20 दिन बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने प्रशांत महासागर में की सेफ लैंडिंग, लहराया भारत का परचम, किए 7 परीक्षण
20 days later, Indian astronaut Shubhanshu Shukla made a safe landing in the Pacific Ocean, raised the flag of India, conducted 7 tests
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला स्पेस स्टेशन से वापस धरती पर लौट आए हैं. वे 18 दिन तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहने के बाद पृथ्वी पर लौटे हैं. मंगलवार, दोपहर 3 बजे (भारतीय समयानुसार) स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा. ISRO ने शुभांशु शुक्ला की इस अंतरिक्ष यात्रा पर करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. शुभांशु का अंतरिक्ष अनुभव भारत के गगनयान मिशन में मदद करेगा.
शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मैं इस मिशन के जरिए देश के बच्चों को प्रेरित करना चाहता हूं. अगर मैं एक बच्चे को भी प्रेरित कर पाया तो मैं समझूंगा कि मैं सफल रहा.”
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए और इसको लेकर देश में खास उत्साह दिखा. उनके मिशन को लेकर बच्चों में जिज्ञासा थी. शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष से धरती पर लौटने पर सारे हिंदुस्तान की निगाह लगी हुई थी. जैसे ही ये तस्वीर आई, देश ने राहत की सांस लेने के साथ गर्व भी महसूस किया.
धरती पर लौटने पर शुभांशु शुक्ला के चेहरे पर गर्व और होठों पर मुस्कुराहट दिखी. कैप्सूल से बाहर निकलते ही शुभांशु ने हाथ हिलाकर अभिवादन किया. करीब 23 घंटे के सफर के बाद भारतीय समय के मुताबिक, दोपहर 3 बजे अमेरिका के कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई. इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं. पैराशूट की मदद से ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया के तट पर उतरा. पृथ्वी पर वापसी के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को पानी से निकाला गया.
शुभांशु शुक्ला का स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन धरती की तरफ 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आया. जब यह बहुत करीब आया तो स्पीड कम कर दी गई. कैप्सूल की बाहरी सतह पर हीट शील्ड 2000 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन कर रही थी. शुभांशु ने 1 करोड़ 39 लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया. जो अपने आप में ऐतिहासिक है.
लखनऊ के जिस स्कूल में शुभांशु शुक्ला ने पढ़ाई की थी, उसी सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में उनके परिवार के साथ स्कूली बच्चों ने इस ऐतिहासिक पल को देखा. जैसे ही शुभांशु की सफल लैंडिंग हुई, लोग खुशी से झूम उठे. शुभांशु के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए.
दिल्ली के CSIR-NPL ऑडिटोरियम में भी शुभांशु की रिटर्न जर्नी का सीधा प्रसारण दिखाया गया. भारत के लिए शुभांशु शुक्ला का ये अंतरिक्ष मिशन केवल रिकॉर्ड बनाने का मौका नहीं था. ये भविष्य की तैयारी थी. ये मिशन भारत के खुद के दम पर अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के सपने का आधार बनेगा. यहीं से भारत के गगनयान मिशन का रास्ता निकलेगा.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर शुभांशु शुक्ला ने भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन को आगे बढ़ाने में मदद के लिए 7 खास परीक्षण किए. इनमें मांसपेशियों के नुकसान को डिकोड करने, मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस विकसित करने और अंतरिक्ष में हरे चने और मेथी के बीज को अंकुरित करने के प्रयोग शामिल थे.
Axiom-4 मिशन अपने साथ कई डेटा और अनुभव लेकर लौटा है कि अगर इंसान को स्पेस में लंबा वक्त रहना है तो वहां खाने-पीने का क्या इंतजाम हो सकता है. इस मिशन से स्पेस साइंटिस्ट को स्पेस में इंसान के दिमाग के ब्लड सर्कुलेशन को समझने का नजरिया भी मिला.
शुभांशु भले ही धरती पर लौट चुके हों, लेकिन उनकी चुनौतियां अभी कम नहीं हुई हैं. शुभांशु शुक्ला अगले सात दिनों तक रिहैबिलिटेशन में रहेंगे और शरीर को धरती के गुरुत्वाकर्षण के हिसाब से ढालने की कोशिश करेंगे. इस दौरान मेडिकल टीम उनकी सेहत का ध्यान रखेगी.
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