फेंसिंग में उतरे करंट से किसान की मौत, शिकायत के बाद भी नहीं हटाया गया बिजली का तार, किसानों ने विद्युत कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन
Farmer dies after coming into contact with electrified fencing; power line had not been removed despite complaints; farmers staged a protest outside the electricity department office.
दुर्ग : दुर्ग जिले के अंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत चिंगरी गांव में एक दर्दनाक हादसे में खेत में काम कर रहे किसान की करंट लगने से मौत हो गई. यह घटना उस समय हुई जब किसान खेत में रखी लोहे की कंटीली फेंसिंग में फैले करंट की चपेट में आ गया. मृतक की पहचान वीरेंद्र देशमुख उम्र 55 साल के रूप में हुई है.
मिली जानकारी के मुताबिक वीरेंद्र देशमुख शनिवार को अपने खेत में घास की सफाई का काम कर रहे थे. इसी दौरान उनका हाथ खेत में लगी कंटीली तार फेंसिंग से टकरा गया. जिसमें बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था. तेज करंट लगते ही वह मौके पर गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. हादसे के बाद आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान और ग्रामीण फौरन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी.
स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है. ग्रामीणों का कहना है कि खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन लंबे समय से झूल रही थी. जिससे खेती का काम भी प्रभावित हो रहा था. कई बार इसकी शिकायत बिजली विभाग से की गई थी और लिखित आवेदन भी दिया गया था. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
ग्रामीणों के मुताबिक बिजली का खंभा झुकने की वजह से तार खेत के काफी करीब आ गया था. हालत को देखते हुए किसान वीरेंद्र देशमुख ने दो दिन पहले खुद ही झूल रहे तार को सीमेंट के पोल पर बांध दिया था. ताकि खेती के काम में बाधा न आए. लेकिन इसी प्रयास की वजह से खेत में लगी लोहे की फेंसिंग में करंट फैल गया. जो बाद में हादसे की वजह बना.
स्थानीय किसान लक्ष्मण यादव ने बताया कि अगर समय पर बिजली विभाग ने इस समस्या पर ध्यान दिया होता और झूलते तार को हटा दिया होता. तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था.
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की अनदेखी और लापरवाही की वजह से एक किसान की जान चली गई. हादसे के बाद बड़ी तादाद में ग्रामीण और किसान इकठ्ठा होकर पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के बजाय मृतक के शव के साथ बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया.
उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने और खेतों में झूल रहे सभी खतरनाक बिजली तारों को तुरंत हटाने की मांग की गई.
मृतक अपने पीछे पत्नी अनुसूइया देशमुख, पुत्र जगेश्वर देशमुख एवं गावेश देशमुख सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. पति की असामयिक मौत से पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है.
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