राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन, राहुल-प्रियंका और अखिलेश यादव को उठा ले गई पुलिस, पीएम नरेन्द्र मोदी आवास के गेट पर हल्ला बोल
Rahul Gandhi protests in front of the Prime Minister's residence; police take away Rahul, Priyanka and Akhilesh Yadav; attack at the gate of PM Narendra Modi's residence
नई दिल्ली : कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आधिकारिक आवास के एक गेट के निकट धरना देकर न सिर्फ सरकार और पुलिस, बल्कि पार्टी के कई सांसदों को भी चौंका दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेताओं के लिए इतने उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में प्रदर्शन करने के लिए गोपनीयता बनाए रखना जरूरी था. क्योंकि इसकी जानकारी पहले मिल जाती तो इलाके की घेराबंदी की जा सकती थी. सांसदों से कहा गया था कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर बधाई देने के लिए 10, राजाजी मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुंचना है.
इसलिए कई सांसदों को आगे होने वाले घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी और वे खरगे के आवास पर पहुंच गए. इसके बाद उनसे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा का अनुसरण करने को कहा गया. क्योंकि शीर्ष नेता अचानक खरगे के आवास से करीब 500 मीटर दूर 7, लोक कल्याण मार्ग के गेट की ओर बढ़ने लगे.
इस घटनाक्रम की जानकारी फैलते ही पार्टी के अन्य नेता भी मौके पर पहुंच गए. कुछ शीर्ष नेताओं को ही इस कदम की जानकारी थी और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद वे खरगे के आवास पर पहुंच गए. हालांकि ज्यादातर सांसदों को प्लान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास धरना दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग की. प्रधानमंत्री आवास पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, कांग्रेस के पंजाब अध्यक्ष राजा वारिंग समेत कई लोग मौजूद रहे.
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राहुल गांधी से मिलकर बातचीत के बाद जब धरना खत्म नहीं हुआ, तो पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, और कई अन्य नेताओं को ‘बलपूर्वक’ हिरासत में ले लिया और उन्हें जबरन उठाकर बस में बैठाकर ले गई. पुलिस द्वारा उठाए जाने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जोरदार प्रतिरोध भी किया.
कुछ घंटे बाद राहुल गांधी और हिरासत में लिए गए बाकी नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम से रिहा कर दिया गया. इसी बीच कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी हिरासत में लिए गए नेताओं से मिलने मंदिर मार्ग थाने पहुंची. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि हिरासत में लिए जाने के दौरान राहुल और प्रियंका गांधी से पुलिस ने दुर्व्यवहार किया.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोमवार को सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज करने को लेकर कहा कि इसके लिए सरकार को बिना शर्त स्टूडेंट्स से माफ़ी मांगनी चाहिए.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि कल युवा स्टूडेंट्स के साथ हुई क्रूरता को लेकर पीएम मोदी से जवाब मांगने के लिए हमने उनके उनके घर तक मार्च किया है. सरकार कोई जवाबदेही नहीं लेना चाहती या संसद में इस पर बहस नहीं चाहती. भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
राहुल और केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी लाठीचार्ज में घायल छात्रों से मिलने के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे. उन्होंने छात्रों का हालचाल लिया और हरसं भव मदद का आश्वासन दिया. इसके बाद प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने का फैसला लिया गया है.
राहुल ने एक्स पर लिखा, 'छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है. प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे, नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं। मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस दौरान राहुल गांधी की आंख के नीचे चोट लगी और हाथ-पैरों में भी हल्की चोटें आईं
दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन जारी है. दीपके का आरोप है कि दोनों नेताओं के मोबाइल फोन ले लिए गए और उन्हें नड्डा के घर पर एक तरह से नजरबंद रखा गया. उनका कहना था कि सरकार का मकसद आंदोलन के नेताओं को अलग-थलग कर देना था. ताकि अव्यवस्था फैलने पर कोई नेतृत्व न कर सके. हालांकि सरकार ने इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि वह सीजेपी से बातचीत के लिए तैयार है.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी फिर से धरने पर बैठ गए. उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तस्वीर के साथ संविधान की एक प्रति, रामचरितमानस, चरखा और भगवान बुद्ध की एक छोटी प्रतिमा रखी. दीपके ने बताया कि सोनम वांगचुक पहले अपना अनशन खत्म करने वाले थे. लेकिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई देखने के बाद उन्होंने अनशन जारी रखने का फैसला किया.
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