छत्तीसगढ़ के पीडीएस दुकान में बड़ा घोटाला, 65 लाख रुपये का राशन गायब, समिति के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष समेत 6 के खिलाफ FIR दर्ज

Major scam at Chhattisgarh PDS shop; ration worth Rs 65 lakh missing; FIR filed against six people, including committee chairman and vice-chairman

छत्तीसगढ़ के पीडीएस दुकान में बड़ा घोटाला, 65 लाख रुपये का राशन गायब, समिति के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष समेत 6 के खिलाफ FIR दर्ज

अंबिकापुर : सरगुजा में एक बार फिर गरीबों का सरकारी राशन घोटाला किए जाने का मामला सामने आया है. सोसायटी संचालकों द्वारा 65 लाख रुपए का राशन गबन कर ब्लैक में मार्केट में बेच दिया गया. आलोक दुबे ने मामले की शिकायत कलेक्टर से की थी. कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य अधिकारी ने मामले की जांच के बाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है. इस पर पुलिस ने स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित 6 लोगों के खिलाफ जुर्म दर्ज कर जांच कर रही है.
खाद्य अधिकारी शिव कुमार मिश्रा ने कोतवाली में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया कि जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति, घुटरापारा के जरिए संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान क्रमांक 71, 29 और 54 का संयुक्त रुप से जांच की गई.
जांच में सितंबर 2022 एवं 31 मार्च 2024 की स्थिति में किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान सभी दुकानों में चावल 1631.29 क्विंटल राशि 61 लाख 62 हजार 267 रुपए, शक्कर 10.43 क्विंटल राशि 49 हजार 160 रुपए असुर चना 48.34 क्विंटल राशि 2 लाख 92 हजार 692 रुपए का शॉर्टेज पाया गया. इस तरह कुल 64 लाख 94 हजार 120 रुपए की गड़बड़ी पाई गई.
खाद्य अधिकारी ने बताया कि जांच में समिति के अध्यक्ष अंबिकापुर के घुटरापारा निवासी पवन सिंह पिता दीपनारायण, उपाध्यक्ष सुनीता पैकरा पति गणेश घुटरापारा, सहायक विक्रेता फरहान सिद्दीकी पिता अब्दुल राज निवासी सदर रोड, प्रिंस जायसवाल पिता अरुण जायसवाल निवासी बौरीपारा, सैफ अली पिता अवाद अली निवासी घुटरापारा व सहायक विक्रेता मुकेश यादव पिता पुरेन्दर यादव निवासी घुटरापारा दोषी पाए गए.
रिपोर्ट पर पुलिस ने सभी 6 आरोपियों के खिलाफ धारा 420 व अवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 व 7 के तहत जुर्म दर्ज कर जांच शुरु कर दी है.
साथ ही प्रशासन इनसे गबन की राशि वसूलने की बात भी कह रहा है. यह पहला मामला नहीं है जब सरगुजा में गरीबों के राशन में डाका डाला गया हो. इससे पहले भी पीडीएस दुकानों में गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं. लेकिन प्रशासन तमाम कोशिशों के बावजूद इस पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है.
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