छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में फर्नीचर टेंडर में धांधली का लगा आरोप, DPI जानबूझकर राज्य के खजाने को पहुंचा रहा वित्तीय नुकसान!
Chhattisgarh education department accused of rigging furniture tender, DPI is intentionally causing financial loss to the state exchequer!
रायपुर : छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में स्कूल फर्नीचर की खरीद को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री कार्यालय को संबोधित एक औपचारिक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल डेस्क और बेंच की खरीद के लिए जेम बोली संख्या 2025/B/6411786 में गंभीर अनियमितताएं और पक्षपात किया गया है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) जानबूझकर राज्य के खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचा रहा है.
शिकायतकर्ता जिनकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. ने ऐसे दस्तावेज़ पेश किए हैं जो बोलियों के संदिग्ध तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन का खुलासा करते हैं. मुख्य आरोप यह है कि कई योग्य बोलीदाताओं को अनुचित रुप से अयोग्य घोषित कर दिया गया. जबकि पांच फर्मों के एक छोटे समूह को संदिग्ध रुप से जल्दी मंजूरी दे दी गईं.
दस्तावेजों के मुताबिक निम्नलिखित फर्मों को तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया:
संजय साइंटिफिक वर्क्स
गणपति एंटरप्राइजेज
गोयल फर्नीचर
खंडेलवाल सेल्स कॉर्पोरेशन
अल्ट्रा मॉड्यूलर इंडस्ट्रीज
अयोग्य घोषित बोलीदाताओं की एक लिस्ट भी पेश की गई है. जिसमें शिकायतकर्ता की फर्म भी शामिल है. शिकायत में तकनीकी मूल्यांकन की गति पर चिंता व्यक्त की गई है. क्योंकि बताया गया है कि पांच फर्मों के लिए मूल्यांकन सिर्फ 12 मिनट में पूरा कर लिया गया था.
प्रदान किए गए सबूतों में सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय बोली सारांश है. यह दर्शाता है कि तकनीकी रुप से योग्य सभी पांच फर्मों ने ₹44,83,470.00 की समान बोली राशि जमा की थी. कई प्रतिस्पर्धी फर्मों के बीच यह एक समान मूल्य निर्धारण, बोली-धांधली और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को विफल करने के सुनियोजित प्रयास का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तकनीकी मूल्यांकन एक दिखावा था. जिसे विभाग के तकनीकी प्रमुख द्वारा वैध प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए सुनियोजित किया गया था. अन्य बोलीदाताओं को अयोग्य घोषित कर विभाग ने कथित तौर पर यह सुनिश्चित किया कि पहले से चुनी गई फर्में पूर्व निर्धारित मूल्य पर अनुबंध जीतें, जो कि प्रतिस्पर्धी बाजार दर से ज्यादा माना जा रहा है.
शिकायत पत्र, जिसे भारत के प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री, शिक्षा सचिव और जेम पोर्टल के प्रमुख सहित उच्च-स्तरीय अधिकारियों को भी भेजा गया है. और तत्काल जांच और बोली को रद्द करने का आह्वान किया है. शिकायतकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि उनकी फर्म का पुनर्मूल्यांकन कर उसे योग्य घोषित किया जाए. यह तर्क देते हुए कि इससे वास्तविक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकार के लिए ज्यादा अनुकूल मूल्य प्राप्त होगा.
फिलहाल लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा इन गंभीर आरोपों पर शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी से इस पूरे मामले के बारे में कई बार फोन लगाकर जानकारी मांगने पर उनके द्वारा कोई प्रतिक्रिया नही दी गई.
इस मामले ने सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं, विशेष रुप से गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता और अखंडता के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं. जिसे दक्षता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था.
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