फर्जी बाघ और आदिवासियों पर वन विभाग के अत्याचार मामले में 15 मई को गरियाबंद आएगी हाई कोर्ट के वकीलों की जांच टीम
The investigation team of High Court lawyers will visit Gariaband on May 15 in the case of fake tiger and forest department's atrocities on tribals
रायपुर : उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के कुल्हाड़ीघाट में दो बाघों का पंजा का निशान मिलने का वन विभाग ने झूठा दावा किया है. कुल्हाड़ीघाट में दो तेंदुआ का पंजा का निशान मिला है जिस पर वन विभाग ने दो बाघ होने हल्ला मचा दिया और उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में दो बाघों का पंजा मिलने का फर्जी समाचार भी छपवा दिया है.| उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के कुल्हाड़ीघाट में एक महीने से दो तेंदुआ घूम रहे है जिसका समाचार भी प्रकाशित हुआ था. उसी दो तेंदुआ का पंजा का निशान अभी वन विभाग को मिला है. जिसे वन विभाग ने बाघ का पंजा होने का झूठा दावा कर फर्जी समाचार छपवा दिया. जबकि वास्तविकता यह है कि उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में कोई भी बाघ नहीं है.
उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में बाघ साबित करने के लिए वन परिक्षेत्र कुल्हाड़ीघाट में बाघ का फर्जी फोटो, फर्जी पंजा, फर्जी मल बनाया जाता है जिसके सम्बन्ध में रिसर्चर तीव कुमार सोनी ने वर्ष 2020 में गरियाबंद कलेक्टर को मामले की शिकायत किया था | शिकायत किये जाने पर गरियाबंद कलेक्टर के द्वारा प्रकरण क्रमांक 25 / 2020 पंजीबद्ध कर मामले की जांच किये जाने के लिए वन विभाग को प्रकरण भेजा गया था परन्तु गरियाबंद कलेक्टर के निर्देश के बाद भी वन विभाग के द्वारा 5 साल के बाद भी बाघ का फर्जी फोटो, फर्जी पंजा, फर्जी मल का जांच कार्यवाही नहीं किया गया.
उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के फर्जी बाघ की जांच पड़ताल करने 15 मई को हाई कोर्ट के वकीलों का जांच टीम गरियाबंद आएगी. हाई कोर्ट के वकीलों के द्वारा उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के फर्जी बाघ और आदिवासियों पर वन विभाग के द्वारा किये गए अत्याचार का जांच पड़ताल किया जाएगा. और कई कोर्ट में केस दाखिल किया जाएगा.
जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता देव नारायण सिन्हा ने बताया कि उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के फर्जी बाघ और आदिवासियों पर वन विभाग के अत्याचार की खबर मिली है.| उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व गरियाबंद क्षेत्र के सरपंचो, ग्रामीणों, आदिवासियों से खबर मिली है कि उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में बाघ नहीं है और वन विभाग बाघ का फर्जी मल, फर्जी फोटो, फर्जी पंजा बना कर बाघ का फर्जी सबूत बनाता है साथ ही टाईगर रिजर्व के नाम पर वन विभाग वहा निवास करने वाले आदिवासियों पर भारी अत्याचार कर रहा है.
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रायपुर : STSC संरक्षण समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सोनपिपरे ने उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के खिलाफ आन्दोलन करने की बात कही है. STSC संरक्षण समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सोनपिपरे ने कहा कि उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व को उखाड़ फेकेंगे और आदिवासियों को उनको इंसाफ दिलाएंगे. उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में बाघ नहीं है. वन विभाग बाघ का फर्जी मल, फर्जी फोटो, फर्जी पंजा बना कर बाघ का फर्जी सबूत बनाता है.
टाईगर रिजर्व के नाम पर वन विभाग वहा निवास करने वाले आदिवासियों पर भारी अत्याचार कर रहा है.| आदिवासियों को खेत, जमीन, घर, देव स्थल छोड़कर जाने के लिए वन विभाग भारी दबाव डाल रहा है. वहा से हटने के लिए वन विभाग आदिवासियों को भारी प्रताड़ित कर रहा है. लेकिन आदिवासी ग्रामीण वहा से हटने के लिए तैयार नहीं है. क्योकि वहा के आदिवासी दादा-पुरखा जमाने से उक्त जंगल क्षेत्रो में निवास करते आ रहे हैं.
