गणेश विसर्जन के दौरान पुलिस से बदसलूकी के आरोप में पार्षद गिरफ्तार, डीजे बंद करने को लेकर प्रशासन और भाजपा नेता के बीच विवाद
Councillor arrested for misbehaving with police during Ganesh immersion, dispute between administration and BJP leader over shutting down DJ
बालोद/दल्लीराजहरा : नगर में 10 सितंबर को गणेश विसर्जन के दौरान ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी से कथित गाली-गलौज, बदसलूकी के दर्ज किया. इस मामले ने राजहरा थाना पुलिस ने वार्ड क्रमांक 24 के भाजपा समर्थित पार्षद विशाल मोटवानी के खिलाफ बुधवार को एफआईआर दर्ज किया और शुक्रवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. विशाल मोटवानी के खिलाफ पहले से ही कई धाराओं में 10 मामले दर्ज हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक गणेश विसर्जन शोभायात्रा के समय पुलिस और पार्षद के बीच विवाद की स्थिति बनी थी. इसी को लेकर पुलिस ने पार्षद पर गंभीर धाराओं में जुर्म दर्ज किया है.बताया जा रहा है कि पार्षद के खिलाफ एफआईआर में दंगा और शांति भंग से जुड़ी धाराओं का उल्लेख किया गया है.
10 सितम्बर को राजहरा शहर में गणेश विसर्जन झांकी निकाली गई थी. प्रशासन द्वारा निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी डीजे बजता रहा. इस पर ड्यूटी में तैनात पुलिस ने ध्वनि विस्तारक यंत्र बंद करने की बात कही. आरोप है कि इसी दौरान पार्षद विशाल मोटवानी ने ड्यूटी पर मौजूद एएसआई से बहस की, गाली-गलौज की और कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की कर शासकीय कार्य में बाधा डाली.
पुलिस के अनुसार घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई. इसके बाद एसपी योगेश कुमार पटेल के निर्देश और एएसपी मोनिका ठाकुर के पर्यवेक्षण में थाना राजहरा में अपराध क्रमांक 286/25 धारा 132, 221, 296 बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया.
शुक्रवार 12 सितम्बर को एएसपी मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन में सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा, एसडीओपी देवांश सिंह राठौर और थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस ने एसडीएम कार्यालय राजहरा के पास से विशाल मोटवानी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया. विशाल मोटवानी के खिलाफ पहले से ही कई धाराओं में 10 मामले दर्ज हैं.
गिरफ्तारी के बाद शहर में राजनीतिक चर्चाएं भी गर्म हो गईं. सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल विसर्जन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि विशाल मोटवानी के बढ़ते राजनीतिक कद और आपसी गुटबाजी का असर भी इसमें दिखाई देता है. कुछ लोगों का मानना है कि विभाग और मोटवानी के बीच पिछले दिनों से तालमेल ठीक नहीं बैठ रहा था. वहीं, असामाजिक तत्वों को संरक्षण देने और पूर्व एएसआई हीरामन मंडावी की आत्महत्या मामले में विभाग के खिलाफ दिए गए बयानों को भी इस गिरफ्तारी से जोड़ा जा रहा है. हालांकि इन आरोपों का पुलिस विभाग ने खंडन किया है.
राजहरा व्यापारी संघ ने एफआईआर को द्वेषपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया. और खुलकर पार्षद के समर्थन में उतर आया. इस मामले को लेकर व्यापारी संघ की अटल सदन में बैठक भी रखी गई. जिसमें व्यापारी संघ के सदस्यों के अलावा नगरपालिका अध्यक्ष और गणेशउत्सव समिति के कार्यकर्ता भी मौजूद थे.
राजहरा व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोविंद वाधवानी ने कहा कि 10 सितम्बर को दल्ली राजहरा में सभी गणेश समिति द्वारा झांकी निकली गई थी, जो कि बहुत शांति पूर्वक आयोजित हो रही थी. लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा जबरदस्ती विशाल मोटवानी व अन्य पर एफआईआर दर्ज किया गया. जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जिसमें हम व्यापारी संघ द्वारा यह फैसला लियाकि 12 सितम्बर 2 बजे तक इस एफआईआर को निरस्त नहीं किया गया और विशाल मोटवानी को गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके बाद शुक्रवार दोपहर 2 बजे से दल्ली राजहरा का पार बंद रहा और शनिवार 13 सितम्बर को भी व्यापारी संघ द्वारा बन्द का आह्वान किया गया. जिसमें पूरा राजहरा शहर बन्द रहा।और व्यापारी सुबह से ही गुप्ता चौक में पंडाल लगाकर अपनी नाराजगी व्यक्त की.
इधर व्यापारियों के विरोध को देखते हुए पुलिस ने जिले से अतिरिक्त बल तैनात कर शहर में पेट्रोलिंग करवाया, वहीं थाने के बाहर बैरिकेट्स लगाकर रास्ते को पूरी बंद कर रखा था. पुलिस के बड़े अधिकारी अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के बागडोर संभाले हुए थे.
व्यापारी संघ के इस आंदोलन को डौण्डी,बालोद और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स रायपुर व राजहरा ईकाई का भी समर्थन मिला. शनिवार को चेंबर के प्रदेश पदाधिकारी सतीश थौरानी दल्लीराजहरा आये।उनके द्वारा इस मामले पर हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वह इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री तक जाएंगे. इसके अलावा नगर पालिका परिषद दल्लीराजहरा के अध्यक्ष तोरण लाल साहू एवं पार्षदों ने धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया.
वहीं भाजपा संगठन के पदाधिकारियों का दूरी बनाना लोगो के बीच चर्चा का विषय बना रहा. आम लोगों के बीच गुटबाजी इस मामले में खुलकर सामने आ गई. रोजी मजदूरी और छोटे दुकानदार जो वैसे ही व्यापार की कमी से संघर्ष कर रहे हैं. उनके अंदर बार-बार बंद से नाराजगी नजर आई. कई व्यापारी दुकाने किराए दुकान पर लेकर और बैंक से कर्ज लेकर अपना काम कर रहे हैं. उनके लिये हर दिन महत्वपूर्ण होता है. उनका कहना है कि उनके खर्च तो वैसे के वैसे हैं. एक दिन का भी बंद उनके लिये एक्स्ट्रा बोझ बनता है.
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