बीच सत्र में आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी बंद करने से मचा हड़कंप, अभिभावकों में आक्रोश, शैलेष पांडेय- सरकार बच्चों की शिक्षा से कर रही खिलवाड़
The mid-session closure of Atmanand School's nursery caused uproar, angering parents. Shailesh Pandey stated, "The government is playing with children's education."
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है. राज्य की पूर्व कांग्रेस सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और जनप्रिय योजना “स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल” अब खुद अस्तित्व के संकट से जूझती दिख रही है. बिलासपुर शहर के चार प्रमुख आत्मानंद स्कूलों—लाल बहादुर शास्त्री, तारबाहर, तिलक नगर और लाला लाजपत राय—में नर्सरी और केजी कक्षाएं बीच सत्र में ही बंद कर दिए जाने के फैसले ने हजारों अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है. जहां एक तरफ मासूम बच्चों का भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है. वहीं दूसरी तरफ इस फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी उबाल ला दिया है.
इस फैसले पर पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार कभी भी इस योजना को सफल होते नहीं देखना चाहती थी. पांडेय ने कहा कि बिलासपुर में नर्सरी में करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं और सिर्फ 8 शिक्षक उन्हें पढ़ा रहे हैं. क्या सरकार इन 8 शिक्षकों का वेतन भी नहीं दे सकती? यह आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक फैसला है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के नियमों में बदलाव हुआ है तो प्रशासन अन्य मदों से भुगतान की व्यवस्था कर सकता था. लेकिन जानबूझकर कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं अपनाया गया. इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित वे परिवार हैं. जो आर्थिक रुप से कमजोर हैं और जिनके लिए आत्मानंद स्कूल ही निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का एकमात्र विकल्प था.
कलेक्टर को सौंपे गए एक पत्र में अभिभावकों ने लिखा कि हमने बच्चों को इस भरोसे पर दाखिला दिलाया था कि LKG से 12वीं तक सुरक्षित और लगातार शिक्षा मिलेगी. लेकिन सत्र के बीच स्कूल बंद होने से बच्चों में डर बैठ गया है. हम प्राइवेट स्कूलों की महंगी फीस नहीं भर सकते. अभिभावकों का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को शिक्षा से बाहर धकेलने जैसा है.
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सरकार के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) भी सड़क पर उतर आया है. संगठन ने कलेक्टर और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं.
बिलासपुर के चारों SAGES स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं तत्काल बहाल की जाएं
शिक्षकों और स्टाफ के रिक्त पद भरे जाएं
10,463 सरकारी स्कूलों के “युक्तियुक्तकरण” के नाम पर बंद करने की प्रक्रिया रोकी जाए.
AIDSO ने चेतावनी दी है कि अगर फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा.
स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना को कांग्रेस सरकार ने गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरु किया था. लेकिन वर्तमान हालात में यह योजना अब खुद सवालों के घेरे में है.
पूर्व विधायक शैलेष पांडेय का कहना है कि जब बच्चों की नींव यानी प्रारंभिक शिक्षा ही कमजोर कर दी जाएगी. तो आगे चलकर वे कैसे आगे बढ़ेंगे? यह सिर्फ चार स्कूलों का मामला नहीं, यह छत्तीसगढ़ के शिक्षा मॉडल की दिशा तय करेगा.
अब सरकार की परीक्षा
बिलासपुर में उठी यह चिंगारी अब पूरे प्रदेश में फैल सकती है. सवाल साफ है
क्या सरकार सच में शिक्षा सुधार चाहती है. या फिर लोकप्रिय योजनाओं को धीरे-धीरे खत्म करने की रणनीति पर चल रही है? फिलहाल, जवाब का इंतज़ार हजारों मासूम बच्चों और उनके अभिभावक कर रहे हैं.
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