SDO के खिलाफ आक्रोश, ठेकेदारों की ताजपोशी, गरियाबंद में प्रतिनिधियों ने खोला भ्रष्टाचार का कला चिट्ठा, गूंजा आंदोलन का बिगुल
Anger against SDO, coronation of contractors, representatives exposed corruption in Gariaband, trumpet of agitation sounded
गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद अंतर्गत आरईएस विभाग के एसडीओ उत्तम कुमार चौधरी पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। पहले तो पंचायतों से निर्माण कार्यों के सत्यापन के नाम पर “मोटी रकम” वसूलने के आरोप सामने आए थे, और अब नए आरोपों में विकास कार्यों के लिए स्टीमेट बनाने में भेदभाव और ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने की बात सामने आई है.
मैनपुर ब्लॉक में तैनात एस.डी.ओ. (आरईएस) उत्तम कुमार चौधरी के खिलाफ लंबे समय से शिकायत कर रहे जनप्रतिनिधियों का गुस्सा अब फटने को तैयार है. आज मैनपुर ब्लॉक के जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक रुप से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए साफ-साफ चेतावनी दी कि“तीन दिन में कार्रवाई करो, नहीं तो सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे. जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.”
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि 4 अगस्त 2025 को मैनपुर ब्लॉक के सरपंच संघ, जनपद पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को प्वाइंट-वाइज शिकायत पत्र दिया था. इस पत्र में एस.डी.ओ. चौधरी के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार, कदाचार और कार्यप्रणाली में गड़बड़ी के मामलों का ब्योरा देकर तत्काल पद से हटाने की मांग की गई थी.
लेकिन हैरानी की बात यह है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से न तो किसी कार्रवाई के संकेत मिले, न ही कोई जांच शुरु हुई. इस चुप्पी को जनप्रतिनिधियों ने सीधे-सीधे जनता और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान करार दिया है.
ज्ञापन में साफ लिखा गया है कि अधिकारी की गंभीर शिकायतों के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती है तो यह जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है. जनप्रतिनिधियों ने यह भी चेताया कि अगर तय समय सीमा में एस.डी.ओ. को हटाने का आदेश नहीं आया. तो मैनपुर से लेकर गरियाबंद तक सड़कों पर ताला-चक्का जाम होगा. जिससे प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो जायेगी.
आज ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधियों के तेवर से साफ था कि यह मामला अब आखिरी चेतावनी के दौर में है. और अगला कदम सीधा जनता के साथ सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई होगा.
मैनपुर सरपंच संघ ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि एसडीओ चौधरी के यहां से बिना लेन-देन के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती. सरपंचों का कहना है कि जो विकास कार्य पंचायत स्तर पर सीधे कराना चाहते हैं. उनकी फाइलें लटकाई जाती हैं. साइट निरीक्षण नहीं होता. स्टीमेट में देरी की जाती है. और कभी-कभी कार्यों को तकनीकी अड़चन बता कर रोक दिया जाता है.
वहीं, जिन कार्यों में ठेकेदारों की सीधी पकड़ होती है. उन्हें प्राथमिकता से पास किया जाता है। ऐसे में पारदर्शिता और समानता की उम्मीद करना बेमानी साबित हो रहा है.
सरपंच संघ के अध्यक्ष हलमंत धुर्वा ने साफ कहा है कि यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले पंचवर्षीय में भी एसडीओ चौधरी पर कमीशनखोरी के आरोप लगे थे. लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इस बार जब दुबारा आरोप लगे. तो सरपंच संघ ने बैठक कर फैसला लिया कि अगर एसडीओ को जल्द नहीं हटाया गया. तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे.
चौंकाने वाली बात यह है कि केवल सरपंच ही नहीं, बल्कि जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और यहां तक कि जिला पंचायत अध्यक्ष भी चौधरी को हटाने की मांग कर चुके हैं. जुलाई में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप ने कलेक्टर को पत्र लिखकर चौधरी को हटाने की मांग की थी। जनपद अध्यक्ष मोहन नेताम, उपाध्यक्ष राजकुमारी राजपूत, और सदस्यों लोकेश्वरी नेताम और संजय नेताम ने भी स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जताई है. इसके बावजूद, किस ‘ऊंची सेटिंग’ के चलते चौधरी पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है, यह बड़ा सवाल बन गया है.
जनता और जनप्रतिनिधियों की स्पष्ट नाराज़गी के बावजूद जिला प्रशासन की चुप्पी न केवल असहज करने वाली है, बल्कि संदेह भी पैदा करती है. जब दर्जनों पंचायत प्रतिनिधि, जनपद अध्यक्ष और जिला स्तर के नेता किसी अधिकारी के खिलाफ लगातार शिकायत कर रहे हैं, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है? या फिर ‘ऊंची पहुंच’ वाले अधिकारियों के लिए अलग नियम हैं?
मैनपुर के हालात साफ़ संकेत दे रहे हैं कि जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को दबाने का प्रयास हो रहा है. अगर जल्द ही निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख पर भी सवाल बन जाएगा.
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