अफसर घरों में आराम फरमाते रहे-आधी रात भूखे-प्यासे भटकते रहे बच्चे, तीन लाख का बजट, फिर भी बच्चों के लिए नहीं हुई घर वापसी की व्यवस्था!

While officials rested comfortably in their homes, children wandered around hungry and thirsty in the middle of the night; despite a budget of three lakh rupees, no arrangements were made for the children to return home!

अफसर घरों में आराम फरमाते रहे-आधी रात भूखे-प्यासे भटकते रहे बच्चे, तीन लाख का बजट, फिर भी बच्चों के लिए नहीं हुई घर वापसी की व्यवस्था!

सरगुजा : सरगुजा ओलंपिक लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार हो गया। बुधवार को जिला स्तरीय प्रतियोगिता के समापन के बाद सीतापुर ब्लॉक के 50 से ज्यादा बच्चे देर रात तक गांधी स्टेडियम में भूखे-प्यासे भटकते रहे. हैरत की बात ये कि अफसरों ने भी बच्चों की सुध नहीं ली. मामला तब उजागर हुआ जब बच्चों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को वीडियो काल कर आप-बीती सुनाई. विधायक के सक्रिय होते ही जिला प्रशासन में खलबली मच गई और आधी रात को अफसरों को दौड़ना पड़ा.
जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक का समापन गुरुवार शाम करीब छह बजे हुआ. समापन के बाद सभी जनपद पंचायतों को अपने-अपने खिलाड़ियों को अपने खर्च पर वापस घर भेजना था. इसके लिए हर जनपद पंचायत के सीईओ को ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता और चयनित खिलाड़ियों को जिला स्तर तक लाने-ले जाने के लिए तीन-तीन लाख रुपये का बजट आबंटित किया गया था. बच्चों ने दोपहर में भोजन किया था. कार्यक्रम खत्म होने के बाद वे सोच रहे थे कि उन्हें घर ले जाने के लिए बस आएगी. लेकिन समय बीतता गया. अधिकारी अपने घरों में आराम फरमा रहे थे और बच्चे गांधी स्टेडियम में बस का इंतजार कर रहे थे. रात करीब 10.30 बजे वहां से गुजर रहे शहरवासियों ने बड़ी तादाद में बच्चों को भटकते देखा तो मामला सामने आया.
वीडियो काल पर विधायक को बताई आपबीती
शहरवासियों के पहुंचने के बाद कुछ बच्चों ने वीडियो कॉल के जरिए विधायक रामकुमार टोप्पो से संपर्क किया. भूखे-प्यासे बच्चों ने बताया कि रात ज्यादा हो रही है और उन्हें घर जाना है. इस पर विधायक ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया. विधायक के दखल के बाद जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोमा श्रीवास्तव खुद गांधी स्टेडियम पहुंचीं. उनके साथ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला, खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे.
आधी रात को बना खाना, फिर दो बसों से भेजे गए बच्चे
पहले सभी बच्चों को नवापारा स्थित आदिवासी विकास विभाग के छात्रावास ले जाया गया. वहां रात में भोजन तैयार करवाकर बच्चों को खिलाया गया. तब तक रात के 12 बज चुके थे. इसके बाद बस की व्यवस्था की गई. इसी बीच सीतापुर जनपद पंचायत की तरफ से जो बस आनी थी. वह भी देर से पहुंची. अधिकारियों ने दो बसों से बच्चों को सीतापुर रवाना किया और निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे को उसके घर तक सुरक्षित छोड़ा जाए. आधी रात के बाद सभी बच्चे अपने-अपने घर पहुंच सके.
इस दौरान आधी रात तक गांधी स्टेडियम से लेकर छात्रावास तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. सीईओ जिला पंचायत सरगुजा, रोमा श्रीवास्तव का कहना है. बच्चों को भोजन के बाद सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है. यह परिस्थिति क्यों निर्मित हुई इसकी जांच कराई जा रही है. मामले में जिम्मेदारी तय करने के साथ ही कार्रवाई भी होगी.
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