पेंशन के लिए भटक रही आखों से लाचार युवती, शतप्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ, दिव्यांग होना अभिशाप?
A helpless young woman is wandering for pension, despite being 100% disabled, she is not getting the benefits of the schemes, is being disabled a curse?
धमतरी : दिव्यांग व्यक्ति समाज के मुख्यधारा से जुड़ा रहे. दिव्यांग व्यक्ति को जीवन निर्वाह में दिव्यांगता किसी भी तरह की मुश्किल ना बने. प्रभावित व्यक्ति का जिंदगी दूभर न हो. इसलिए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार दिव्यांगों के लिए कई योजना संचालित कर रही है. इसके बावजूद प्रदेश में दिव्यांग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने दर-दर भटक रहे है.
मिली जानकारी के मुताबिक कुरुद विकासखंड के हंचलपुर गांव की युवती ज्योति रघुवंशी दोनों आंखों से शतप्रतिशत दिव्यांग है. उनकी उम्र 24 साल है और इन 24 सालों में उन्हें सर्कार से अभी तक दिव्यांग पेंशन नहीं मिल पाया है. परिवारजनों ने बताया दिव्यांग पेंशन के लिए कई बार पंचायत में आवेदन किया. लेकिन अभी तक उनका पेंशन नहीं बन पाया है. अब ऐसे में यह परिवार असहाय महसूस कर रहा है. और सरकार के नुमाइंदों से इनका भरोसा उठ रहा है.
पिता डोमार सिंह रघुवंशी ने बताया कि कई बार पंचायत में दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन किया. लेकिन आश्वाशन के अलावा कुछ भी नहीं मिला. मेरी बेटी के लिए दिव्यांग होना अभिशाप बन गया है. क्या सरकार के पास ऐसी कोई योजना नहीं है? जिसका उन्हें लाभ मिल पाए. यह कहते हुए एक पिता की आँखें भर आई और फफक पड़ा.
पंचायत सचिववहीं पंचायत सचिव त्रिलोक ध्रुव का कहना है कि दिव्यांग ज्योति रघुवंशी का नाम 2003 के सर्वे सूची में नाम नहीं होने के कारण ज्योति का पेंशन स्वीकृत नहीं हो पा रहा है. पेंशन के लिए मिले आवेदन को जनपद में भेजा जाता है. जहां सर्वे सूची में नाम नहीं होने के कारण फार्म रिजेक्ट हो जाता है. अब बड़ा सवाल ये है कि कब तक नेत्रहीन दिव्यांग को पेंशन के लिए भटकना पड़ेगा? क्या नेतागण सिर्फ और सिर्फ दिव्यांगों को चुनाव में वोट डालने के दिन ही याद करेंगे या इस दिव्यांग को शासन के योजनाओं का लाभ दिलवाने का भी प्रयास करेंगे...?
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