समाधान शिविर में मचा बवाल, शराब दुकान हटाने की मांग पर वार्डवासियों ने दी धरने की चेतावनी, निलंबित बीईओ ने दी आत्मदाह दे डाली धमकी
Explosion of misgovernance in Sushasan Tihaar, suspended BEO Pradeep Sharma threatened to commit suicide, accused of economic exploitation from the stage
गरियाबंद/देवभोग : देवभोग नगर पंचायत में आयोजित समाधान शिविर उस समय हंगामे में बदल गया जब सालों से लंबित शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर नाराज वार्डवासियों ने मंच पर चढ़कर विरोध जताया. सोनामूंदी वार्ड के नागरिकों ने पांच दिन के भीतर मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है. वहीं दूसरी तरफ निलंबित बीईओ ने मंच से आत्महत्या की भी चेतावनी दे डाली. 3 साल से बहाली न होने और आर्थिक शोषण का आरोप लगाया. लोगों की इस उदासीनता ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
भरे मंच से गरज पड़ा निलंबित BEO, कहा- “31 मई तक फैसला नहीं आया तो ले लूंगा जान”
मिली जानकारी के मुताबिक सुशासन तिहार में निलंबित बीईओ प्रदीप शर्मा ने भी आवेदन दिया था. मांग थी कि पिछले कई महीने से हाईकोर्ट ने बहाली का आदेश प्रशासन को दिया है. लेकिन प्रशासन इस आदेश का पालन नहीं कर रहा है. वेतन में नियमानुसार कटौती के बजाय अधिक अनुपात में कटौती की जा रही है. प्रशासन पर तरह-तरह के मानसिक दबाव और ब्लैकमेलिंग करने का आरोप लगाया गया था.
आज समाधान शिविर में ठोस जवाब नहीं मिलने पर प्रदीप शर्मा ने पहले तो माइक पकड़कर अपनी भड़ास निकाली. एसडीएम तुलसीदास ने माइक छीन लिया. जिसके बाद भरी सभा में प्रदीप शर्मा ने कहा कि अगर 31 मई के भीतर मांगें नहीं मानी गई तो वे आत्महत्या कर लेंगे. जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
6 सितंबर 2022 को निलंबित हुए प्रदीप शर्मा का दावा है कि उन्हें झूठे आरोपों के आधार पर बर्खास्त किया गया. पहले सुखचंद बेसरा की शिकायत पर जांच हुई. जिसमें उन्हें क्लीन चिट मिली. फिर दोबारा जांच कर उन्हें “थोड़ा बहुत दोषी” करार दिया गया और तब से अब तक बहाली नहीं हुई.
शर्मा ने बताया कि वे तीन बार माननीय न्यायालय से बहाली का आदेश ला चुके हैं. लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है. नियमों के मुताबिक तीन महीने बाद 75% वेतन मिलना चाहिए. लेकिन उन्हें महज 50% भुगतान किया गया.
प्रदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें आर्थिक रुप से परेशान किया जा रहा है और जानबूझकर मानसिक तनाव में रखा गया है. मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब देश में सुशासन का उत्सव मनाया जा रहा है. तब एक शिक्षक अपने इंसाफ के लिए खुदकुशी की कगार पर है.
अब देखना यह है कि क्या गरियाबंद प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गम्भीर चेतावनी को हल्के में लेगा या प्रदीप शर्मा को इंसाफ मिलेगा? जवाबदेही तय होगी या एक और सरकारी कर्मचारी सिस्टम की बेरुखी का शिकार बनेगा? हालांकि इन सारे सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं क्योंकि किसी भी सक्षम अधिकारी ने इस बारे में अभी तक कुछ नहीं कहा है.
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शराब दुकान हटाने की मांग पर वार्डवासियों ने दी धरने की चेतावनी
वार्डवासियों की प्रमुख मांग सोनामूंदी में संचालित संचालित अंग्रेजी देशी शराब दुकान को हटाने की थी. उनका कहना है कि वे पिछले तीन साल से प्रशासन को इस बारे में आवेदन दे रहे हैं. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
वार्ड के गंगाराम पाड़े, भवरसिंह, शुभांगिनी मेहर ने कहा कि भट्ठी होने से पीने वालों और खरीदार के चलते बस्ती में इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है. फूटे बोतल, बेन लगे पाउच और प्लास्टिक के चलते खेत-खार भर जा रहा है. शिशु मंदिर स्कूल परिसर, महिला समूह का कार्यशाला भी प्रभावित हैं.
उन्होंने बताया कि कारणों को गिना कर सुशासन तिहार में आवेदन दे चुके थे. आज उन्हें समाधान शिविर में मांग पूरी होने की उम्मीद थी. लेकिन मांग पूरी नहीं होते देख बिफरे वार्डवासियों ने मंच पर मौजूद एसडीएम समेत पालिका अध्यक्ष के सामने 5 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी पत्र थमा दिया. वार्डवासियों ने कहा अब आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है.
एसडीएम तुलसीदास मरकाम ने कहा है कि शर्मा की मांगों का समाधान शासन स्तर पर होना है. प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर को भेजा गया है. शराब दुकान के लिए भी स्थल चयन किया गया है. जिसे जल्द हटा दिया जाएगा.
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