बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद, किसानों ने किया मुआवजे की मांग, कलेक्टर ने दिलाया भरोसा

Thousands of acres of paddy crop destroyed due to unseasonal rain and hailstorm, farmers demanded compensation, collector assured

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद, किसानों ने किया मुआवजे की मांग, कलेक्टर ने दिलाया भरोसा

महासमुंद : महासमुंद जिले में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की हजारों एकड़ धान की फसल को नष्ट कर दिया है. सिरपुर, झलप और पटेवा क्षेत्र के करीब 20 गांवों में पकी धान की बालियां ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई. जिससे किसान परेशान हैं. प्रभावित किसानों ने कलेक्टर से प्राकृतिक आपदा के नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की है.
किसानों ने सरकार से जल्द सर्वे करवाने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले भी ऐसी आपदाओं में नुकसान का आंकलन बहुत देर से होता है और मुआवज़ा महीनों बाद मिलता है. किसान पहले ही कर्ज़ में डूबे हैं और अब यह नुकसान उन्हें और पीछे धकेल रहा है.
किसानों हीरालाल निषाद और माखन सेन ने बताया कि दो से तीन दिन तक चले खराब मौसम, आंधी-तूफान, बारिश और करीब 20 मिनट की ओलावृष्टि ने उनकी और सैकड़ों किसानों की रबी सीजन की फसल को तबाह कर दिया. उन्होंने बताया कि एक एकड़ धान की खेती पर 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है. लेकिन इस आपदा के कारण लागत भी वसूल नहीं हो पाएगी.
किसानों की आंखों में चिंता है और मन में इस बात का डर कि अगर जल्दी राहत नहीं मिली तो हालात और बिगड़ सकते हैं. इस आपदा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किसान आज भी सबसे ज्यादा मौसम पर निर्भर है. सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे फौरन कार्रवाई कर इन मेहनतकश किसानों को राहत प्रदान करें और नुकसान की भरपाई जल्द से जल्द की जाए.
किसानों ने एकजुट होकर कलेक्टर विनय कुमार लांगे से मुलाकात कर मुआवजे की गुहार लगाई. कलेक्टर ने बताया कि फसल नुकसान की शिकायत मिली है और तहसीलदार, आरआई व पटवारी को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं. नियमों के अनुसार उचित समाधान किया जाएगा.
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गौरेला पेंड्रा मरवाही : जीपीएम जिले में जोरदार बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में जरुर कमी आई है. लेकिन ओलावृष्टि के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है. क्योंकि किसानों को अब अपने सामने चारों तरफ नुकसान ही नुकसान नजर आ रहा है. किसानों के खेत में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. पौधे पर लगे हरे टमाटर जमीन पर गिरे हुए हैं. अगले 10 दिन में जो फसल उन्हें पककर मिलने वाली थी वो बर्बाद हो गई है. धान की खड़ी फसलों में लगी बालियां भी सफेद हो गई है.
जीपीएम में सोमवार को 2 घंटे तक तेज बारिश, आंधी तूफान और ओलावृष्टि हुई. बारिश से ज्यादा ओले गिरे. इस बारिश से लोगों को भीषण गर्मी में राहत मिली. तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 25 डिग्री पर पहुंच गया. लेकिन ये बारिश और ओले किसानों के लिए बर्बादी लेकर आए. पेंड्रा सहित आसपास के कई गांव में ओले गिरने के साथ-साथ तेज बारिश हुई. अमरपुर गांव में भारी ओलावृष्टि के चलते मुख्यमार्ग और खेतों में ओले की मोटी परत जम गई. जिससे धान सहित सब्जियों की भी फसल खराब हो गई.
शिव नारायण तिवारी किसान ने कहा कि काफी नुकसान हुआ है. पौधों में पत्तियां नहीं है. कम से कम डेढ़ घंटे ओले गिरे. पूरी फसल तबाह हो गई है. कुछ रह ही नया गया है. चार एकड़ में टमाटर लगाया था. बढ़िया फल आ रहे थे. 10 दिन में पूरी फसल हाथ में आने वाली थी. प्रशासन की तरफ से कोई नहीं आया.
राम किशोर पटेल किसान ने कहा कि ओला से पूरी फसल खत्म हो गई है. सिर्फ 10% मिलेगी फसल. धान की बालियां सफेद हो गई है. अब उसमें दाना नहीं आएगा. 2 घंटे पानी से ज्यादा ओला गिरा. पूरी फसल बर्बाद हो गई. सरकार से मुआवजा मिलना चाहिए.
फसल बर्बाद से परेशान किसान अब सरकार से आस लगाए हुए हैं. हालंकि किसानों का कहना है कि अब शासन प्रशासन को कोई भी आदमी उनकी समस्या जानने नहीं पहुंचा हैं. परेशान किसानों से सरकार से मुआवजा की मांग की है.
कृषि विभाग एसडीओ एस एस पैकरा ने कहा कि जिले में 1615.48 हेक्टेयर में धान की खड़ी फसल है. बाकी जगह गेहूं और चना लगाया गया है. बारिश से क्षति का आंकलन अभी नहीं मिला है. शासन से निर्देश मिलने के बाद किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा.
मिली जानकारी के मुताबिक पेंड्रा, सेंवरा, अमरपुर, भदौरा, सहित कई गांवों में बारिश और ओले पड़ने से आम, तेंदू, जामुन, टमाटर, लौकी, भिंडी बरबटी, गवार फली, धान, गेंहू, उड़द, मूंग, जैसी कई फसलों को नुकसान पहुंचा है.
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