STSC संरक्षण समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सोनपिपरे ने उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व ने कहा कि उन आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन-खेती वहा पर है. उनकी संस्कृति और देव स्थल वहा पर है. उनकी परम्परा और पुरानी यादे वहा पर है. इन सभी को छोड़कर आदिवासी वहा से चले जायेंगे तो फिर आदिवासियों की पूरी संस्कृति ही खत्म हो जाएगी. इसलिए अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए आदिवासी वहा से हटना नहीं चाहते है. लेकिन वन विभाग आदिवासियों को हटाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहा है. आदिवादी वहा से हटने से इंकार कर दिया तो वन विभाग जोर जबरदस्ती करना शुरु कर दिया है और आदिवासियों को वहा से हटाने के लिए कई तरह के छल कपट करने पर उतारु हो गया है.
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रिसर्चर तीव कुमार सोनी का रिसर्च
कुल्हाड़ीघाट में बाघ का फर्जी सबूत बनाया जाता है.. रिसर्चर तीव कुमार सोनी का रिसर्च सही सिद्ध हुआ है. कुल्हाड़ीघाट में ही दो बाघों का पंजा का निशान मिलने का वन विभाग ने झूठा दावा किया है. उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में बाघ साबित करने के लिए वन परिक्षेत्र कुल्हाड़ीघाट में बाघ का फर्जी फोटो, फर्जी पंजा, फर्जी मल बनाया जाता है. जिसके बारे में रिसर्चर तीव कुमार सोनी ने वर्ष 2020 में गरियाबंद कलेक्टर को मामले की शिकायत किया था. शिकायत किये जाने पर गरियाबंद कलेक्टर के द्वारा प्रकरण क्रमांक 25 / 2020 दर्ज कर मामले की जांच किये जाने के लिए वन विभाग को केस भेजा गया था लेकिन गरियाबंद कलेक्टर के निर्देश के बाद भी वन विभाग के द्वारा 5 साल के बाद भी बाघ का फर्जी फोटो, फर्जी पंजा, फर्जी मल का जांच कार्यवाही नहीं किया गया है.
उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व दो जिलो धमतरी और गरियाबंद जिलो के करीब 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. जिसके जंगल के अन्दर में पचासों गाँव है जिसमे से सिर्फ कुल्हाड़ीघाट में ही बाघ का फर्जी सबूत बनाए जाने का रिसर्चर तीव कुमार सोनी ने शिकायत किया है. जिसके बाद वन विभाग ने कुल्हाड़ीघाट में ही बाघ का फोटो, मल, पंजा मिलने का दावा किया है.
उल्लेखनीय है कि कुल्हाड़ीघाट में बाघ का फर्जी सबूत बनाए जाने का शिकायत किया गया है और फिर वन विभाग के द्वारा कुल्हाड़ीघाट में ही बाघ का फोटो, मल, पंजा मिलने का दावा करता है. इस घटना से सवाल उठता है कि 2000 वर्ग किलोमीटर में फैले उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में पचासों गांव है तो फिर वन विभाग को उन पचासों गाँवों में बाघ का फोटो, मल, पंजा क्यों नहीं मिलता है. वन विभाग को कुल्हाड़ीघाट में ही बाघ का फोटो , मल, पंजा क्यों मिलता है. इससे साफ है कुल्हाड़ीघाट में बाघ का फर्जी सबूत बनाए जाने का रिसर्चर तीव कुमार सोनी का रिसर्च सही है.
उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के फर्जी बाघ के फर्जी सबूत का प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से शिकायत
वन विभाग द्वारा बाघ साबित करने के लिए बाघ का फोटो, मल, पंजा बनाए जाने की शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण – NTCA को किया गया है.| वन विभाग बाघ साबित करने के लिए कम्प्यूटर में बाघ का फर्जी फोटो बनाते आ रहा है.| प्रधान मंत्री को भेजे गए शिकायत पत्र में बिंदुवार शिकायत किया गया है कि
(01)- वन विभाग के पास बाघ की वंशावली की जानकारी कोई भी जानकारी नहीं है.
(02)-10 साल से बाघ है तो 10 साल के बाघों के पंजो का रिकार्ड वन विभाग के पास नहीं है.
(03)- 10 साल से बाघों का मल का सबूत भी वन विभाग के पास नहीं है.
(04)-10 साल से बाघ ने किन जानवरों का शिकार किया उनका कंकाल कहा है जानकारी वन विभाग के पास नहीं है.
(05)-10 साल से बाघ है उनकी वंश वृद्धि नहीं हो रही है की जानकारी वन विभाग के पास नहीं है.
(06)- बाघ है तो आज तक किसी ने आंखो से क्यों नहीं देखा वन विभाग के पास जवाब नहीं है.
(07)- बाघ है तो आज तक उन बाघों का नामकरण क्यों नहीं किया गया है वन विभाग के पास जवाब नहीं.
(08)- बाघ है तो कितने नर कितने मादा है वन विभाग के पास जवाब नहीं है.
बाघ के प्रमाण के रूप में वन विभाग सिर्फ बाघ का फर्जी फोटो और मल देकर बाघ होने का दावा करता आ रहा है.
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