नसबंदी के बदले मरीज से मांगे रुपये, न देने पर डॉक्टर डॉ. वंदना चौधरी ने दिया नरक का श्राप!, ऑडियो वायरल होने के बाद नोटिस जारी
The corrupt doctor Dr. Vandana Chaudhary demanded money from the patient in exchange for sterilization, when he refused to pay, she cursed him to hell, notice issued after the audio went viral
बिलासपुर : सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और सेवा का दावा तो सरकार बहुत करती है. लेकिन जब डॉक्टर ही मरीजों से अवैध वसूली करने लगे. तो व्यवस्था पर सवाल उठना भी लाजमी है. जिला अस्पताल की चर्चित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना चौधरी एक बार फिर विवादों में हैं. नसबंदी के बदले महिला से 6,000 रुपये मांगने और रकम न देने पर ‘नरक’ भेजने का श्राप देने के आरोप में वह प्रशासन के राडार पर आ गई हैं.
सरकारी अस्पतालों में बख्शीश मांगने की परंपरा सालों पुरानी है. जब भी अस्पताल में कोई बच्चा जन्म लेता है घर के बड़े बुजुर्ग नर्सों और डॉक्टरों को बख्शीस देते रहे हैं. लेकिन बख्शीश देने की ये परंपरा कब अधिकार में बदल गया किसी को खबर नहीं लगी. आज हालत ये है कि सरकारी अस्पताल के नर्सों, वार्ड ब्वॉय और डॉक्टरों की अच्छी खासी सैलरी होने के बाद भी बख्शीस की उम्मीद पाले रहते हैं. अब तो हालत हो गई है कि बक्शीश नहीं देने पर लड़ाई-झगड़ा और श्राप देने पर उतारु हो जा रहे हैं.
वायरल ऑडियो से हुआ बड़ा खुलासा
तखतपुर क्षेत्र के ग्राम सेमरचुआ निवासी श्रीमती जमंत्री पटेल पति संतोष पटेल ने 19 मार्च को नसबंदी के लिए जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराया था. आरोप है कि डॉ. वंदना चौधरी ने ऑपरेशन के एवज में 6,000 रुपये की मांग की. जिसमें से 2,000 रुपये उसी वक्त ले लिए गए. जबकि बाकी 4,000 रुपये के लिए महिला को मानसिक रुप से प्रताड़ित किया जाने लगा. जब महिला ने पैसे देने में मज़बूरी जताई, तो डॉक्टर साहिबा ने उसे नरक जाने तक का श्राप दे डाला.
ऑडियो वायरल होते ही प्रशासन में मचा हड़कंप
जयंत्री और उसके परिजनों ने डॉक्टर की इस हरकत का ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया. और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. जैसे ही मामला तूल पकड़ा. स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. हालत इतनी गंभीर हो गई कि विभाग को रविवार को ही नोटिस जारी करना पड़ा. जो कि सरकारी ढर्रे में आमतौर पर नहीं देखा जाता है.
दिल्ली दूर नहीं, रायपुर जरुर दूर हो गया
इस पूरे मामले में राजधानी से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. जिससे लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं. आखिर क्यों राज्य सरकार अब तक इस गंभीर मामले पर चुप्पी साधे बैठी है? रायपुर से बिलासपुर की दूरी महज 120-125 किलोमीटर ही है. लेकिन इंसाफ की गति इतनी धीमी क्यों है?
सिविल सर्जन ने थमाया नोटिस
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता ने डॉ. वंदना चौधरी को शो-कॉज नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने को कहा है. नोटिस में साफ उल्लेख किया गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनहीनता की शिकायत मिली है. जो सेवा शर्तों के खिलाफ है.
आखिर कब तक चलेगा ‘धंधा’ सरकार के नाम पर?
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का दावा सिर्फ कागजों में दिखता है. नसबंदी के बदले पैसे वसूलना और मरीजों को अपमानित करना एक बेहद गंभीर अपराध है. अब देखना यह होगा कि क्या इस बार सरकार दोषियों पर कोई कड़ी कार्रवाई करेगी या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दब जाएगा?
डॉक्टर वंदना चौधरी से स्पष्टीकरण मांगते हुए परिवार नियोजन (टी टी) और एमटीपी(गर्भपात संबंधी ऑपरेशन) पर रोक लगा दी गई गई है. कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक ने ये कार्रवाई की है. एमटीपी और टीटी ऑपरेशन अब डॉक्टर रमा घोष और डॉक्टर ममता सलूजा ही पूर्णतः करेंगे.
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मुफ्त सेवाओं के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आम जनता को निशुल्क मिलनी वाली चिकित्सा सेवाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं. जिससे गरीब और असहाय मरीजों का शोषण हो रहा है. और ऐसे डाक्टर के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की उम्मीद की जा रही है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में जनता का विश्वास बना रहे.
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