आंगनबाड़ी सहायिकों की फर्जी भर्ती मामले की जिला स्तरीय जांच समिति ने शुरु की जांच, CDPO और BEO 3 दिन में सौपेंगे अंकसूची और मूल्यांकन पंजी

District level investigation committee started investigation of fake recruitment case of Anganwadi assistants, CDPO and BEO will submit marksheet and evaluation register in 3 days

आंगनबाड़ी सहायिकों की फर्जी भर्ती मामले की जिला स्तरीय जांच समिति ने शुरु की जांच, CDPO और BEO 3 दिन में सौपेंगे अंकसूची और मूल्यांकन पंजी

गरियाबंद : आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में फर्जी अंकसूची दिखाकर नियुक्ति मामले में अब जिला स्तरीय जांच समिति ने जांच शुरु कर दी है. मामले में सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना अधिकारी) और बीईओ देवभोग में हुए 16 नियुक्ति में जमा किए गए. अंक सूची और मूल्यांकन पंजी को जांच समिति के सामने रखेगी.   
देवभोग में जाली दस्तावेजों के आधार पर हुई नियुक्तियों की पहले हुई जांच अधूरी रह गई थी और कार्रवाई सिर्फ छोटे स्तर के जिम्मेदारों पर हुई. असली दोषी अब भी कानूनी शिकंजे से बाहर हैं. हालांकि कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने मामले की तह तक जाने के लिए जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. पंचायत चुनाव की वजह से यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था. लेकिन अब इसे फिर से मामले में गंभीरता से लिया जा रहा है.
अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी चार सदस्यीय जांच समिति में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय, देवभोग एसडीएम तुलसी दास मरकाम, और जिला पंचायत अधिकारी अभिषेक पाठक को शामिल किया गया है. समिति की पहली बैठक 19 मार्च को हुई. जिसमें जांच के दिशा-निर्देश तय किए गए. मगंलवार यानी 20 मार्च, 2025 को सीडीपीओ और बीईओ को आदेश जारी किया गया कि वे सोमवार तक सभी भर्ती दस्तावेज जमा करें.
पूंजीपारा आंगनबाड़ी भर्ती में जाली अंक सूची का मामला सामने आने के बाद प्रधान पाठक और नियुक्त महिला अभ्यर्थी के खिलाफ देवभोग थाने में मामला दर्ज किया गया था. जनवरी में कोदोभाठा आंगनबाड़ी में भी 67% अंकों को 81% दिखाने का मामला उजागर हुआ. इसकी शिकायत करने वाली नीला यादव को ही विभाग ने आरोपी बनाकर जेल भेज दिया. कुम्हडई खुर्द भर्ती मामले में भी एक अभ्यर्थी पर पुलिस ने कार्रवाई की. इस दौरान जाली अंक सूची जारी करने वाले और इसे भर्ती प्रक्रिया में शामिल कराने वाले बड़े अधिकारी जांच से बाहर रहे. 
बता दें कि अगस्त 2024 में 16 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन निकाला गया था. भर्ती और नियुक्ति आदेश एक साथ जारी होने थे. लेकिन भारी लेन-देन के चलते चयन समिति ने नियम ताक पर रख दिए. एक साथ नियुक्ति आदेश जारी करने की बजाय अलग-अलग जारी किए गए. बड़ी गड़बड़ी उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही थी. जिला पंचायत सदस्य देश बंधु नायक ने कहा है कि पहले बड़े दोषियों को बचाए जा रहे थे. अब जिला स्तरीय जांच समिति पर पूरा भरोसा है. रुपए लेकर नियम तोड़ने वाले अब शिकंजे में आयेंगे.
अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय ने कहा कि समिति का गठन हो गया है. भर्ती से संबंधित सभी दस्तावेज मंगवाए गए हैं. जो भी दोषी पाए जाएंगे. उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.
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