपियों को रायगढ़ और जशपुर से गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक मुख्य आरोपी प्रदीप पंडा ने खुद को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन के वित्त विभाग में अधीक्षक पद पर पदस्थ बताया. उसने शिकायतकर्ता प्रांजल आचार्य और उसकी बहन प्रियंका आचार्य निवासी महापल्ली, जिला रायगढ़ को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया. आरोपी ने प्रांजल को वित्त विभाग में सीधी भर्ती के जरिए लेखा अधिकारी की नौकरी दिलाने के लिए 5 लाख रुपये और उसकी बहन को सहायक ग्रेड-03/कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त कराने के लिए 3.50 लाख रुपये की मांग की थी.
WhatsApp पर भेजा कथित भर्ती विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने भरोसा दिलाने के लिए भर्ती से संबंधित विज्ञापन WhatsApp के जरिए भेजा. नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन का हवाला देकर शिकायतकर्ता को नवा रायपुर भी बुलाया गया. आरोप है कि इसके बाद शिकायतकर्ता और उसकी बहन के नाम पर कूटरचित नियुक्ति पत्र तैयार किए गए. जांच में सामने आया कि इन दस्तावेजों में एक अधिकारी के नाम की कथित फर्जी सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था. पुलिस के मुताबिक मंत्रालय महानदी भवन के वित्त विभाग के सचिव के नाम से भी फर्जी सील तैयार कराई गई और कूटरचित जॉइनिंग लेटर बनाया गया.
अलग-अलग किश्तों में लिए करीब 3 लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक नौकरी दिलाने के नाम पर शिकायतकर्ता को मंत्रालय के पास बुलाकर शुरुआत में 1.50 लाख रुपये नकद लिए गए. इसके बाद 20 हजार और 60 हजार रुपये लिए गए. फोन-पे के जरिए अलग-अलग किश्तों में करीब 50 हजार रुपये और अन्य खर्च के नाम पर करीब 20 हजार रुपये लेने की बात भी सामने आई है. इस तरह शिकायतकर्ता और उसकी बहन से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 3 लाख रुपये लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप है.
फर्जी सील बनाने की मशीन भी जब्त
जांच में तीन आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आने का दावा पुलिस ने किया है. मुख्य आरोपी प्रदीप कुमार पंडा पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम लेने का आरोप है. दिलविजय मिरी पर फर्जी नियुक्ति आदेश और दस्तावेज टाइप करने, जबकि भुनेश्वर राम भगत पर फर्जी शासकीय सील तैयार करने का आरोप है. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही और कब्जे से फर्जी शासकीय सील बनाने में इस्तेमाल मशीन के साथ नियुक्ति आदेश तैयार करने में कथित रूप से इस्तेमाल कंप्यूटर और प्रिंटर भी जब्त किया है.
अन्य लोगों से ठगी की भी जांच
पुलिस की जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि मुख्य आरोपी ने अन्य लोगों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था. अब पुलिस उपलब्ध दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने और कितने लोगों को निशाना बनाया. थाना राखी में अपराध क्रमांक 197/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 340(1) एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. मुख्य आरोपी प्रदीप पंडा पूर्व में जशपुर सिटी कोतवाली में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जा चुका है और वर्तमान में जमानत पर था.
गिरफ्तार आरोपियों में रायगढ़ निवासी प्रदीप पंडा (30), दिलविजय मिरी (29) और जशपुर निवासी भुनेश्वर राम भगत (57) शामिल हैं. तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. रायपुर ग्रामीण पुलिस ने नागरिकों से अपील किया कि सरकारी नौकरी या नियुक्ति दिलाने का दावा कर रुपये मांगने वाले लोगों के झांसे में न आएं. किसी भी नियुक्ति पत्र, जॉइनिंग लेटर, शासकीय सील और हस्ताक्षर की संबंधित विभाग से पुष्टि जरूर करें.
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