किसानों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हुआ उग्र, हाईवे जाम-बस में तोड़फोड़, पुलिस लाठीचार्ज, उपद्रवियों ने तोड़े बैरिकेड, दिया अल्टीमेटम
Peaceful farmers' protest suddenly turned violent, highway blocked, bus vandalized, police lathi-charged, rioters broke barricades, and issued an ultimatum.
खैरागढ़ : क्षेत्र में खुलने वाले श्री सीमेंट के विरोध में छुईखदान एसडीएम कार्यालय पहुंचे जहां उनके प्रतिनिधियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर 11 दिसंबर को होने वाली जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की.
साथ ही किसानों ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी सूरत में श्री सीमेंट प्लांट नही खुलनी चाहिए. एसडीएम के आश्वासन के बाद किसानों ने कलेक्टर से मुलाकात करने और कलेक्टर द्वारा आश्वासन दिए जाने की मांग को लेकर हाथों में तिरंगा और होंठों पर विरोध के नारे लिए हजारों किसान सुबह से छुईखदान एसडीएम कार्यालय पहुंचने लगे. और सड़क पर बैठकर जमकर नारेबाजी की.
धीरे-धीरे माहौल बिगड़ता गया और सैकड़ो की तादाद में किसान राजनांदगांव-कवर्धा स्टेट हाईवे में पहुंचकर हाईवे में चक्काजाम कर दिया. जिसके बाद शांतिपूर्ण चल रहा किसानों का आंदोलन उग्र आंदोलन में तब्दील हो गया और युवाओं ने सड़क पर खड़ी कई वाहनों में तोड़फोड़ शुरु कर दी. इस दौरान एक बस के कांच को भीड़ ने तोड़ दिया. किसानों की भीड़ में शामिल कई उपद्रवियों ने पुलिस द्वारा लगाई गई बैरीकेडिंग को तोड़ना शुरु किया.
जिसके बाद पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और उन पर लाठियां बरसाई. एक वक्त ऐसा ऐसा भी आया. जब उपद्रवियों ने पुलिस को दौड़ाया. जहां पुलिस को पीछे भागना पड़ा. आखिरकार काफी खींचतान के बाद मामला शांत हुआ और चक्काजाम खत्म हुआ. अब देखने वाली बात होगी कि 11 दिसंबर को होने वाली जनसुनवाई में क्या होगा?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निर्धारित क्षेत्र मैदानी, उपजाऊ और घनी आबादी वाला है। यहां प्लांट और खदान खुलने से सिंचित कृषि बुरी तरह प्रभावित होगी. भूजल और पर्यावरण को नुकसान पहुँचेगा और बच्चों-बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेगा. किसान नेताओं ने चेताया कि यह सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं बल्कि अस्तित्व और भविष्य की सुरक्षा का सवाल है.
प्रस्तावित खदान क्षेत्र के 10 किमी दायरे में आने वाले 39 गांवों ने ग्रामसभा प्रस्तावों के माध्यम से स्पष्ट रुप से परियोजना को नकार दिया है. संडी, पंडरिया, विचारपुर, भरदागोड़ सहित कई पंचायतों ने कहा कि खदान से जलस्रोतों को गंभीर नुकसान पहुँचेगा. कृषि और पशुपालन ठप हो जाएगा, विस्थापन बढ़ेगा. प्रदूषण जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगा. ग्रामीणों का आरोप है कि आगामी 11 दिसंबर की जनसुनवाई पारदर्शी नहीं है और प्रभावित गांवों की वास्तविक राय शामिल ही नहीं की गई है.
किसानों का कहना है कि जब 39 गांव परियोजना को पहले ही अस्वीकार कर चुके हैं तो जनसुनवाई का कोई औचित्य नहीं बचता. विरोध कृषि, पर्यावरण और जल स्रोतों से आगे बढ़कर अब ग्रामीणों की आजीविका और सम्मान की लड़ाई बन चुका है. किसानों और सामाजिक संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर समय रहते फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन अगले चरण में जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. हजारों किसानों का यह शक्ति-प्रदर्शन रैली एक स्पष्ट संदेश देती है कि स्थानीय जनता अपनी जमीन, जल और भविष्य के सवाल पर किसी कीमत पर समझौता नहीं करेगी.
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