छत्तीसगढ़ के बजट से न ज्ञान पूरी हुई और न ही गति मिलेगी- तेजराम विद्रोही, छत्तीसगढ़वासियों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी- गोपाल साहू

Chhattisgarh's budget neither provided knowledge nor gave momentum - Tejaram Vidrohi, Chhattisgarh residents got only disappointment - Gopal Sahu

छत्तीसगढ़ के बजट से न ज्ञान पूरी हुई और न ही गति मिलेगी- तेजराम विद्रोही, छत्तीसगढ़वासियों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी- गोपाल साहू

बजट से न ज्ञान पूरी हुई और न ही गति मिलेगी- तेजराम विद्रोही

छत्तीसगढ़ सरकार में वित्तमंत्री ओ पी चौधरी ने राज्य की दूसरी वित्तीय बजट पेश किया है. जिसका मॉडल उन्होंने गति आधारित रखा है. जबकि पिछली बजट ज्ञान आधारित था. यह बजट केवल शब्दों का तानाबाना है इसमें किसानों, मजदूरों युवाओं, अंशकलिक स्कूल सफाई, विद्युत ठेका कर्मचारियों जैसे अनिनियमित कर्मचारियों क़ो नियमित करने जैसे महत्वपूर्ण विषय बजट से गायब हो गया है. किसानों व मजदूरों के लिए पिछले बजट क़ो ही पूरनरावृत्ति की गई है.  पिछला बजट गरीब, किसान, युवा और नारी आधारित था जो कभी पूरा हुआ नहीं और अब सुशासन आधारित निर्माण से विकास का मॉडल कहते हुए बजट पेश किया है. इससे न ज्ञान पूरा हुआ और न ही गति मिलेगी.

छत्तीसगढ़वासियों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी- गोपाल साहू

रायपुर : आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने आज छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ वासियों को सिर्फ छलावा और झूठे वादे देने के अलावा कुछ नहीं किया.
पेट्रोल सिर्फ 1 रुपये सस्ता किया गया. जबकि 5 रुपये तक सस्ता करना था. युवाओं के बेरोजगारी भत्ता, किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट में कुछ नहीं है. मोदी की गारंटी में किये गये वादे,1 लाख नौकरी और महिलाओं के लिए 500 रु.में सिलेंडर देने के बारे में बजट में कुछ नहीं कहा गया.
गोपाल साहू जी ने कहा कि इस बजट में प्रदेश के आदिवासी समाज के लिए बजट में कुछ नहीं है. शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य के लिए, बजट में कुछ भी नया नहीं है. मजदूरों और गरीबों की आमदनी बढ़ाने के लिए बजट में कुछ नहीं है. प्रदेश के वित्त मंत्री ने राज्य के वनोपजो पर आधारित उद्योगों, वनोपजो उत्पादों की खरीदी पर कोई बात नहीं की गयी. विश्वविद्यालयों की संख्या पर अपनी पीठ थपथपाने वाली साय सरकार ने अपने कार्यकाल में 1 भी सरकारी विश्वविद्यालय नहीं खोला.
उन्होंने कहा कि 8 साल पहले मोदी सरकार ने राजधानी रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था. लेकिन आज तक रायपुर को वास्तविक रुप में स्मार्ट सिटी नहीं बनाया गया. स्मार्ट सिटी योजना के तहत अभी सिर्फ दफ्तर खोले गए हैं. लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव नहीं दिखता। 15 सालों तक रमन सरकार मेट्रो ट्रेन का झुनझुना बजाते रहे अब साय सरकार ने फिर से रायपुर से दुर्ग मेट्रो का झुनझुना बजाया है। राजधानी में कई छोटे-छोटे बाजार हैं, जिन्हें व्यवस्थित करने की जरूरत थी । इससे ट्रैफिक जाम की समस्या भी दूर होती और व्यापारिक गतिविधियां सुगमता से संचालित हो सकतीं थी। व्यापारिक हब में पानी, सड़क, लाइट और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर की जा सकतीं थीं,पर इसकी कोई योजना छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के पास नहीं है. कई स्थानों पर यूजर चार्ज की राशि प्रॉपर्टी टैक्स के समकक्ष हो चुकी है. इसे तार्किक रूप से व्यवस्थित किया जाना चाहिए. प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण/स्थायीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यून मानदेय कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिए जाने, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन करने, आउट सोर्सिंग/ठेका/सेवा प्रदाता/समूह-समिति के जरिए नियोजन सिस्टम बंद करने के सम्बन्ध में बजट 2025 में किसी प्रकार के प्रावधान नहीं है.
राज्य सरकार के बजट में व्यापारियों के लिए और ज्यादा कर में राहत, व्यापार अनुदान देना चाहिए था. लेकिन इस बजट से सिर्फ व्यापारियों को निराशा ही हाथ लगी है. निश्चित ही इस बजट से प्रदेश की जनता को निराशा ही हाथ लगी है.
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