17 सूत्रीय मांगों को लेकर राजस्व अफसरों का बड़ा आंदोलन, तहसीलदारों की तीन दिवसीय कलम बंद हड़ताल शुरु, कामकाज ठप

Big agitation of revenue officers over 17 point demands, three day pen down strike of Tehsildars begins, work stopped

17 सूत्रीय मांगों को लेकर राजस्व अफसरों का बड़ा आंदोलन, तहसीलदारों की तीन दिवसीय कलम बंद हड़ताल शुरु, कामकाज ठप

रायपुर : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कामकाज की रीढ़ माने जाने वाले तहसील कार्यालयों में आज से ताले लटक गए हैं. प्रदेश भर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं. छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले हो रहे इस आंदोलन का असर पूरे राज्य में दिखने लगा है. 30 जुलाई तक राजस्व संबंधी कोई भी कामकाज नहीं होगा. जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
राजस्व अफसरों की इस हड़ताल की नींव उनकी 17 सूत्रीय मांगों पर आधारित है. संघ का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से संसाधनों की कमी, मानवीय बल, तकनीकी सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, शासकीय वाहन और प्रशासनिक सहयोग जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर शासन का ध्यान आकृष्ट कराते रहे हैं. कई बार पत्राचार और ज्ञापन सौंपे गए. लेकिन अब तक इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
संघ के प्रदेश अध्यक्ष के.के. लहरे के मुताबिक “हमने हर स्तर पर बातचीत की कोशिश की. लेकिन जब लगातार अनदेखी होती रही तो अब आंदोलन करना मजबूरी बन गया. शासन को चाहिए कि हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार करे.”

आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है..
28 जुलाई: जिला स्तर पर सामूहिक अवकाश और विरोध प्रदर्शन.
29 जुलाई: संभाग स्तर पर अवकाश और प्रदर्शन.
30 जुलाई: राजधानी रायपुर में प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन और धरना.
अगर तीन दिन के भीतर सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दी है.

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव अरविंद एक्का ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर यह निर्देश दिया है कि किसी भी राजस्व अधिकारी को इस दौरान अवकाश नहीं दिया जाए. अगर कोई अधिकारी ड्यूटी से गैरहाजिर पाया गया तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. शासन का दावा है कि राजस्व विभाग ने समय-समय पर संघ की मांगों पर कार्यवाही की है और जरुरी संसाधनों की आपूर्ति के लिए प्रयास किए गए हैं.

प्रशासन ठप, जनता परेशान
तहसीलों में जमीन संबंधी कार्य, जाति-निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण, बंटवारा, रजिस्ट्री सहित तमाम राजस्व से जुड़े कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं. कई जगहों पर लोग दफ्तर पहुंचे लेकिन ताले लटकते देख लौटना पड़ा.

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-
1. तहसील कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटर, राजस्व निरीक्षक, भृत्य, वाहन चालक, पटवारी जैसे पदों की तत्काल पदस्थापना.
2. लोक सेवा गारंटी समयसीमा से राहत जब तक सभी पदों की पूर्ति न हो.
3. तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर शीघ्र पदोन्नति और 50:50 अनुपात में सीधी भर्ती.
4. नायब तहसीलदार को राजपत्रित अधिकारी घोषित करने की पूर्व घोषणा का अमल.
5. ग्रेड पे में लंबित संशोधन को शीघ्र पूर्ण करना.
6. तहसीलों के लिए शासकीय वाहन की उपलब्धता या वाहन भत्ता.
7. बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के निलंबित अधिकारियों की 15 दिन में बहाली.
8. न्यायालयीन मामलों में FIR दर्ज न किया जाए और न्यायाधीश प्रोटेक्शन एक्ट के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

साथ ही अन्य मांगे भी
संघ ने चेताया कि, यदि समय रहते शासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जाए तो तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं. संघ ने प्रशासन से संवाद कर जल्द हल निकालने की अपील की थी.
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