अस्पताल में गुंडागर्दी!, पुलिस आरक्षक और सुरक्षा कर्मी पर हमला, नर्स से बहस, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, मुख्य आरोपी दिलसाय समेत 4 गिरफ्तार
Hooliganism in the hospital!, Attack on police constable and security guard, argument with nurse, incident captured in CCTV, 4 arrested including main accused Dilsai
बलरामपुर : अस्पताल बलरामपुर में ड्यूटी कर रहे एक पुलिस आरक्षक और अस्पताल कर्मी के साथ गाली-गलौज, मारपीट और मोबाइल लूट की घटना ने अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह घटना 10 अगस्त की रात को करीब 11 बजे घटी. जब नशे की हालत में कुछ लोगों ने अस्पताल में हंगामा किया और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर हमला कर दिया. आरक्षक पर हमला और अस्पताल में मारपीट की यह घटना प्रदेश में बढ़ते अपराधियों के हौसलों की पोल खोलती है.
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस सहायता केंद्र जिला अस्पताल में तैनात आरक्षक को ड्रेसर पंकज ठाकुर ने खबर दिया कि एक व्यक्ति नशे में धुत होकर स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय के साथ गाली-गलौज कर रहा है. इस पर आरक्षक मौके पर पहुंचा और आरोपी को समझा-बुझाकर घर भेज दिया. आरोपी की पहचान दिलसाय सोनवानी उम्र 26 साल निवासी ग्राम ओबरी के रुप में हुई.
हालांकि कुछ ही देर बाद दिलसाय अपने अन्य तीन साथियों राम सोनवानी उम्र 46 साल, सुखसेन सोनवानी उम्र 19 साल और अमसिया सोनवानी के साथ फिर अस्पताल परिसर में पहुंचा और फिर से गाली-गलौज करने लगा. मौके पर मौजूद आरक्षक ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो आरोपियों ने डंडों और मुक्कों से पुलिस आरक्षक और सुरक्षा गार्ड महेश सिंह के साथ मारपीट की.झड़प के दौरान आरक्षक का मोबाइल फोन भी आरोपियों ने छीन लिया.
घटना की खबर मिलते ही कोतवाली पुलिस फौरन मौके पर पहुंची. घायलों को अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिलाया गया. मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने अपराध क्रमांक 110/2025 के अंतर्गत भारतीय न्यय संहिता (BNS) की धाराएं 309(6), 296, 351(3), 115, 221, 121(1), 132, 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया.
पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने नागरिकों से अपील किया कि वे अस्पताल जैसी सार्वजनिक सेवाओं में अनुशासन और सहयोग बनाए रखें. किसी भी तरह की अव्यवस्था या अवैध गतिविधि की खबर फौरन संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके.
तकनीकी सबूतों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने 12 अगस्त को चारों आरोपियों को उनके निवास ग्राम ओबरी से गिरफ्तार कर लिया.उन्हें अदालत में पेश किया गया. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
यह घटना न सिर्फ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. बल्कि इस बात का भी संकेत देती है कि अपराधियों में अब कानून और पुलिस का भय तेजी से खत्म होता जा रहा है. अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे घटनाक्रम आम बात बन सकते हैं.
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