शराब घोटाले में शामिल होने का आरोप, 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेजे गए चैतन्य बघेल, कोर्ट से नहीं मिली राहत, ED ने नहीं मांगी रिमांड

Accused of being involved in liquor scam, Chaitanya Baghel sent to jail on 14-day judicial remand, did not get relief from the court, ED did not seek remand

शराब घोटाले में शामिल होने का आरोप, 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेजे गए चैतन्य बघेल, कोर्ट से नहीं मिली राहत, ED ने नहीं मांगी रिमांड

रायपुर : शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की रिमांड खत्म होने के बाद कोर्ट ने उन्हें 4 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है. चैतन्य बघेल अब 4 अगस्त जेल में रहेंगे।
बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि, कोर्ट में चैतन्य बघेल को पेश करने के बाद ईडी ने उनकी रिमांड नहीं मांगी. ED ने विशेष कोर्ट में जुडिशियल रिमांड पर जेल भेजने का आवेदन दिया. जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया.
आपको बता दें कि, ED की रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें रायपुर की विशेष कोर्ट में पेश किया गया था. ईडी ने 18 जुलाई की सुबह भिलाई स्थित बघेल निवास पर छापा मारकर चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तार किया था. उन पर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. मामले में पूछताछ के लिए कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा था. जो 22 जुलाई को खत्म हो रही है.
इसके पहले कोर्ट ने उनके वकील ने जेल में चैतन्य बघेल को सुरक्षा देने और जेलर के कमरे में परिवार से हफ्ते में एक बार और वकील से डेली मुलाकात का आवेदन लगाया है. जेल में कांग्रेसी नेता आशीष शिंदे पर हुए हमले का हवाला देकर आवेदन लगाया गया है. इसके अलावा 18 जुलाई 2025 से 45 दिन की ईडी ऑफिस के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आवेदन लगाया गया है. PMLA कोर्ट में चैतन्य बघेल के वकील ने यह आवेदन लगाया है. इस दौरान पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह बरार के साथ कोर्ट पहुंचे थे.
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे उनके साथ सहयोग करेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनके बेटे के खिलाफ ईडी की कार्रवाई राज्य में “अवैध वृक्ष कटाई” से ध्यान हटाने के लिए शुरु की गई थी, क्योंकि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने वाली थी.
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