सूर्यघर योजना के नाम पर बिजली कर्मियों को लगा बड़ा झटका, रियायत बंद, महासंघ का बड़ा आरोप- बिना चर्चा किए जबरन थोपे गए आदेश

Electricity workers have suffered a major setback in the name of the Suryaghar scheme, with concessions suspended. The federation alleges that orders were imposed without discussion.

सूर्यघर योजना के नाम पर बिजली कर्मियों को लगा बड़ा झटका, रियायत बंद, महासंघ का बड़ा आरोप- बिना चर्चा किए जबरन थोपे गए आदेश

रायपुर : छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनियों द्वारा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को लागू करने के दौरान लिए गए फैसले अब बड़े विवाद का रुप ले चुके हैं. सालों से विद्युत कर्मियों को मिलने वाली 50% और 25% अनुषंगी रियायत रोक दिए जाने के बाद पूरे राज्य के बिजली कर्मचारियों में तेज़ रोष भड़क उठा है. कर्मचारी संगठनों ने इस आदेश को ‘तुगलकी’, ‘अवैधानिक’ और ‘तानाशाही’ करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है.
महासंघ का बड़ा आरोप — “बिना चर्चा, जबरन आदेश थोपे गए”
भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ–महासंघ ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य अभियंता के आदेशों (05.08.2025 एवं 07.11.2025) में कर्मचारियों को 3 महीने के भीतर रुफटॉप सोलर प्लांट लगवाने के निर्देश थोपे गए.
25 नवंबर तक रजिस्ट्रेशन न कराने वालों की विशेष रियायत रोकने का आदेश जारी कर दिया गया.
सोलर प्रणाली लगाने में आने वाली भारी लागत और व्यवहारिक दिक्कतों की जानकारी देने के बावजूद प्रबंधन ने कोई चर्चा नहीं की.
महासंघ ने इसे कर्मचारी विरोधी कदम बताते हुए कहा कि आदेशों का क्रियान्वयन “पूरी तरह तुगलकी” है.
 नवंबर के बिल में 50/25% रियायत बंद — कर्मचारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान
सबसे अधिक विरोध इस बात को लेकर है कि
➡️ नवंबर 2025 के बिजली बिल में सभी नियमित/पेंशनर विद्युत कर्मचारियों की विशेष रियायत बंद कर दी गई.
➡️ टैरिफ को सामान्य उपभोक्ताओं के समान कर दिया गया.
➡️ हैरानी की बात — जिन कर्मचारियों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया. उन्हें भी छूट नहीं दी गई.
महासंघ का कहना है कि यह फैसला “मध्यप्रदेश शासन काल से मिल रहे वैधानिक लाभों पर सीधा हमला” है.
 कर्मचारियों का सवाल — सोलर पैनल का खर्च कौन देगा?
संघों का तर्क है कि सोलर प्लांट की स्थापना का पूरा खर्च कंपनी वहन करे.
रुफटॉप सोलर को ‘अनिवार्य’ बनाना कानूनी रुप से संदिग्ध है.
रियायत रोकना कर्मचारियों को दंडित करने जैसा है.
महासंघ ने अपने ज्ञापनों (10.11.2025 व 03.12.2025) में साफ चेतावनी दी थी कि यह फैसला “आर्थिक नुकसान” और “व्यवहारिक परेशानियाँ” पैदा करेगा. लेकिन प्रबंधन ने नोटिस नहीं लिया.
महासंघ की आंदोलन की चेतावनी — “प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे”
महासंघ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर अवैधानिक आदेश वापस नहीं लिये गए और 50/25 प्रतिशत अनुषंगी लाभ बहाल नहीं किए गए. तो महासंघ प्रदेशव्यापी व्यापक आंदोलन करने मजबूर होगा. और इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी.
इस चेतावनी के बाद बिजली कंपनियों में माहौल और अधिक गर्म हो गया है. अब सबकी नज़र कंपनी प्रबंधन पर है. कर्मचारियों का कहना है कि-
आदेश जल्दबाज़ी में जारी किए गए.
एकपक्षीय निर्णय से कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है.
संवाद की कमी विवाद को तरफ बढ़ा रही है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी प्रबंधन पीछे हटता है या टकराव और तेज़ होता है.
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