दुर्गा दर्शन के बाद गुपचुप खाना पड़ा भारी, एक ही परिवार के 7 लोग फूड पाइजनिंग के शिकार, इलाज जारी, त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
A snack consumed after visiting a Durga Puja pandal proved costly, leaving seven members of the same family suffering from food poisoning; they are currently undergoing treatment. The incident has raised questions regarding food safety measures during the festive season.
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दुर्गा दर्शन करने आए एक ही परिवार के सात सदस्यों की गुपचुप खाने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई. रविवार देर रात सीएमडी कॉलेज मैदान में लगे मेले में गुपचुप खाने के कुछ देर बाद परिवार के सदस्यों को पेट दर्द, मरोड़ और लगातार उल्टियां होने लगीं. हालत बिगड़ने पर सभी को छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में भर्ती कराया गया. जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू किया. डॉक्टरों ने फूड पाइजनिंग की आशंका जताई है. घटना के बाद मेले में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया. पीड़ितों में महिलाएं, युवक और बच्चे शामिल हैं. सबसे कम उम्र का पीड़ित शिवांश साहू उम्र 6 साल है.
मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचा था साहू परिवार
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम परसदा निवासी महेश साहू अपनी पत्नी संतोषी साहू और परिवार के साथ रविवार की देर रात मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए बिलासपुर शहर आया था. परिवार के सदस्य शहर के कई दुर्गा पंडालों का भ्रमण करते हुए अष्टमी की रात करीब 12 बजे सीएमडी कॉलेज मैदान पहुंचे. यहां मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन करने के बाद परिवार के लोग मैदान में लगे मेले में घूमने लगे. इसी दौरान परिवार के सभी सदस्यों ने एक ठेले से गुपचुप खाया. उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ जाएगी.
गुपचुप खाने के कुछ देर बाद शुरू हुई उल्टियां
बताया जा रहा है कि गुपचुप खाने के बाद साहू परिवार के सदस्य कुछ देर तक मेले में रुके रहे. जब परिवार वापस लौटने की तैयारी कर रहा था. तभी एक-एक करके सदस्यों को पेट दर्द और मरोड़ की शिकायत होने लगी. देखते ही देखते कई सदस्यों को उल्टियां शुरू हो गईं. कुछ ही देर में परिवार के सभी सात सदस्य बीमार पड़ गए. अचानक इतनी बड़ी तादाद में लोगों की तबीयत बिगड़ने से मेले में मौजूद अन्य लोग भी परेशान हो गए. मौके पर मौजूद लोगों ने इसकी खबर आयोजन समिति के सदस्यों को दी. इसके बाद सभी पीड़ितों को इलाज के लिए सिम्स पहुंचाया गया.
सिम्स में सातों लोगों का इलाज शुरु
अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने सभी सात लोगों की स्वास्थ्य जांच की और इलाज शुरु किया. पीड़ितों को पेट दर्द, मरोड़ और लगातार उल्टियां होने की शिकायत थी. एक ही खाद्य पदार्थ खाने के बाद समान लक्षण दिखाई देने से फूड पाइजनिंग की आशंका जताई गई. सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के मुताबिक गुपचुप खाने के बाद एक ही परिवार के सात लोग बीमार पड़े हैं. सभी का इलाज किया जा रहा है. हालांकि बीमारी का सटीक कारण खाद्य सामग्री की जांच और चिकित्सकीय परीक्षण की रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा. सभी पीड़ित ग्राम परसदा के रहने वाले साहू परिवार के सदस्य बताए गए हैं.
गुपचुप के पानी और मसाले की गुणवत्ता पर शक
घटना के बाद गुपचुप बनाने में इस्तेमाल किए गए पानी, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि दूषित पानी या खराब खाद्य सामग्री की वजह से परिवार के सदस्य बीमार हुए होंगे. हालांकि यह अभी जांच का विषय है. खाद्य सामग्री के दूषित होने की पुष्टि प्रयोगशाला की जांच के बाद ही की जा सकेगी. संबंधित ठेले से गुपचुप के पानी और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने इकठ्ठा किए गए हैं. इन्हें चेकअप के लिए भेजे जाने की बात कही गई है.
त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
नवरात्रि और त्योहारी सीजन के दौरान बिलासपुर के प्रमुख दुर्गा पंडालों और मेला स्थलों के आसपास बड़ी तादाद में खाने-पीने के ठेले लगाए जाते हैं. इन दुकानों पर गुपचुप, चाट, समोसा और अन्य फास्ट फूड खाने के लिए लोगों की भीड़ रहती है. ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की जांच और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. लोगों की मांग है कि खाद्य सुरक्षा विभाग मेला स्थलों और प्रमुख बाजारों में खाने-पीने की दुकानों की चेकिंग करे.
खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच से खुलेगा मामला
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की जानकारी जुटाने की बात सामने आई है. जिस ठेले से परिवार ने गुपचुप खाया था. वहां इस्तेमाल की गई खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच अहम मानी जा रही है. यह भी पता लगाया जाना जरुरी है कि संबंधित खाद्य सामग्री का सेवन करने वाले अन्य लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई है या नहीं. फिलहाल सातों पीड़ितों के इलाज पर ध्यान दिया जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद ही फूड पाइजनिंग की असल वजह का पता चल सकेगा.
स्ट्रीट फूड खाते समय बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के मुताबिक खुले में रखे खाद्य पदार्थ, दूषित पानी और लंबे समय तक बिना उचित तापमान पर रखी गई सामग्री से पेट संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. त्योहारी सीजन में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर खाने-पीने की चीजों का सेवन करते समय साफ-सफाई और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को खाने के बाद लगातार उल्टी, पेट दर्द, दस्त, तेज बुखार या कमजोरी की शिकायत होती है तो फौरन डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए. बच्चों में पानी की कमी तेजी से हो सकती है. इसलिए उनके स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरुरी है. बिलासपुर की इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक आयोजनों के दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता की जरुरत को सामने ला दिया है.
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