हिरासत में ग्रामीण की मौत से गुस्साए समाज के हजारों लोग रैली में हुए शामिल, जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग, 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड

Thousands of people, angered by the custodial death of a villager, joined the rally, demanding an investigation and action against the culprits. Two policemen were suspended.

हिरासत में ग्रामीण की मौत से गुस्साए समाज के हजारों लोग रैली में हुए शामिल,  जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग, 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड

रायगढ़/खरसिया : रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम पारसकोल में सामने आया पुलिस हिरासत में मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. हत्या के एक मामले में शक में पकड़े गए युवक रमेश चौहान की संदिग्ध हालत में मौत के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है. मृतक के परिजनों, समाज और ग्रामीणों ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है.
इस मामले को लेकर चौहान समाज में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है. गुरुवार को समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और रैली निकालते हुए धरना-प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनकारियों ने खरसिया तहसील मुख्यालय पहुंचकर एसडीओपी कार्यालय और एसडीएम कार्यालय का घेराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
हिरासत में मारपीट का आरोप
मृतक की पत्नी किरन चौहान ने रायपुर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनके पति रमेश चौहान को 1 और 2 मार्च 2026 को खरसिया थाना पुलिस ने हिरासत में रखा था. आवेदन में कहा गया है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने पर उनके साथ गंभीर मारपीट की, जिससे उनकी हालत बेहद खराब हो गई.
किरन चौहान का आरोप है कि मारपीट के कारण उनके पति के पेट, सीने, सिर और पैरों के तलवों पर गंभीर चोटें आईं और उनका आधा शरीर लगभग सुन्न हो गया. बाद में पुलिस द्वारा ग्राम पंचायत के सरपंच को फोन कर यह जानकारी दी गई कि रमेश चौहान की तबीयत थाने में अचानक बिगड़ गई है और उन्हें खरसिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
अस्पताल से रायगढ़ और फिर रायपुर रेफर
खबर  मिलने पर परिजन और सरपंच अस्पताल पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए फौरन रायगढ़ रेफर करने की सलाह दी. परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उनसे जबरन सुपुर्दनामा पर दस्तखत करवा लिए और मरीज को अस्पताल में छोड़कर वहां से चले गए.
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से इलाज कराना मुश्किल हो गया. परिजनों ने एक पिकअप वाहन की ट्रॉली में ही घायल रमेश चौहान को बैठाकर एसडीएम कार्यालय पहुंचकर पूरी घटना से अवगत कराया. हालात को देखते हुए एसडीएम ने तत्काल मदद करते हुए परिजनों को 5 हजार रुपये दिए और एक निजी एंबुलेंस चालक को 2500 रुपये देकर मरीज को रायगढ़ के सरकारी अस्पताल भेजने की व्यवस्था कराई.
रायगढ़ अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन में डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर की नस फट गई है और मस्तिष्क में रक्त जमने की हालत बन रही है. हालत नाजुक देखते हुए उन्हें तत्काल रायपुर के डीकेएस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया.
एंबुलेंस में देरी, निजी व्यवस्था से रायपुर पहुंचाया
परिजनों के अनुसार रायपुर ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस से संपर्क किया गया. लेकिन करीब दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी. मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच ने निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और करीब 6500 रुपये खर्च कर उन्हें तत्काल रायपुर के डीकेएस अस्पताल पहुंचाया गया. रायपुर में कई दिनों तक इलाज चलता रहा. लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और आख़िरकार 5 मार्च 2026 को इलाज के दौरान रमेश चौहान की मौत हो गई.
पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप
मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर खरसिया थाना प्रभारी टीआई राजेश जांगड़े और अन्य पुलिसकर्मियों पर थर्ड डिग्री टॉर्चर कर हत्या करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि हिरासत में की गई मारपीट के कारण ही रमेश चौहान की जान गई.
वहीं पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताया है। इस मामले में एसडीओपी ने कहा है कि पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.
न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग
प्रार्थना पत्र में मृतक की पत्नी ने मांग की है कि मामले को पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत मानते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176(1A) के तहत न्यायिक जांच कराई जाए. साथ ही मृतक का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जाए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए.
इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी बाहरी और आंतरिक चोटों का विस्तृत उल्लेख करने, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा मामले में संलिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग भी की गई है.
क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल
घटना के बाद खरसिया क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. आक्रोशित परिजन और ग्रामीण तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए.
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और भी उग्र रुप ले सकता है. फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर गहमागहमी और भारी हलचल का माहौल बना हुआ है.
गुरुवार की शाम को नेशनल हाईवे 49 में घटना के विरोध में चक्काजाम कर दिया समाज के लोगों ने 1 करोड़ रुपये मुआवजा, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन के साथ दंडात्मक कार्रवाई की मांग रखी. प्रशासन और समाज के प्रतिनिधियों के बीच इस विषय पर घंटों तक विचार-विमर्श हुआ. ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे.
खरसिया विधायक उमेश पटेल भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समर्थन देते हुए उनकी मांगो की जानकारी ली. जिसके बाद देर रात विधायक की मौजूदगी में प्रशासन और पीड़ित परिवार के बीच दोषी पुलिस वालों के खिलाफ मजिस्ट्रियल जांच, मृतक की पत्नी को आसपास के शासकीय स्कूल में नौकरी, जांच पूरी नहीं होने तक दोषी पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच और मुआवजा राशि के लिए सहमति बन गई। जिसके बाद ग्रामीणों का आंदोलन खत्म हो गया.  टीआई पर जांच समेत 2 पुलिसकर्मियों को लाईन अटैच किए जाने की चर्चा है. इसके अलावा मजिस्ट्रियल जांच के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने का आश्वसन दिया गया है.

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