अब कोई भी खरीद सकता है आदिवासियों की जमीन, बिंदास हो जाएगी रजिस्ट्री, नहीं होगी कोई परेशानी, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

Now anyone can buy the land of tribals registry will be done freely there will be no problem High Court gave a big decision

अब कोई भी खरीद सकता है आदिवासियों की जमीन, बिंदास हो जाएगी रजिस्ट्री, नहीं होगी कोई परेशानी, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

भुवनेश्वर : छत्तीसगढ़, मध्सप्रदेश, ओडिश और झारखंड ऐसे राज्य हैं. जहां आदिवासियों की तादाद ज्यादा है. इन राज्यों में कई ऐसे इलाके भी हैं. जहां सिर्फ आदिवासी समुदाय के लोग ही मिलेंगे. आदिवासी समुदाय को शोषण से बचाने के लिए सरकार ने पहले ही ये नियम बना रखा था कि आदिवासियों की जमीन अन्य वर्ग के लोग नहीं खरीद सकेंगे. लेकिन अब ओडिशा हाईकोर्ट ने आदिवासियों की जमीन की खरीद के लिए अन्य वर्गों के लिए लगी पाबन्दी हटा दी है. हालांकि हाईकोर्ट ने ये फैसला सिर्फ शहरी क्षेत्रों में स्थित जमीन के लिए लिया गया है. जो खेती के लायक नहीं है.
इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अगर कोई व्यक्ति शहरी क्षेत्र में रहता है और उसकी जमीन अब खेती के लायक नहीं है ता वह अपनी जमीन किसी भी वर्ग के व्यक्ति को बेच सकता है. इसके लिए सब-रजिस्टार मना नहीं करता है. हालांकि आदिवासी शख्स को अपनी जमीन बेचने के लिए तहसीलदार की रिपोर्ट जरुरी होगी. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में ओडिशा भूमि सुधार अधिनियम 1960 की धारा 22 लागू नहीं होंगे.
कोर्ट ने कहा है कि ऐसी जमीन सिर्फ शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाने से धारा 22 लगाने से मुक्त नहीं हो पाएंगी. इसके लिए अधिकृत राजस्व प्राधिकरण को जमीन के बारे में एक जांच रिपोर्ट पेश करनी होगी कि यह जमीन किस मकसद के लिए व्यवहार उपयोगी है. संबलपुर नगरपालिका में घरबाड़ी भूमि के मुद्दे पर सभी मामले दर्ज किए गए हैं. संबंधित क्षेत्र के अधिकृत राजस्व प्राधिकरण या तहसीलदार को भूमि की उपयोगिता के मुद्दे पर अपनी राय देने के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है.
कोर्ट ने कहा कि आवेदक तहसीलदार से इसके लिए अनुरोध करेंगे. इसके बाद तहसीलदार प्रत्येक भूमि की उपयोगिता के संदर्भ में 60 दिनों के अंदर अपनी राय देंगे कि वर्तमान स्थिति में, जमीन कृषि उद्देश्य में व्यवहार उपोयगी है या नहीं. राजस्व अधिकारियों की राय के आधार पर आवेदक फिर से भूमि बिक्री विलेख के पंजीकरण के लिए पंजीकरण अधिकारी से संपर्क कर सकता है. हाईकोट के न्यायमूर्ति बीपी राउतराय की खंडपीठ ने हेमंत नायक और 60 अन्य की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है.
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