छुट्टी मनाने नहाने गए चार मासूमों में दो की तालाब में डूबकर मौत, घंटों चले रेस्क्यू के बाद मिले शव, इलाके में पसरा मातम, ग्रामीणों में नाराजगी
Two of the four children who went swimming for a holiday drowned in a pond. Their bodies were recovered after an hours-long rescue operation, leaving the area in mourning and villagers angry.
बिलासपुर : रविवार की शांत सुबह लाल खदान क्षेत्र उस समय मातम में बदल गई. जब नहाने गए चार मासूम बच्चों में से दो की तालाब में डूबकर दर्दनाक मौत हो गई. यह हादसा ग्राम पंचायत महमंद के बेलभाठा मैदान के पास स्थित तालाब में हुआ. नयापारा शिव विहार कॉलोनी के बच्चे छुट्टी का दिन बिताने के लिए नहाने पहुंचे थे. लेकिन कुछ ही पलों में उनके परिवारों की खुशियाँ मातम में बदल गईं.
मिली जानकारी के मुताबिक चार बच्चे शिव विहार इलाके के रहने वाले प्रियांशु सिँह, ऍम उदयन, पी साईं राव, टी पवन, छुट्टी के दौरान नहाने के लिए बेलभाठा तालाब पहुंचे थे और नहाने के दौरान डूब गए. दो लड़को प्रियांशु और उदयन ने किसी तरह जान बचा ली. लेकिन बाकि और दो किशोर बाहर नहीं निकल सके.
सूत्रों की माने तो तालाब के एक हिस्से में पिछले पंचायत कार्यकाल में रसूखदारों द्वारा बिना अनुमति के गहरी खुदाई करवाई गई थी. इस अनियमित और अवैध तरीके से हुई खुदाई के कारण तालाब खतरनाक रुप से गहरा हो गया था. इसी गहराई की वजह से बच्चे अचानक गड्ढे में फंस गए और दो बच्चों की जान चली गई.
चश्मदीदों के मुताबिक चारों बच्चे तालाब की पचरी के पास उथले पानी में खेल रहे थे. लेकिन आगे बढ़ते ही गहराई अचानक बढ़ गई. इसी दौरान एक बच्चे का पैर फिसल गया और वह गहरे हिस्से में जा गिरा. उसे बचाने की कोशिश में बाकी बच्चे भी आगे बढ़ गए. सभी चारों बच्चे पानी में संघर्ष करने लगे. इस संघर्ष में दो बच्चे प्रियांशु और उदयन किसी तरह तैरकर बाहर आने में कामयाब हो गए. जबकि 14 साल का पवन और 13 साल का साईं राव गहराई में फंस गए और कुछ ही पल में पानी में समा गए.
हादसे की खबर फैलते ही लोग मौके पर जुट गए. स्थानीय लोगों ने बच्चों की तलाश शुरु की. लेकिन तालाब की ज्यादा गहराई और फिसलन ने रेस्क्यू को मुश्किल बना दिया. खबर मिलते ही तोरवा पुलिस भी मौके पर पहुंची और इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया. गोताखोरों ने करीब चार घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाकर दोनों बच्चों के शवों को बाहर निकाला.
जब बच्चों के शव तालाब किनारे लाए गए. तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया. शिव विहार कॉलोनी और महमंद क्षेत्र में मातम छा गया. हर आंख नम थी और हर दिल इस हादसे से दहला हुआ.
स्थानीय निवासियों ने बताया कि तालाब का एक हिस्सा बेहद गहरा है. और तल असमान है. लेकिन यहां किसी तरह की चेतावनी पट्टिका या सुरक्षा संकेत नहीं लगाए गए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन की तरफ से चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या गहराई दर्शाने वाले संकेत लगाए गए होते. तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था. लोगों ने इस हादसे को प्रशासन की लापरवाही करार देते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है.
तोरवा पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और मामले की जांच शुरु कर दी है. पुलिस आसपास के लोगों से बयान लेकर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तालाब के कौन से हिस्से में गहराई ज्यादा है और क्या यहां पहले भी कोई हादसा हुआ है. शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि तालाब का तल अचानक नीचे धँसा हुआ है. जिससे यह हिस्सा बेहद खतरनाक हो जाता है.
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर खुले जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ग्रामीण और परिजन प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरुरी कदम उठाए जाएं. ताकि किसी और परिवार को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े.
मौजूदा सरपंच प्रतिनिधि विक्की निर्मलकर ने पूर्व जनप्रतिनिधियों अनिल कैवट और नागेंद्र राय पर तालाब की अवैध खुदाई कराने का गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पिछले जनप्रतिनिधियों ने खुद ही इस अवैध खनन से होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी. लेकिन अब जब हादसा हो गया और दो बच्चे तालाब में डूब गए तो हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं.
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