नकटी में बुलडोजर कार्रवाई पर बीजेपी दो फाड़, अब विधायक संदीप साहू ने CM को लिखा पत्र, पीड़ितों को इंसाफ दिलाने अब कांग्रेस ने बनाई रणनीति समिति
BJP divided over bulldozer action in Nakti; MLA Sandeep Sahu writes to the Chief Minister, while Congress forms a strategy committee to secure justice for the victims.
नकटी में बुलडोजर कार्रवाई पर बीजेपी दो फाड़
रायपुर : राजधानी रायपुर के समीप नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है. इस मामले में बीजेपी के दो धड़े नजर आ रहे हैं. पार्टी संगठन के अंदर विरोध के सुर उठ रहे हैं. लेकिन बाहर सभी ने चुप्पी साध रखी है. कांग्रेस के विधायकों के नकटी में घर न लेने से बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है. वहीं बीजेपी पूरे विवाद से दूरी बनाए हुए दिखाई दे रही है.
सूत्रों का कहना है कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह प्रशासन और राज्य सरकार का विषय है. संगठन इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा. ज्यादातर भाजपा नेता इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से बच रहे हैं.
बीजेपी के पूर्व विधायक ने इस पूरे मामले में अपनी राय रखी है. वे लगातार प्रभावित ग्रामीणों के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कहा कि जिन परिवारों को हटाया गया है. उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. नका कहना है कि अगर जमीन को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान कानून और अदालत के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए. उन्होंने यह भी दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के मुताबिक विवादित भूमि पर किसी भी तरह का स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं. और इस विषय को संबंधित मंचों पर उठाते रहेंगे. उनके इस रुख को लेकर बीजेपी के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है. हालांकि पार्टी संगठन की तरफ़ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
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अब विधायक संदीप साहू और कविता प्राण लहरे ने सीएम साय को लिखा पत्र
भाजपा के मंत्री ने कहा की लिखकर दे कांग्रेस कि हमें नकटी मकान नहीं चाहिए. मंत्री को शायद ऐसा लगा होगा कि लिखित में भला कौन देगा मगर मंत्री के ब्यान के बाद गरीब परिवारों के मकान हटाकर विधायकों के लिए आवास बनाए जाने के विरोध में अब कांग्रेस के चार विधायकों ने सार्वजनिक रूप से ऐसे आवास लेने से इंकार कर दिया है. जिससे भाजपा की चिंता बढ़ गई है. क्यूंकि पासा उलटा पड़ गया.कर्न्गेसी विधयाकों ने लिखित देना शुरू कर दिया है.
कांग्रेस विधायक जनकराम ध्रुव के बाद महिला विधायक विद्यावती सिदार, चातुरी नंद, और कविता प्राण लहरे के बाद विधायक संदीप साहू ने भी लिखित दे दिया है, कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है. इसलिए गरीबों के घर उजाड़कर विधायकों के लिए कॉलोनी बनाने का कोई औचित्य ही नहीं है.
उनका कहना है कि सरकार चाहें तो दूसरी जगह भी आवास परियोजना विकसित कर सकती है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मामले को सिर्फ राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए. पार्टी का मानना है कि गरीबों का पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना उनके घरों को हटाना न्यायसंगत नहीं होगा.
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कांग्रेस विधायक दल की बैठक:
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले पर जल्द ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है. बैठक में सभी विधायकों की राय लेकर पार्टी की तरफ से एक साझा फैसला लिया जाएगा. संभावना जताई जा रही है कि विधायक दल नकटी परियोजना के वर्तमान स्वरूप का विरोध करते हुए सरकार से वैकल्पिक जमीन पर विधायक आवास बनाने की मांग कर सकता है.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी संकेत दिए हैं कि इस विषय पर विधायक दल के भीतर विस्तार से चर्चा होगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी विधायक के अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी नहीं है. लेकिन सभी साथियों से बातचीत के बाद सामूहिक रुख तय किया जाएगा.
कांग्रेस के सभी विधायक कर सकते हैं घर वापस:
कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि अगर पार्टी इस मुद्दे पर स्पष्ट और एकजुट रुख अपनाती है तो यह सरकार पर नैतिक दबाव बना सकता है. कांग्रेस गरीबों के अधिकारों के साथ खड़ी है और उनके आशियाने की कीमत पर किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए सुविधा नहीं चाहती.
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अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 13 सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति के संयोजक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू बनाए गए हैं. इसमें पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, जिला कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ प्रभावित ग्रामीणों को भी शामिल किया गया है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित इस समिति में डॉ. शिवकुमार डहरिया, विकास उपाध्याय, राजेंद्र बंजारे, श्रीकुमार शंकर मेनन, पूर्व विधायक अनीता शर्मा, पंकज शर्मा, भावेश बघेल, आशिष वर्मा के अलावा प्रभावित ग्रामीण कमलनारायण साहू, मुकेश पाल, लता साहू और देवेश्वरी यादव को सदस्य बनाया गया है. समिति को प्रभावित परिवारों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है.
प्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति प्रभावित परिवारों से समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तैयार करेगी और प्रदेश नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है. नकटी का मुद्दा अब केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं रह गया है.
बुलडोजर कार्रवाई के बाद यह प्रदेश की सियासत का बड़ा मुद्दा बन चुका है. जहां एक ओर सरकार अपने फैसले का बचाव कर रही है. वहीं कांग्रेस इसे जनआंदोलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.
कानून की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता होती है. लेकिन रायपुर में इन दिनों एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है. जिसका जवाब शायद प्रशासन के पास भी नहीं है. सवाल यह है कि आखिर सरकारी जमीन पर कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों है? गरीब के घर पर बुलडोजर चंद घंटों में पहुंच जाता है. लेकिन जब सवाल रसूखदारों से जुड़े मामलों का आता है तो फाइलें चलती हैं. नोटिस निकलते हैं, जांच बैठती है. अधिकारी बदल जाते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता.
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