अमित जोगी ने विधायक देवेंद्र यादव को बताया निर्दोष, बीजेपी पर लगाया हिंदुओं को बांटने का आरोप, कांग्रेस के लिए दिखी हमदर्दी तो बीजेपी की बताई बेदर्दी
Amit Jogi declared MLA Devendra Yadav innocent accused BJP of dividing Hindus showed sympathy for Congress and called it indifference for BJP
रायपुर : जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने बलौदा बाजार जिला जेल में अग्निकांड के आरोपियों से मुलाकात की और उन्हें इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया.
उन्होंने पुलिस द्वारा 1140 पन्नों के अभियोग पत्र की खामियों को उजागर किया. जोगी ने इसे निर्दोषों के संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और कहा कि आरोप पत्र सिर्फ सरकार के विरोधियों को टारगेट करने के मकसद से तैयार किया गया है. इतना ही नहीं अमित जोगी ने इस मामले में सियासत करने का आरोप लगाकर देवेंद्र यादव को निर्दोष बताया और बीजेपी पर हिंदुओं को बांटने का गंभीर आरोप लगाया. अमित जोगी ने जो 11 खुलासे किये उसके मुताबिक
1. बलौदा बाजार पुलिस के द्वारा 10 जून 2024 को रात 9 बजे FIR नम्बर 377/2024 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया लेकिन इसके सिर्फ आधे घंटे बाद बिना किसी आधार के 9:35 को टीआई सुहेला लखेश केवट के द्वारा अज्ञात के स्थान पर किशोर नौरंगे समेत 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ नामजद सूचना दर्ज कराई गई.
2. इसी कड़ी में DR में FIR क्रमांक 377 से 393 के बीच में कुल 13 अलग-अलग FIR, 356 लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए. इनमें से 186 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. दो आरोपी नाबालिग होने की वजह से जमानत पर रिहा हैं. 86 आरोपी बलोदा बाजार जिला जेल में और बाकी 98 आरोपी रायपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर केंद्रीय कारावास में निरुद्ध है.
3. FIR नम्बर 386/2024 में आरोपी ओमप्रकाश बंजारे और देवेंद्र यादव को छोड़ सभी बाकी FIR में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं और बाकी सभी आरोपियों के खिलाफ पुलिस की जांच पूर्ण है. इस आधार पर भी उनको जमानत का लाभ मिलना चाहिए.
4. आरोपियों पर यह आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा अमर गुफा की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दशहरा मैदान बलौदा बाजार में जनसभा का आवेदन किया गया. लेकिन 14820 पन्ने के 13 अभियोग पत्रों में कहीं पर भी उपरोक्त आवेदन की प्रतिलिपि नहीं है. क्योंकि वास्तविकता तो यह है कि उपरोक्त कार्यक्रम का आवेदन भाजपा के वर्तमान जिला अध्यक्ष व पूर्व विधायक सनम जांगड़े द्वारा किया गया था. इससे साफ है कि जांच दल द्वारा केवल सरकार के विरोधियों को टारगेट किया जा रहा है.
5. 10 जून 2024 को पुलिस उपमहानिरीक्षक द्वारा जारी बंदोबस्त आदेश के मुताबिक दशहरा मैदान, तहसील ऑफिस, चक्रपाणि स्कूल चौराहा, संयुक्त कार्यालय भवन, डीएफओ बंगले, सोनपुरी रोड जिला अस्पताल, अनुसूचित जाति हॉस्टल, पुलिस लाइन गार्डन, इंडोर स्टेडियम मुख्य गेट और कलेक्टर कार्यालय एवं पुलिस कार्यालय मुख्य गेट समेत 10 अलग-अलग स्थानों में बैरिकेडिंग की व्यवस्था किया जाना दर्शाया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल चक्रपाणि स्कूल चौराहा और अनुसूचित जाति हॉस्टल के सामने ही हल्की-फुल्की बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी.
