संलग्नीकरण व्यवस्था समाप्ति के बाद भी शिक्षकों की समस्या बरकरार, 57 हजार शिक्षक पदों के वादे का क्या हुआ? 5 हजार पोस्ट की भर्ती भी स्थगित

Teachers' woes persist even after the abolition of the deputation system; what happened to the promise of 57,000 teaching posts? Recruitment for 5,000 posts has also been deferred.

संलग्नीकरण व्यवस्था समाप्ति के बाद भी शिक्षकों की समस्या बरकरार, 57 हजार शिक्षक पदों के वादे का क्या हुआ? 5 हजार पोस्ट की भर्ती भी स्थगित

संलग्नीकरण व्यवस्था समाप्ति के बाद भी शिक्षकों की समस्या बरकरार
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर द्वारा शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण व्यवस्था खत्म किये जाने के बाद भी गरियाबंद जिले में शिक्षकों की पदस्थापना और संलग्नीकरण को लेकर समस्यायें सामने आ रही हैं. इसका असर अब विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है.
आपको बता दें कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैनपुर, जिला गरियाबंद में पदस्थ श्रीमती लक्ष्मी देवांगन, व्याख्याता (एल.बी) विषय गणित को शैक्षणिक व्यवस्था के तहत शैक्षिणिक सत्र 2024 से शासकीय हाईस्कूल मदनपुर, विकासखण्ड – गरियाबंद में संलग्न किया गया है. जबकि मैनपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पिछले दो साल से गणित विषय के व्याख्याता नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
मिली जानकारी के मुताबिक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैनपुर के प्राचार्य ने 8 अक्टूबर 2026 को पत्र क्रमांक 246/स्था./2026 के माध्यम से जिले के उच्चाधिकारियों से इस स्थिति में मार्गदर्शन प्रदान करने का आग्रह किया है. पत्र में उल्लेख किया गया है कि विद्यालय में विगत दो वर्षों से गणित विषय के व्याख्याता नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अध्ययन-अध्यापन में अत्यंत परेशानी हो रही है. गणित विषय की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है.
संलग्नीकरण पर रोक, फिर भी समाधान का इंतजार
शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण व्यवस्था समाप्त करने का उद्देश्य शिक्षकों की उपलब्धता के अनुरूप विद्यालयों में उनकी पदस्थापना सुनिश्चित करना और शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाना है. इसके बावजूद यदि किसी विद्यालय में दो साल से गणित जैसे अहम विषय के व्याख्याता का पद रिक्त है. तो यह विभागीय व्यवस्था और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरन पर सवाल खड़े करता है.
विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा?
बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से गणित महत्वपूर्ण विषय है. ऐसे में दो साल तक नियमित अध्यापन की व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है.
एक सवाल यह भी है कि जब शासन स्तर पर संलग्नीकरण व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश दिये जा चुके हैं. फिर भी जिले का शिक्षा विभाग विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये कोई प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रहा है?
दो साल से व्याख्याता नहीं, अब दो की पदस्थापना कैसे?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न, मैनपुर विद्यालय में गणित विषय के शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता और उनकी पदस्थापना को लेकर है. प्राचार्य के पत्र में दो साल से गणित के व्याख्याता नहीं होने की बात कही गई है. दूसरी तरफ मिली जानकारी के मुताबिक मूल पदस्थापना के तहत व्याख्याता लक्ष्मी देवांगन का वेतन मैनपुर से ही आहरित हो रहा है और अब इसी विद्यालय में एक अन्य गणित व्याख्याता की पदस्थापना की जा रही है. अगर ऐसा कुछ हुआ तो वेतन आहरण की समस्या संभावित होगी.
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57 हजार शिक्षक पदों के वादे का क्या हुआ? 5 हजार पोस्ट की भर्ती भी स्थगित
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा सरकार की तरफ से 57 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती का वादा किए जाने के बाद युवाओं को सरकारी नौकरी की उम्मीद जगी थी. लंबे इंतजार के बाद पांच हजार शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा हुई. लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया स्थगित होने से अभ्यर्थियों में निराशा और असमंजस की स्थिति बन गई है. पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए युवाओं को स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
57 हजार पदों पर भर्ती के वादे पर सवाल
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने युवाओं से 57 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती का वादा किया था. ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि इस वादे को पूरा करने की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि हजारों युवा लंबे समय से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी मिलने का इंतजार है.
5 हजार पदों की भर्ती स्थगित होने से बढ़ी चिंता
लंबे इंतजार के बाद पांच हजार पदों पर शिक्षक भर्ती की घोषणा से अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी थी. कई युवाओं ने भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए लंबे समय से मेहनत की है. कुछ अभ्यर्थियों ने शिक्षक बनने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी निजी नौकरियां तक छोड़ दीं. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया के स्थगित होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है.
परीक्षा और नियुक्ति की तारीख स्पष्ट करने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी. परीक्षा कब आयोजित की जाएगी और नियुक्ति की प्रक्रिया कब पूरी होगी. इसे लेकर सरकार को स्पष्ट समयसीमा घोषित करनी चाहिए. लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अनिश्चितता परेशानी का कारण बन रही है. उनका कहना है कि सिर्फ भर्ती की घोषणा से नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय में आगे बढ़ाने से ही युवाओं को राहत मिलेगी.
कानूनी विवाद के समाधान की भी मांग
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कानूनी विवादों के कारण भी मामला आगे बढ़ने में बाधा आने की बात सामने आ रही है. अभ्यर्थियों की मांग है कि संबंधित मामलों का नियमानुसार जल्द समाधान किया जाए. ताकि भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सके. युवाओं का कहना है कि उन्हें परीक्षा और नियुक्ति को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलने पर अपनी तैयारी की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी.
सरकार से युवाओं को स्पष्ट जवाब देने की मांग
पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सरकार से शिक्षक भर्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब 57 हजार पदों पर भर्ती का वादा किया गया था. तो उस दिशा में अब तक कितनी प्रगति हुई है. वहीं, पांच हजार पदों की घोषित भर्ती भी स्थगित होने से युवाओं के बीच बढ़ते असमंजस पर सरकार को जवाब देना चाहिए. अब शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की निगाहें सरकार के अगले कदम और भर्ती प्रक्रिया की नई समयसीमा पर टिकी हैं.
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