बिलासपुर में टला बड़ा ट्रेन हादसा, एक ही ट्रैक पर फिर आई तीन ट्रेनें, यात्रियों में मचा हड़कंप, इधर लोको पायलट पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज
A major train accident was averted in Bilaspur, with three trains again on the same track, causing panic among passengers. A case of culpable homicide was filed against the loco pilot.
बिलासपुर में टला बड़ा ट्रेन हादसा, एक ही ट्रैक पर फिर आई तीन ट्रेनें, यात्रियों में मचा हड़कंप
बिलासपुर : बिलासपुर दो दिन पहले बड़ा हुए ट्रेन हादसे के बाद आज एक और बड़ी घटना होते होत टल गई. एक बार फिर ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के लिए आज का सफर बेहद डरावना वाला था. दरअसल कोटमीसोनार और जयरामनगर स्टेशनों एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनें आ गई.दो मालगाड़ियां के बीच में पैसेंजर ट्रेन फंस गई. जब यात्रियों ने ये मंजर देखा तो हडकंप मच गया.
कई लोग ट्रेन से उतर कर भागने लगे. हालांकि रेलवे अधिकारियों की तरफ से यह जानकारी दी गई कि यह गड़बड़ी ऑटो सिगनलिंग के कारण हुई है. गनीमत रहा कि इस दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई. जिसे रेल अधिकारियों ने कुछ देर बाद सही कर लिया. इस दौरान ट्रेन में सवार यात्रियों की सांस अटक गई. कुछ ने रेलवे के इस लापरवाही को देख अपनी नाराजगी जाहिर की.
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लोको पायलट पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 4 नवंबर को हुए भयानक रेल हादसे ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गतौरा से बिलासपुर जा रही मेमू ट्रेन लालखदान इलाके में एक मालगाड़ी से जोरदार टक्कर मार बैठी. इस हादसे में 11 लोगों की जान चली गई. जबकि 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए. अब लोको पायलट के खिलाफ पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है. पांच विभागों की शुरुआती जांच की रिपोर्ट सामने आयी है. इस रिपोर्ट में लाल सिग्नल तोड़ना और तेज रफ्तार ही हादसे की असल वजह बनी.
जांच रिपोर्ट के मुताबिक मेमू ट्रेन उस वक्त 76 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी. हादसे वाली जगह पर एक घुमावदार रास्ता था. जहां सिग्नल रेड होने के बावजूद ड्राइवर विद्या सागर ने ट्रेन नहीं रोकी. रेलवे की भाषा में इसे ‘सिग्नल पास्ड एट डेंजर’ कहते हैं. यानी खतरे के सिग्नल को नजरअंदाज करना. आशंका है कि ड्राइवर ने गलती से दूसरी लाइन का सिग्नल देख लिया और ट्रेन को तेजी से आगे बढ़ा दिया. मालगाड़ी को देखते ही ब्रेक लगाने की कोशिश की. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेन की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई. विद्या सागर को महज एक महीने पहले ही प्रमोशन मिला था और उन्हें पैसेंजर ट्रेन की जिम्मेदारी सौंपी गई. पहले वे मालगाड़ी चलाते थे. इसलिए पैसेंजर ट्रेन की स्पीड का सही अंदाजा न लगा पाए. महिला सहायक लोको पायलट रश्मि राज भी घायल हैं. और उनकी हालत अभी नाजुक बनी हुई है. उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
रिपोर्ट में एक बड़ी कमी सामने आई है कि इस रुट पर पहले दो लाइनें थीं. लेकिन अब चार हो गई हैं. नतीजा? सिग्नल की तादाद चार से बढ़कर 16 हो गई. इतने सारे सिग्नल देखकर चालकों को धोखा होता रहता है. एलएआरएसए (लोकोमोटिव एसोसिएशन) ने पहले ही रेल प्रबंधन को लिखित शिकायत की थी. उन्होंने मांग की थी कि सिग्नल की जानकारी सीधे ट्रेन के केबिन में दिखाई जाए. लेकिन इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. विशेषज्ञों का कहना है कि कम अनुभव और सिग्नल जजमेंट की गलती से ये हादसा हुआ.
तोरवा थाने में स्टेशन अधीक्षक (वाणिज्य) की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई. इसमें सिर्फ ट्रेन चालक’ का जिक्र है, नाम नहीं. चूंकि विद्या सागर की मौत हो चुकी है. इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी. थाना प्रभारी अभय सिंह बैस ने मीडिया को बताया ‘हादसे में लापरवाही साफ दिख रही है. पूरी तफ्तीश के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा.
हादसे के दूसरे दिन, 5 नवंबर को दक्षिण पूर्वी सर्किल के रेलवे सेफ्टी कमिश्नर बीके मिश्रा घटनास्थल पर पहुंचे. दोपहर 12 बजे लालखदान पहुंचकर उन्होंने 140 से 200 मीटर के इलाके में पटरी की बारीकी से जांच की. दुर्घटनाग्रस्त कोच के अंदर भी गए और हालात का जायजा लिया. निरीक्षण के बाद डीआरएम राजमल खोईवाल और अन्य अफसरों के साथ ट्रॉली से बिलासपुर लौटे. सीआरएस ने अब 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को 6 नवंबर सुबह डीआरएम ऑफिस बुलाया है। उन्हें जरुरी कागजात लेकर पूछताछ के लिए हाजिर होने को कहा गया. पूरी रिपोर्ट जल्द ही आएगी.
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