UGC के नए नियमों पर सवर्ण समाज में गुस्सा, जजऔर भाजपा के 11 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा, बोले- बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ मंजूर नहीं

Anger in the upper caste community over the new UGC rules; a judge and 11 BJP officials resigned, saying they would not tolerate tampering with the future of children.

UGC के नए नियमों पर सवर्ण समाज में गुस्सा, जजऔर भाजपा के 11 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा, बोले- बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ मंजूर नहीं

बरेली : बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज के माघ मेले में धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में और UGC के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दिया. यूपी सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. नए नियमों के विरोध में राजधानी लखनऊ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 11 जिला पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच फोन पर बातचीत हुई है. जिसमें शंकराचार्य ने अग्निहोत्री के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट जैसे पद तक पहुंचने के लिए सालों की कठिन मेहनत, लगन और अनुशासन की जरुरत होती है और ऐसे पद को एक झटके में छोड़ देना बहुत दुखद है.
शासन की त्वरित कार्रवाई यह बताती है कि अनुशासन सर्वोपरि है. लेकिन यह भी सवाल उठता है कि क्या निलंबन संवाद का विकल्प बन गया है. जब कोई अफसर खुलकर बोलता है और तुरंत दंडित होता है. तो बाकी अफसर क्या सीखते हैं. वे सीखते हैं कि चुप रहना सुरक्षित है. यही सीख लंबे समय में प्रशासन को कमजोर बनाती है.
इस मामले का समाधान केवल जांच रिपोर्ट नहीं है. जरुरत है. खुले संवाद की नियमों की स्पष्ट व्याख्या की और अफसरों के लिए सुरक्षित असहमति मंच की. अगर हर असहमति सजा बनेगी, तो नीति सुधार केवल कागजों में रह जाएगा.
वहीं दूसरी प्रतिक्रिया गर्व और संतोष की है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जिस तरह अग्निहोत्री ने सनातन धर्म के प्रति अपनी निष्ठा और आस्था का परिचय दिया है. उससे समूचा सनातन समाज गौरवान्वित महसूस कर रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे निष्ठावान लोग विरले होते हैं और सनातन समाज उनके इस फैसले का दिल से स्वागत करता है.
अलंकार अग्निहोत्री ने नए UGC नियमों को काला कानून करार दिया और आरोप लगाया कि ये कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल को खराब कर रहे हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि ये नए नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं. इनमें संस्थानों से विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी टीमें बनाने को कहा गया है. ताकि खासकर दलित और पिछड़े छात्रों की शिकायतों का निपटारा हो सके.
2019 बैच के PCS अधिकारी अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को भेजा।उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि जब सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती हैं जो समाज और राष्ट्र को बांटती हैं, तो उन्हें जगाने की जरुरत पड़ती है. उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्य खत्म हो रहे हैं, इसलिए वह अब इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं रह सकते.
अग्निहोत्री ने बताया कि वे जिलाधिकारी के आवास पर मिलने गए थे. जहां उन्हें कथित तौर पर 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ से फोन आया और उन्हें अपशब्द कहे गए. बाद में एसएसपी के हस्तक्षेप पर उन्हें छोड़ा गया. जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि कोई दुर्व्यवहार या अपशब्द नहीं कहा गया.
अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें दो घंटे के अंदर अपना सरकारी आवास खाली करने को कहा गया है. रात को उन्होंने आवास खाली भी कर दिया. इस बीच सोमवार दोपहर से बरेली के राज्य अतिथिगृह में ब्राह्मण नेता जमा होने लगे हैं. शाम को बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम भी उनके आवास पर पहुंचे. महापौर ने UGC नियमों में कुछ कमियां होने की बात मानी और कहा कि इन्हें दूर करने के प्रयास किए जाएंगे. हालांकि इस्तीफे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे गंभीर मुद्दा बताया. शंकराचार्य ने अलंकार से बात कर उन्हें बड़ा पद देने की बात कही है.
इधर नए नियमों के विरोध में राजधानी लखनऊ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 11 जिला पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वालों में बख्शी तालाब क्षेत्र के कुम्हारवां मंडल महामंत्री अंकित तिवारी जैसे पदाधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि ये नए UGC नियम सवर्ण समाज (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. कई पोस्ट्स में इसे BJP का कुरुक्षेत्र उसके भीतर ही है या विरोध का सुदर्शन चक्र चल चुका है.
उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा ​है कि हमारे प्ररेणा श्रोत पं. दीन दायल उपाध्याय एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी के द्वारा जिस मकसद से पार्टी का निर्माण किया गया था. उस पथ से पार्टी भटक रही है. पार्टी के श्रेष्ठ पदाधिकारियों के द्वारा यूजीसी कानून लागू करके हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है. जिसको देखते हुये में अपने पद से त्याग पत्र देता हूं और पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं रहूंगा और मेरे साथ कुछ पदाधिकारीगण अपना सामूहिक इस्तीफा दे रहे हैं. जिनके नाम नीचे दिये गये हैं.
जिसने आलोक सिंह (मंडल उपाध्यक्ष), महावीर सिंह (मंडल मंत्री), मोहित मिश्रा (शक्ति केंद्र संयोजक), नंद प्रकाश सिंह (शक्ति केंद्र संयोजक), नीरज पांडेय (शक्ति केंद्र संयोजक), अनूप सिंह (युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष), राज विक्रम सिंह (युवा मोर्चा मंडल महामंत्री), अभिषेक अवस्थी (पूर्व मंडल मंत्री), विवेक सिंह (बूथ अध्यक्ष), और कमल सिंह (पूर्व सेक्टर संयोजक) शामिल हैं.
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