सूरजपुर में वाहन चलाने की ट्रेनिंग के दौरान बेजुबान जानवर की कुचलने से हुई मौत, मैदान में नहीं सड़क पर दिया जा रहा गाड़ी सिखाने का प्रशिक्षण!
A mute animal died after being crushed during driving training in Surajpur, driving training is being given on the road, not in the field!
सूरजपुर : परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस देने के लिए ड्राइविंग स्कूल का प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र मांगता है. जिसके लिए मुख्मंत्री विष्णुदेव साय की गृह जिला सूरजपुर में वाहन प्रशिक्षण के लिए एक एजेंसी को अधिग्रहित किया गया है. जो वाहन चलाने का ट्रेनिंग देती है. लेकिन वाहन चलाने का ट्रेनिंग मैदान में दिया जाता है ना कि शहर के भीड़भाड़ वाली ट्रैफिक वाले जगह पर? यह सवाल इसलिए पैदा हो रहा है क्योंकि ड्राइविंग स्कूल कि वाहन से एक जानवर की मौत हो गई. वह भी पुराने बस स्टैंड में. इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वहां की ट्रेनिंग भी भारत वाले इलाके में देना नियम में है या फिर नियम के खिलाफ? अगर ऐसा हो रहा है तो ऐसे ट्रेनिंग देने वाले की मान्यता रद्द क्यों नहीं की जा रही है?
मिली जनाकारी के मुताबिक मुख्मंत्री विष्णुदेव साय की गृह जिला सूरजपुर के पुराने बस स्टंड पर एक दर्दनाक घटना सामने आई है. जहां एक गाड़ी चलाना सिखाने वाले ट्रेनिंग स्कूल की गाड़ी ने सड़क पर एक बेजुबान जानवर को कुचल दिया. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इस लापरवाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
क्या ऐसे ड्राइविंग सिखाने वाले गाड़ी चालकों ऊपर प्रशासन कार्यवाही कर पाएगी या फिर एक बड़ी अनहोनी हो का इंतजार कर रही है प्रशासन?
प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती. आखिर ये कब तक चलता रहेगा? क्या जानवरों की जान की कोई कीमत नहीं? अगर प्रशासन की यह चुप्पी नहीं टूटी. तो आज जानवर और कल इंसान भी इसी लापरवाही का शिकार होगा. क्या तभी प्रशासन जागेगा? या फिर हमेशा की तरह मामले को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?
मिली जानकारी के मुताबिक पुराने बस स्टेंड के पास गाड़ी नम्बर CG20 J 4503 वाहन चालक गाड़ी खुद चला रहा था. इसी दौरान सड़क पर बैठा एक बेजुबान जानवर उनकी गाड़ी के नीचे आ गया और कुचला गया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशिक्षक ने न तो वाहन की गति धीमी की और न ही किसी तरह की सतर्कता बरती.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस तरह के ट्रेनिंग स्कूलों प्रशिक्षक यातायात नियमों की अनदेखी कर रहे हैं. आमतौर पर गाड़ी चलाना सिखाने के लिए निर्धारित सुरक्षा नियम होते हैं. जिसमें सड़क पर सतर्कता और जानवरों या पैदल चलने वालों का विशेष ध्यान रखना शामिल है. जब गाड़ी चलाना सिखाने वाले ही लापरवाही की मिसाल बन जाएं. तो सोचिए उनके सिखाए हुए चालक सड़कों पर क्या कहर बरपाएंगे. जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने वाले खुद नियम तोडें. तो सड़कें सिर्फ रास्ता नहीं. खतरे का जाल बन जाती हैं. ये लापरवाही नहीं. बल्कि आने वाले हादसों की आहट है.
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