खाद्य विभाग की कार्रवाई, 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट, 3 दुकानें सीज, इधर 11 मेडिकल स्टोर्स की जांच, 4 दुकानों को नोटिस की तैयारी

Action taken by the Food Department: 2,500 kg of sweets and 1,000 litres of milk destroyed, 3 shops sealed; meanwhile, 11 medical stores inspected, with preparations underway to issue notices to 4 of them.

खाद्य विभाग की कार्रवाई, 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट, 3 दुकानें सीज, इधर 11 मेडिकल स्टोर्स की जांच, 4 दुकानों को नोटिस की तैयारी

दुर्ग : छत्तीसगढ़ के भिलाई में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई और डेयरी कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट कराया है. जांच के दौरान कहीं एक्सपायरी दूध से पनीर बनाया जा रहा था. तो कहीं गंदगी के बीच मिठाइयां तैयार की जा रही थीं. विभाग ने गंभीर गड़बड़ियां मिलने पर तीन प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थ बनाने का काम बंद करा दिया.
वैशाली नगर की एक दुकान में बिस्किट के पैकेट पर भविष्य की तारीख डालकर पैकिंग करने का मामला भी सामने आया है. विभाग ने दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरु की है. खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक जांच का मकसद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों की सेहत से जुड़े सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है.
एक्सपायरी दूध से बना रहे थे पनीर
नंदनी रोड स्थित मां दुर्गा डेयरी की जांच में पनीर और दही बनाने की जगह पर गंदगी मिली. यहां पनीर बनाने में एक्सपायरी तारीख वाला पैक्ड दूध इस्तेमाल किया जा रहा था. खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पनीर, दूध और दही के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे. इसके बाद नगर निगम की मदद से करीब 1000 लीटर दूध और 80 किलो दही नष्ट कराया गया.
लड्डुओं में रंग का इस्तेमाल!
कैंप-2 स्थित गुप्ताजी लड्डू हाउस में जांच के दौरान करीब 250 किलो मैदे के लड्डू मिले. विभाग को इनमें तय मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले खाद्य रंग और मिठास बढ़ाने वाले पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका हुई. इसके बाद लड्डुओं को नष्ट करने की कार्रवाई की गई. खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रतिष्ठान में मिली अनियमितताओं के आधार पर आगे की कार्रवाई भी शुरु की.
गंदगी में बन रही थीं पेड़ा, सोनपापड़ी और बर्फी
बैकुंठधाम, कैंप-2 स्थित मुस्कान फूड प्रोडक्ट्स में भी साफ-सफाई की कमी के बीच मिठाइयां बनाते और पैक करते पाया गया। यहां लड्डू, सोनपापड़ी, पेड़ा और बर्फी जैसी मिठाइयां बिना लेबल वाले प्लास्टिक के जार में पैक की जा रही थीं. कार्रवाई के दौरान करीब 200 किलो पेड़ा, 1020 किलो सोनपापड़ी और 70 किलो मसूर पाक सहित अन्य मिठाइयों को नष्ट करने की प्रक्रिया की गई.
बिस्किट के पैकेट पर 9 दिन आगे की तारीख
वैशाली नगर स्थित जलाराम नमकीन एंड डेयरी में जांच के दौरान बिस्किट के पैकेट पर 1 नवंबर 2026 की तारीख डालकर पैकिंग की जा रही थी. जबकि जांच 23 अक्टूबर को हुई थी. यानी पैकेट पर जांच की तारीख से करीब नौ दिन आगे की तारीख दर्ज थी. विभाग ने इसे ग्राहकों को गुमराह करने से जुड़ा मामला मानते हुए दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. मामले को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है.
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रायपुर में 11 मेडिकल स्टोर्स की जांच, 4 दुकानों को नोटिस की तैयारी
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दवाओं के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB) और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया, शुक्रवार को जिले के अलग-अलग इलाकों में 11 मेडिकल दुकानों की जांच की गई, इस दौरान चार दुकानों में दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड के रखरखाव में अनियमितताएं सामने आईं. संबंधित फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
किन चार मेडिकल स्टोर्स में मिली गड़बड़ी?
जांच के दौरान जिन चार मेडिकल स्टोर्स के अभिलेखों में अनियमितताएं पाई गईं, उनके नाम इस तरह हैं.
सर मेडिकल्स, भनपुरी
श्री राम मेडिकल स्टोर्स, कोटा
लक्ष्मी मेडिकल शॉप, संतोषी नगर
मां लक्ष्मी मेडिकल स्टोर्स, कुकुरबेड़ा
विभाग की तरफ से इन दुकानों के संचालकों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा. इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और जवाब की जांच कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
NCB और औषधि विभाग ने क्यों चलाया जांच अभियान?
संयुक्त निरीक्षण का उद्देश्य ऐसी दवाओं की खरीद, बिक्री और वितरण पर निगरानी रखना है. जिनका नशीले पदार्थों के रूप में दुरुपयोग होने की आशंका रहती है. अभियान के दौरान अधिकारियों ने मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक, खरीद के बिल, बिक्री के रिकॉर्ड और भंडारण व्यवस्था की जांच की. टीम ने यह भी देखा कि दवाएं अधिकृत स्रोतों से खरीदी जा रही हैं या नहीं और दुकानदार निर्धारित नियमों के मुताबिक जरूरी दस्तावेजों का रखरखाव कर रहे हैं या नहीं.
दवाओं की अवैध बिक्री की पुष्टि नहीं
इस मामले में एक अहम तथ्य यह है कि उपलब्ध निरीक्षण जानकारी में इन चार मेडिकल स्टोर्स पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री या अवैध भंडारण की पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल सामने आई गड़बड़ियां दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड के रखरखाव में बताई गई हैं. इसलिए संबंधित दुकानों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और आगे की कार्रवाई के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच, दस्तावेजों के परीक्षण और संचालकों के जवाब के बाद ही सामने आएगा.
जांच दल में कौन-कौन से अधिकारी रहे शामिल?
निरीक्षण अभियान में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पांच अधिकारी शामिल थे. इनमें औषधि निरीक्षक डॉ. सुरेश कुमार साहू, ईश्वरी नारायण सिंह, लक्ष्मी वर्मा, हंसा साहू और ओम प्रकाश यादव शामिल रहे. इनके अलावा स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के चार अधिकारियों ने भी जांच में हिस्सा लिया. संयुक्त टीम ने अलग-अलग मेडिकल स्टोर्स में पहुंचकर दवाओं के स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों का निरीक्षण किया.
मेडिकल स्टोर संचालकों को नियमों का पालन करने की हिदायत
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मेडिकल स्टोर संचालकों से दवाओं की खरीद अधिकृत स्रोतों से करने और स्टॉक सहित खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड को नियमित रूप से अद्यतन रखने की अपील की है. साथ ही औषधि लाइसेंस की शर्तों और लागू नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है. दवाओं का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना जरूरी है. क्योंकि इससे उनकी आपूर्ति, उपलब्ध स्टॉक और बिक्री का सत्यापन किया जा सकता है. खासकर नियंत्रित औषधियों के मामले में रिकॉर्ड की सही जानकारी दुरुपयोग की आशंका पर नजर रखने में मदद करती है.
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