स्कूलों में लड़कियों को देना होगा फ्री सैनिटरी पैड, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, आदेश न मानने पर स्कूल की मान्यता रद्द

Free sanitary pads must be provided to girls in schools, the Supreme Court has delivered a historic verdict, and schools will be derecognized for not complying with the order.

स्कूलों में लड़कियों को देना होगा फ्री सैनिटरी पैड, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, आदेश न मानने पर स्कूल की मान्यता रद्द

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी स्कूलों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में लड़कियों को फ्री में सैनिटरी पैड बांटना जरुरी होगा. इसके साथ ही लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम होना जरुरी है. जो स्कूल इस आदेश की पालना नहीं करेगा उसकी मान्यता रद्द की जाएगी. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांगों के अनुकूल टॉयलेट बनाए जाएं.
केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में 4 सालों से सुनवाई चल रही थी. कोर्ट ने इसको लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सोशल वर्कर जया ठाकुर ने एक जनहित याचिका लगाई और उनकी मांग थी कि मेन्स्ट्रुयल हाइजीन पॉलिसी को पूरे देश में लागू किया जाए. स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है. अगर लड़कियों को सैनिटरी पैड नहीं मिलते तो वे लड़कों की तरह बराबरी से पढ़ाई और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पातीं.
मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है. अगर लड़कियों को उचित सुविधा नहीं मिलती तो उनकी गरिमा और निजता प्रभावित होती है. लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं और यह उन टीचर्स के लिए है. जो मदद करना चाहते हैं. लेकिन संसाधनों की कमी की वजह से ऐसा नहीं कर पाते है. याचिका दायर करके लड़कियों के स्वास्थ्य सुरक्षा पर चिंता जताई और कहा कि पीरियड में होने वाली दिक्कतों की वजह से कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं. स्कूलों में लड़कियों के लिए फ्री पैड की सुविधा नहीं होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. कई बार तो शर्मिदा न हो पड़े इसके चलते वह स्कूल जाना ही बंद कर देती है.
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