राजिम कुंभ कल्प मेला में करोड़ों का खर्च, लेकिन दुकानें खाली-व्यापार ठप, तैयारियों पर उठे सवाल, साधु-संतों ने अव्यवस्था पर जताई नाराजगी

Crores of rupees have been spent on the Rajim Kumbh Mela, but shops are empty, business is at a standstill, questions have been raised about preparations, and saints have expressed displeasure over the chaos.

राजिम कुंभ कल्प मेला में करोड़ों का खर्च, लेकिन दुकानें खाली-व्यापार ठप, तैयारियों पर उठे सवाल, साधु-संतों ने अव्यवस्था पर जताई नाराजगी

रायपुर : राजिम कल्प कुंभ 2026 की लिस्ट से साधु-संतों के नाम हटाए जाने को लेकर संत समाज में भारी आक्रोश है. इसी मुद्दे पर रायपुर के संत, महंत, पुजारी और पुरोहितों ने कड़ा विरोध जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
इस विषय को लेकर कचना रोड स्थित सुरेश्वर महादेव पीठ में आपात बैठक आयोजित की गई. बैठक में राजिम कल्प कुंभ 2026 के सचिव आचार्य डॉ. राजेश्वरा नंद ने पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए अपने सचिव पद से इस्तीफा देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि पहले जिन साधु-संतों के नाम लिस्ट में शामिल थे. उन्हें बिना किसी कारण हटाया गया है. जिसका उन्हें गहरा खेद है.
आचार्य राजेश्वरानंद ने बताया कि संत समाज की मांग पर ही सरकार द्वारा उन्हें राजिम कल्प कुंभ 2026 का सचिव नियुक्त किया गया था. जिससे संत समाज में खुशी की लहर दौड़ी थी. लेकिन तैयारियों के दौरान उनकी लगातार उपेक्षा की गई. न तो उन्हें किसी बैठक में बुलाया गया और न ही कोई खबर दी गई. वहीं संतों के नाम लिस्ट से हटाए जाने से असंतोष और बढ़ गया है.
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करोड़ों का खर्च, लेकिन दुकानें खाली-व्यापार ठप

छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’ कहलाने वाला राजिम कुंभ कल्प मेला इस वर्ष भारी-भरकम बजट और भव्य तैयारियों के साथ आयोजित किया जा रहा है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है. त्रिवेणी संगम के पुराने महोत्सव स्थल के पास बनाई गई अस्थायी दुकानें लगभग खाली पड़ी हैं. जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक मेले के अन्य हिस्सों में व्यापारी 15 दिनों के लिए हजारों रुपए किराया देकर दुकानें लेकर कारोबार कर रहे हैं. लेकिन इस प्रमुख स्थान पर दुकानों का सूना पड़े रहना योजना और प्रबंधन पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है.
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि नवीन मेला मैदान में बनाई गई अस्थायी दुकानें पहले ही आवंटित हो चुकी थीं. लेकिन वहां भी व्यापार उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पा रहा है. दुकानों की हालत देखकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या दुकानों का निर्माण वास्तविक जरुरत को ध्यान में रखकर किया गया था. या फिर योजना में कहीं न कहीं चूक रह गई.
मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही तो दिखाई दे रही है. लेकिन खरीदारी और बाजार की रौनक अपेक्षा से कम है. करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए मीना बाजार और अस्थायी दुकानों का खाली रहना आयोजकों की तैयारियों और रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है.
व्यापारियों का आरोप है कि इस बार मेले की लोकेशन, प्रचार-प्रसार और व्यवस्थाओं की कमी के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है. उनका कहना है कि अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो मेले की उपयोगिता और उद्देश्य पर ही सवाल उठने लगेंगे.
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि भविष्य में मेले की योजना बनाते समय व्यापारियों की वास्तविक जरुरत, श्रद्धालुओं की सुविधा और स्थान चयन पर गंभीरता से विचार किया जाए. ताकि आयोजन सिर्फ खर्च तक सीमित न रहकर वास्तव में जनहितकारी और सफल साबित हो सके.
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