किसानों की समस्याओं को उठाने वाले किसान नेताओ को कांग्रेसी न समझें जन प्रतिनिधि -तेजराम विद्रोही, समितियों से टोकन काटने से कृषकों को मिलेगी राहत

Farmer leaders who raise farmers problems should not be considered Congressmen as public representatives Tejram Vidrohi farmers will get relief by cutting tokens from committees

किसानों की समस्याओं को उठाने वाले किसान नेताओ को कांग्रेसी न समझें जन प्रतिनिधि -तेजराम विद्रोही, समितियों से टोकन काटने से कृषकों को मिलेगी राहत

राजिम : प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से धान की खरीदी 14 नवम्बर से शुरुआत हो चुकी है. लेकिन सुचारु रुप से 18 नवम्बर से चालू हुई. इस दौरान किसानों को अपने मोबाइल से ऑनलाइन टोकन काटने में बहुत परेशानी हुई है. जिस कारण 18 से 22 नवम्बर तक खरीदी केंद्रों में धान की आवक बहुत ही कम रही है. 
उक्त आशय की प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि हमने धान खरीदी की शुरुआत से ही किसानों को होने वाली समस्याओं से स्थानीय जन प्रतिनिधि को अवगत कराते हुए कहा था कि कीपैड मोबाइल और सर्वर तथा नेटवर्क की समस्याओं के कारण किसान अपने मोबाइल से टोकन काट पाने में असमर्थ हो रहे हैं. किसानों की इस समस्या से हल पाने के लिए खरीदी केंद्रों में कुछ टोकन काटने की व्यवस्था होनी चाहिए. लेकिन सत्ता के नशे में चूर जन प्रतिनिधि को किसानों की समस्याओं को दूर करने के बजाए समस्याओं से अवगत कराने वाले किसान नेता कांग्रेसी नजर आने लगे. जो बहुत ही विडम्बना पूर्ण है.
इसलिए मुख्यमंत्री तक बात पहुंचने से खरीदी केंद्रों में किसानों के लिए टोकन काटने की व्यवस्था करना पड़ा. जो किसान हित में है और किसान संगठन मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करती है.
साथ ही यह भी मांग करती है कि टोकन की तादाद को बढ़ाया जाए ताकि जिन किसानों से टोकन गलती से निरस्त हो गया है .उन्हें फिर से टोकन काटने का मौका मिल सके.
समर्थन मूल्य में 117 रुपये प्रति क्विंटल  की बढ़ोतरी को जोड़कर छत्तीसगढ़ सरकार को धान की कीमत 3217 रुपये प्रति क्विंटल एकमुस्त प्रदान करें. जिस तरह पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी का घोषणा किया था और उनके कार्यकाल खत्म होने तक धान की कीमत 2840 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची थी. जिस तरह केन्द्र द्वारा धान की कीमत में वृद्धि का लाभ किसानों को पहले मिला उसी तरह इस बार भी 117 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ 3100 रुपये प्रति क्विंटल में जोड़कर 3217 रुपये प्रति क्विंटल देना चाहिए.
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