बजट आने से पहले ही महंगे हो जाएंगे बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला, आज से 15-40% तक कीमत में होगा इजाफा, शौकीनों को लगेगा शॉक
Bidi-cigarettes, tobacco, and pan masala will become more expensive even before the budget is announced. Prices will increase by 15-40% from today, shocking those who consume them.
नई दिल्ली : अगर आप सिगरेट, पान मसाला या तंबाकू से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. तो यह खबर सीधे आपकी जेब और बजट से जुड़ी है. आज यानी 1 फरवरी से देश में इन वस्तुओं’ पर सरकार द्वारा किए गए इन बदलावों का सीधा असर इन उत्पादों की कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है. हालांकि,जीएसटी की संशोधित दरें तकनीकी रुप से पिछले साल सितंबर में ही प्रभाव में आ गई थीं. लेकिन सिगरेट और तंबाकू जैसे उत्पादों के लिए विशेष प्रावधान आज से लागू होंगे.
जेब पर कितना बढ़ने वाला है बोझ?
1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर एक अतिरिक्त ‘उत्पाद शुल्क’ (Excise Duty) और पान मसाला पर ‘स्वास्थ्य उपकर’ (Health Cess) लगना शुरु हो जाएगा. गौर करने वाली बात यह है कि यह नया शुल्क जीएसटी की उच्चतम दर, यानी 40% के ऊपर अलग से लगाया जाएगा.
आपको याद होगा कि जुलाई 2017 से इन सामानों पर 28% जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लगता था. अब नई व्यवस्था में पुराने उपकर की जगह ये नए उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य उपकर ले लेंगे. इसका सीधा मतलब है कि सरकार इन हानिकारक उत्पादों पर टैक्स के ढांचे को और ज्यादा सख्त कर रही है. जिससे कीमतों में उछाल आना स्वाभाविक है.
MRP पर टैक्स का नया गणित
सरकार ने सिर्फ टैक्स की दरें ही नहीं बढ़ाई हैं. बल्कि टैक्स वसूलने के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया है. आज से चबाने वाले तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा युक्त तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए ‘अधिकतम खुदरा मूल्य’ (MRP) आधारित मूल्यांकन शुरु होगा. अब इन पैकेट्स पर जो खुदरा बिक्री मूल्य छपा होगा. उसी के आधार पर जीएसटी तय किया जाएगा. इससे कर चोरी की गुंजाइश कम होगी और बाजार में बिकने वाले उत्पादों की सही कीमत पर ही टैक्स सरकार तक पहुंचेगा.
कंपनियों पर अब ‘तीसरी आंख’ का पहरा
सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब पर ही नहीं, बल्कि इन उत्पादों को बनाने वाली कंपनियों पर भी नकेल कसी गई है. पान मसाला निर्माताओं के लिए अब नियम बेहद सख्त हो गए हैं. उन्हें आज से ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून’ के तहत नया रजिस्ट्रेशन कराना जरुरी होगा.
इतना ही नहीं, कर चोरी रोकने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है. निर्माताओं को अपनी फैक्ट्री की सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे. यह कोई मामूली निगरानी नहीं होगी, बल्कि इन कैमरों की फुटेज को कम से कम 24 महीनों यानी दो साल तक सुरक्षित रखना होगा. साथ ही, उन्हें उत्पाद शुल्क अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि उनके पास कितनी मशीनें हैं और उनकी उत्पादन क्षमता कितनी है. अगर कोई मशीन 15 दिन तक बंद रहती है, तो ही वे टैक्स छूट मांग सकते हैं.
सिगरेट की लंबाई तय करेगी उसकी कीमत
सिगरेट पीने वालों के लिए गणित थोड़ा अलग है. केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में जो संशोधन किया गया है, उसके मुताबिक सिगरेट पर टैक्स उसकी लंबाई के हिसाब से तय होगा. अब सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक 2.05 रुपये से लेकर 8.50 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा.
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