6. दशहरा मैदान से कलेक्ट्रेट तक पूरे मार्ग में 34 सीसीटीवी कैमरे यातायात पुलिस के द्वारा लगाया जाना बताया है लेकिन आरोप पत्र में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि इनमें से 10 गायब, टूटे हुए और 18 बंद थे. सिर्फ दो कैमरों से मिले करीब 9 घंटे की CCTV फुटेज को आरोप पत्र में सम्मिलित किया गया है. पूरी फुटेज में कोई भी आरोपी अपराधिक कृत करते नहीं दिख रहा है.
7. आरोप पत्र में 9 पुलिस कर्मियों को चोटिल होना बताया गया है लेकिन उनकी मेडिकल रिपोर्ट से साफ़ है कि सभी चोटें मामूली थी और किसी भी हालत में यह जानलेवा (धारा 307 IPC) की परिभाषा में नहीं आती है.
8. आरोप पत्र से यह भी साफ होता है कि करीब ₹1 करोड़ की वाहनों को क्षति, जिसमें 28 मोटरसाइकिल, 2 फायर ब्रिगेड, 2 शासकीय वाहन सम्मिलित हैं. और कलेक्ट्रेट और एसपी संयुक्त कार्यालय में करीब ₹2 करोड़ की क्षति पहुंची है. इस तरह इस पूरे मामले में सिर्फ ₹3 करोड़ की संपत्ति को क्षति पहुंची है जबकि पुलिस द्वारा मामले की विवेचना में इससे कई गुना ज्यादा राशि खर्च की जा चुकी है.
9. इसके अलावा आरोप पत्र में तीन तरह के सबूत होना बताया गया है –
A. पुलिस कर्मियों के बयान (जो साक्ष्य में ग्राह्य नहीं हैं)।
B. 186 आरोपी की सिर्फ 6 गैर-शासकीय और तथाकथित रुप से “स्वतंत्र” गवाहों के द्वारा तहसीलदार के सामने शिनाख्त की. उपरोक्त 6 गवाहों में से 2 गवाह POSCO जैसे संगीन जुर्म में आज भी जेल में है और बाकी 4 गवाह भी सिटी कोतवाली थाने में आदतन अपराधी की लिस्ट में लेखबन्द हैं. इनकी “स्वतंत्रता” पर कतई भी यकीन करना बेवक़ूफी होगी.
C. बेमेतरा, दुर्ग, कवर्धा, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर और सक्ती जैसे अलग-अलग जिलों से पुलिस के द्वारा आरोपियों के घरों से पत्थर, बांस के डंडे और लोहे की रॉड की बरामदगी होना बताया है. भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार ऐसी सभी बरामदगी मौक़ाए वारदात पर मौजूद स्वतंत्र पंचों के सामने करना जरूरी है. लेकिन उपरोक्त सभी तथाकथित “हथियारों” की बरामदगी के सभी गवाह भी उपरोक्त 6 आदतन अपराधी ही हैं.
10. आरोप पत्र की यह बात भी बेहद हास्यास्पद एवं अव्यवहारिक है कि आरोपिगण पुलिस पर “हमले के दौरान फेंके” पत्थर, बाँस के डंडे और लोहे की रॉड को अपने-अपने घरों में सुरक्षित स्थानों में छुपा कर रखेंगे- जहां से पुलिस ने उनकी ज़ब्ती दर्शायी है.
11. आरोप पत्र में धारा 65-B, IT Act के अंतर्गत प्रस्तुत मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स, वीडियो रील और फोटो और दो CCTV कैमरा की फुटेज से यह कहीं से भी प्रमाणित नहीं होता है कि आरोपियों ने किसी को भी चोटिल किया या कोई भी लोक संपत्ति को क्षतिग्रस्त किया हो.
अमित जोगी ने कहा अगर 14820 पन्ने के 13 अभियोग पत्रों में वर्णित उपरोक्त सभी 11 तथाकथित “तथ्यों” को सही भी मान लें. तब भी सभी 186 आरोपियों के विरुद्ध FIR में दर्ज सभी अपराधों के आवश्यक अवयव की पूर्ति के कमी में उनके खिलाफ अधियोजन सिरे से खारिज होना चाहिए.
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