IPS बनकर गांव लौटा बिहार का लड़का, गांववालों ने फूलों से लाद दिया, गुरु से लिया आशीर्वाद...
बिहार : कहा जाता है किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे उसके गुरु का मागदर्शन होता है. वह गुरु शिक्षक हो या मां-बाप, गुरु के सानिध्य में रहकर किसी भी मंजिल को प्राप्त किया जा सकता है. ठीक ऐसा ही हुआ अनिकेत कुमार द्विवेदी के साथ.
बिहार : कहा जाता है किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे उसके गुरु का मागदर्शन होता है. वह गुरु शिक्षक हो या मां-बाप, गुरु के सानिध्य में रहकर किसी भी मंजिल को प्राप्त किया जा सकता है. ठीक ऐसा ही हुआ अनिकेत कुमार द्विवेदी के साथ. वह दिल्ली से आईएएस बनकर जब लौटा तो परिजनों के साथ ही गांव के लोग झूम उठे और उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया.
बिहार के अनिकेत द्विवेदी UPSC CSE में 226वीं रैंक हासिल कर आईपीएस कैटगरी में चयनित हुए हैं. अनिकेत की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है. अनिकेत मूल रूप से जिले के सदर प्रखंड के हजियापुर वार्ड नंबर 9 निवासी हैं. इस गांव में पहली बार कोई आईएएस बना है तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है और लोग अब तक जश्न में डूबे हुए हैं.

अनिकेत के पिता शंभू द्विवेदी और माता नीता देवी शिक्षिका हैं. अनिकेत चार भाईयों में सबसे बड़े हैं. एक भाई अखिलेश बीपीएससी की तैयारी कर रहे हैं जबकि एक और भाई एडिशन जयपुर में बीटेक के फाइनल इयर के छात्र हैं. अनिकेत की सफलता से घर खुशियों का माहौल है. दिल्ली से जब वह गांव लौटे तो लोगों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया.
अनिकेत अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरु को देते हैं. वह कहते हैं कि गुरुजी का सही मार्गदर्शन मिला और आज उन्हें देश के सर्वोच्च परीक्षा यूपीएससी में सफलता मिली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में देशभर में अनिकेत को 226वां रैंक मिला. वे हजियापुर गांव के इकलौते और पहले आइपीएस बने हैं.

गोपालगंज के हजियापुर गांव पहुंचे अनिकेत कुमार द्विवेदी शनिवार को अपने बचपन के गुरु गिरीश चंद्र सिंह के घर पहुंचे और पैर छू कर आशीर्वाद लिया और खुशी को इजहार करते हुए मिठाई खिलाई. अनिकेत ने यहां छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी सफलता को पाने के लिए गुरु का मार्गदर्शन जरूरी है.

अनिकेत ने कहा, गुरु का सही मार्गदर्शन मिल गया तो शिष्य बड़ी से बड़ी कामयाबी को आसानी से हासिल कर सकता है. उन्होंने बताया कि शुरुआती शिक्षा केंद्रीय विद्यालय में हुई. 10वीं तक की पढ़ाई के दौरान अंग्रेजी वीक थी, इसलिए पिताजी ने केंद्रीय विद्यालय के पास स्थित गिरीश चंद्र सिंह के यहां एवरेस्ट कोचिंग में दाखिला करा दिया.

अनिकेत की यहां लैंग्वेज और ग्रामर मजबूत हुई. इस तरह से 12वीं की पढ़ाई दिल्ली और फिर स्नातक कंप्लीट कर यूपीएससी की तैयारी में लग गए. यूपीएससी में पिछली बार मेंस क्वालिफाइ होने के बाद इंटरव्यू के लिए जब कॉल नहीं आया तो मन कुछ पल के लिए हताश हो गया, लेकिन मां-बाप और गुरु ने हौसला बढ़ाया और पांचवीं बार में 226वां रैंक लाकर आइपीएस बना.

अनिकेत कुमार द्विवेदी ने कहा कि शिक्षा और सफलता पाने के लिए कोई सीमा नहीं होती. अगली बार फिर यूपीएससी में बैठूंगा और आइएएस क्वालिफाई करूंगा. आइपीएस अनिकेत से छात्रों ने भी बचपन से अबतक पढ़ाई के दौरान आनेवाले परेशानियों के बारे में पूछा, जिसका जवाब भी उन्होंने आसान शब्दों में दिया. मौके पर विशाल कुमार, सोनल कुमार आदि छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.

बता दें कि अनिकेत की प्रारंभिक शिक्षा शहर के केंद्रीय विद्यालय से हुई थी. दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद अनिकेत दिल्ली चले गए. हॉस्टल में रहकर उसने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की. ग्रेजुएशन की पढ़ाई राजस्थान के अजमेर से की. ग्रेजुएशन के बाद से यूपीएससी की तैयारी करने लगे थे. चार बार असफलता के बाद पांचवीं प्रयास में 226 रैंक हासिल की.

हालांकि, अनिकेत को थोड़ा दुख है कि वे आईएएस नहीं बन पाए. उन्होंने बताया कि अगर 120 रैंक आती तो मैं आईएएस बनते. वह आगे आईएएस के लिए प्रयास करते रहेंगे. मां नीता देवी काफी खुश हैं क्योंकि उनकी जन्मदिन पर बेटे ने इतना बड़ा तोहफा देने का काम किया है. उन्होंने कहा मेरा सपना था कि बेटा अफसर बने और बेटे ने मेरा सपना पूरा कर दिया.



