भवन अनुज्ञा घोटाला, रसीद 42 हजार की, वसूली 1.70 लाख, निगम मुख्यालय पहुंचे वार्डवासी, एफआईआर कर जांच की मांग पर भी सिस्टम क्यों मौन?

Building permit scam: Receipt issued for ₹42,000 but ₹1.70 lakh collected; ward residents reached the municipal headquarters—yet why does the system remain silent despite demands for an FIR and an investigation?

भवन अनुज्ञा घोटाला, रसीद 42 हजार की, वसूली 1.70 लाख, निगम मुख्यालय पहुंचे वार्डवासी, एफआईआर कर जांच की मांग पर भी सिस्टम क्यों मौन?

बालोद/गुरुर : बालोद जिला के नगर पंचायत गुरुर में भवन अनुज्ञा के नाम पर कथित रूप से ज्यादा रकम वसूलने और कम रकम की रसीद जारी किए जाने के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है. मामले में दो अलग-अलग शिकायतों में बड़ी रकम लिए जाने और उसके मुकाबले कम राशि की रसीद दिए जाने का आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ताओं ने थाना गुरुर में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. यह मामला कलेक्टर और एसपी तक भी पहुंच चुका है.
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक पहले मामले में 1 लाख 70 हजार रुपये लिए गए. जबकि रसीद 42,613 रुपये की जारी की गई. इसी तरह दूसरे मामले में 2 लाख 65 हजार रुपये लिए जाने का आरोप है. जबकि रसीद 53,958 रुपये की बताई गई है. शिकायतकर्ताओं ने बाकी रकम के हिसाब-किताब पर सवाल उठाते हुए नगर पंचायत की कैशबुक, रसीद बुक और भवन अनुज्ञा से संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की है.
इस मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ी हैं. पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने सीएमओ से मामले को लेकर जवाब मांगा. वहीं युवा कांग्रेस की तरफ से भी घेराव की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है. इसके बाद पुलिस ने मामले में पूछताछ शुरु की है.
अध्यक्ष और सीएमओ से पूछताछ, इंजीनियर-बाबू के बयान बाकी
थाना प्रभारी मुकेश सिंह के अनुसार नगर पंचायत अध्यक्ष प्रदीप साहू और सीएमओ श्रीनिवास पटेल को बयान के लिए बुलाकर पूछताछ की गई है. उन्होंने बताया कि नगर पंचायत के इंजीनियर और संबंधित बाबू का बयान अभी लिया जाना बाकी है. दोनों को बयान के लिए बुलाया गया है. पुलिस का कहना है कि सभी संबंधित लोगों के बयान और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
जांच के बाद कार्रवाई का सीएमओ का बयान
सीएमओ श्रीनिवास पटेल ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
इधर शिकायतकर्ताओं और नगरवासियों ने पिछले कुछ सालों में जारी भवन अनुज्ञाओं, उनसे प्राप्त शुल्क, बैंक में जमा राशि, कैशबुक, रसीद बुक और संबंधित फाइलों की विस्तृत जांच की मांग की है. उनका कहना है कि जांच सिर्फ दो शिकायतों तक सीमित न रहकर पूरे रिकॉर्ड की होनी चाहिए. ताकि वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट हो सके.
फिलहाल पुलिस की जांच में इंजीनियर और संबंधित बाबू के बयान तथा नगर पंचायत के दस्तावेजों की जांच अहम मानी जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही कथित वसूली, राशि के अंतर और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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रसीद में 7 हजार, वसूली 20 हजार की शिकायत ; निगम मुख्यालय पहुंचे वार्डवासी
बिलासपुर : नगर निगम में संपत्ति कर वसूली को लेकर कथित गड़बड़ी की शिकायत ने निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वार्ड नम्बर 4 के रहवासियों ने आरोप लगाया कि संपत्ति कर की रसीद में दर्ज रकम से ज्यादा रकम उनसे वसूली गई. एक मामले में करीब 7 हजार रुपए की रसीद काटकर 20 हजार रुपए लिए जाने की शिकायत सामने आई है. यानी रसीद में दर्ज रकम से करीब 13 हजार रुपए ज्यादा लिए जाने का आरोप है.
मामले की शिकायत लेकर वार्ड के करीब सात रहवासी सोमवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की. रहवासियों का कहना है कि संपत्ति कर जमा करने के दौरान उनसे निर्धारित रकम से ज्यादा रकम मांगी और ली गई. हालांकि इस बारे में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकेगी.
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने रसीद में दर्ज रकम से ज्यादा रकम लिए जाने का विरोध किया तो उन्हें कथित तौर पर घरों पर बुलडोजर चलाने की बात कही गई. रहवासियों का कहना है कि मामले की जानकारी स्थानीय पार्षद को भी दी गई. लेकिन उन्होंने ने इस मामले में कोई कार्रवाई नही की. इसके बाद उन्होंने निगम मुख्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई.
जांच हुई तो सामने आ सकते हैं और मामले
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल कुछ लोग ही सामने आए हैं. लेकिन अगर वार्ड नम्बर 4 में संपत्ति कर वसूली से जुड़ी रसीदों और वास्तविक जमा राशि का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है. रहवासियों ने संबंधित अवधि की वसूली, जारी रसीदों और जमा रकम का मिलान कराने की मांग की है. ताकि यह पता चल सके कि कहीं अन्य लोगों से भी रसीद में दर्ज रकम से ज्यादा रकम तो नहीं ली गई.
शिकायत सामने आने के बाद निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने मामले की जांच कराने की बात कही है. उन्होंने बताया कि जोन कमिश्नर स्तर पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है. अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और वसूली से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी. संबंधित कर्मचारियों की भूमिका सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
पहले भी रिश्वत का मामला आया था सामने
गौरतलब है कि इससे पहले नगर निगम की संपदा शाखा में रिश्वत लेते एक क्लर्क के पकड़े जाने का मामला सामने आ चुका है. ऐसे में अब संपत्ति कर वसूली में रसीद से ज्यादा रकम लिए जाने की शिकायत ने निगम की राजस्व व्यवस्था और मैदानी स्तर पर होने वाली वसूली की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि मौजूदा मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
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