मेकाहारा के बाद रायपुर AIIMS में रैगिंग का मामला, सीनियर्स ने जूनियर छात्रों को ठंड में घुमाया बाहर, छात्राओं के बेहोश होकर गिरने का दावा
After Mekahara case of ragging in Raipur AIIMS seniors made junior students walk outside in the cold claims of girl students falling unconscious
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के बाद अब रायपुर एम्स में रैगिंग का मामला सामने आया है. ये पूरा मामला नवंबर के दूसरे हफ्ते का है. इस पूरे मामले एम्स प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है.
आरोप है कि रायपुर में संचालित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में MBBS 2023 बैच के छात्रों के समूह के साथ रैगिंग हुई है. इन सभी छात्रों को एक समूह में बुलाकर एक छोटे से कमरे में बंद कर दिया गया. जिससे उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत हुई.
बताया जा रहा है कि इस दौरान कुछ छात्राएं बेहोश होकर गिर भी गई. आरोप है कि सीनियर छात्र यहां भी नहीं रुके और छात्रों को मात्र टी-शर्ट पहनकर ठंड में बास्केटबॉल कोर्ट में बुलाया.
मिली जानकारी के मुताबिक रैगिंग का यह मामला बीते 15-16 नवंबर की दरमियानी रात का है. इसकी शिकायत जूनियर स्टूडेंट्स ने हेल्पलाइन नंबर और एंटी रैगिंग के लिए काम करने वाली संस्थाओं से की है. छात्रों ने अपनी शिकायत में कहा है कि कई सीनियर स्टूडेंट उन्हें इस मामले में कोई जानकारी किसी और को देने पर और भी कड़ी कार्रवाई करने की धमकी दे रहे हैं.
सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता और सोसाइटी अगेंस्ट वायलेंस इन एजुकेशन की लीगल हेड मीरा कौर पटेल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि रायपुर एम्स से किसी स्टूडेंट से एक ई-मेल मिला है. जिसमें बताया गया है कि उनके साथ रैगिंग हुई है. सीनियर स्टूडेंट्स ने उन्हें एक ऐसे कमरे में बंद कर दिया. जहां सांस लेना मुश्किल था. इसके अलावा सिंपल टी-शर्ट में उन्हें बहुत ठंड में बास्केटबॉल ग्राउंड बुलाया गया. रायपुर एम्स ने इस पर उचित निर्णय नहीं लिया. कॉलेज इस घटना को बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा है. जबकि पीड़ित छात्रों ने एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर भी शिकायत की है.
IMA रायपुर के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता ने कहा कि नवंबर के दुसरे हफ्ते में रायपुर एम्स में फिर से रैगिंग का एक मामला सामने आया है. इसमें छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें एक यूनियन रुम में बंद कर रखा गया. लड़कियां गिरने लगी. यह सब गार्ड की मौजूदगी में उनके सीनियर ने उनके साथ किया .इन छात्रों ने अपनी शिकायत में कुछ सीनियर छात्रों के नाम भी बताए हैं. इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
रायपुर एम्स में रैगिंग को लेकर प्रबंधन कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब मिडिया ने इस मामले में स्टूडेंट वेलफेयर के डीन डॉक्टर चावली से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले में हम कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं. आपको जानकारी लेनी है तो आप पीआरओ के पास जाइए.
इसके बाद हमें PRO का जो नंबर उपलब्ध कराया गया. मिडिया ने उस पर कॉल किया लेकिन उसे रिसीव नहीं किया. छत्तीसगढ़ के मेडिकल इंस्टीट्यूशंस में रैगिंग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस पर अब शासन प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा यह भविष्य में ही देखने को मिलेगा. लेकिन रैगिंग के इन मामलों ने चिंता जरुर बढ़ा दी है.
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