छुरा के टेंगनाबासा में युवक की मौत, संकल्प मिशन हॉस्पिटल पर लापरवाही का लगा आरोप, इधर अपोलो अस्पताल में गर्भ में ही बच्चे की गई जान
A young man died in Tengnabasa, Chhura. Sankalp Mission Hospital was accused of negligence. Meanwhile, a baby died in the womb at Apollo Hospital.
छुरा के टेंगनाबासा में युवक की मौत
गरियाबंद : गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत टेंगनाबासा निवासी होमेश सिन्हा 30 साल युवक की सड़क हादसे के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई. घायल युवक को परिजनों द्वारा छुरा स्थित निजी छत्तीसगढ़ संकल्प मिशन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.
मृतक होमेश सिन्हा 30 साल के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने न तो समय पर पुलिस को एमएलसी (मेडिको लीगल केस) की खबर दी और न ही युवक की नाजुक हालत को देखते हुए उसे फौरन रायपुर रेफर किया गया. परिजनों का कहना है कि युवक को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखे जाने के बाद हालत बेहद नाजुक होने के बाद ही रेफर किया गया.
परिजनों के मुताबिक दोपहर करीब एक बजे युवक को रायपुर रेफर किया गया और करीब तीन बजे रायपुर के एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आशंका जताई है कि संभवतः युवक की मौत पहले ही हो चुकी थी और बाद में औपचारिकता के तौर पर रेफर किया गया.
इस घटना को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है. परिजन अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या जांच करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है.
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अपोलो अस्पताल में गर्भ में ही बच्चे की मौत
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर का सबसे बड़ा और नामी अस्पताल अपोलो एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है. इलाज में लापरवाही और फर्जी डॉक्टरों के आरोपों से पहले ही सुर्खियों में रहा अपोलो अस्पताल अब एक और सनसनीखेज मामले को लेकर सवालों के कटघरे में खड़ा है. इस बार मामला एक गर्भवती महिला के गर्भ में ही बच्चे की मौत से जुड़ा हुआ है. जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मामला बिलासपुर के चाटीडीह स्थित अपोलो अस्पताल का है. यहां इलाज के लिए भर्ती एक गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टर रश्मि शर्मा और अपोलो अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.
पीड़ित परिजन पवन नालोटिया ने बताया कि वे विनोबा नगर के निवासी हैं. उनकी बहू पीहू अग्रवाल 37 सप्ताह की गर्भवती थीं और गर्भावस्था की शुरुआत से ही उनका इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा था. परिजनों के मुताबिक सोमवार की रात जब पीहू अग्रवाल को तेज दर्द हुआ तो उन्हें फौरन अपोलो अस्पताल लाया गया और लेबर रुम में भर्ती किया गया.
लापरवाही के कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जल्द छुट्टी देने की बात कही. इसी लापरवाही की वजह से गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई. परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने डॉक्टर रश्मि शर्मा को कहा कि बच्चे की कोई हरकत या हार्टबीट महसूस नहीं हो रही है. तब जाकर स्कैन कराया गया. स्कैन रिपोर्ट में बच्चे की मौत की पुष्टि हुई.
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चे की मौत के बाद डॉक्टरों ने प्लेसेंटा. जिसे परिजन जांच के लिए सुरक्षित रखना चाहते थे. उसे बिना बताए फेंक दिया. परिजनों का कहना है कि अगर प्लेसेंटा उन्हें दिया जाता तो वे जांच के जरिए यह पता कर सकते थे कि बच्चे की मौत किस वजह से हुई. लेकिन डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए यह कदम उठाया. परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने अपोलो अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो डेढ़ घंटे तक सिर्फ आश्वासन दिया गया.
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच टीम गठित करने की मांग की है. साथ ही डॉक्टर रश्मि शर्मा और अपोलो अस्पताल प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है. परिजनों ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला. तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार अपोलो जैसे बड़े अस्पताल पर सख्त कार्रवाई होगी. या फिर फर्जी डॉक्टर और आयुष्मान कार्ड विवादों की तरह यह मामला भी दबा दिया जाएगा. पूरे शहर की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं.
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