PDS चावल की अवैध खरीदी-बिक्री जोरों पर, जिम्मेदार अधिकारी खामोश, नान की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, शिकायत के बाद आनन-फानन में बनाई जांच टीम
Illegal purchase and sale of PDS rice is in full swing, responsible officers are silent, questions raised on the functioning of NAN, investigation team formed in a hurry after complaint
PDS चावल की अवैध खरीदी बिक्री जोरो पर जिम्मेदार अधिकारी कुंभकारनि निद्रा मे मस्त
गरियाबंद : रिपोर्ट्स के मुताबिक छत्तीसगढ़ में गरीबो के शासन से राशन चावल 1 रुपये किलो में दिया जाता है. शासन यह योजना गरीबी रेखा के निचे जीवन यापन कर रहे लोगों को सस्ते दाम में अच्छे चावल उपलब्ध करा रही है. जो शासन का प्रथम लक्ष्य के साथ सरकार की यह अहम योजना गरियाबंद जिले मे साकार तो है. लेकिन PDS चावल की अवैध खरीद-बिक्री बेखौफ़ होकर ख़रीदा जा रहा शासन प्रशासन से यह बात छुपी नहीं है. और जिम्मेदार अधिकारी कुम्भ करन निद्रा में सोये हुए हैं या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या नेता के संरक्षण मे यह PDS चावल की खरीदी बेखौफ़ संचालित हो रही है. लाभार्थियों को यह चावल 1 रुपये मे सरकार द्वारा संचालित सोसायटी से दिया जाता है. वही कई लोग आसपास की दुकानों मे प्रति किलो 26-27 रुपये मे बेच देते हैं. जबकि PDS चावल की खरीदी-बिक्री पर शासन ने रोक लगाई है.
लेकिन सवाल यह है कि शासन की नाक के निचे यह अवैध कारोबार संचलित हो रहा है. गरियाबंद, छुरा,फिगेश्वर, राजिम और गांव -गांव मे यह अवैध कार्य को अंजाम दे रहे हैं. यह स्थानीय अधिकारियो के मॉनिटरीग और कार्यप्रणाली मे शक है.
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आरंग : अगर आप भी राशन कार्डधारक हैं तो यह खबर आपके लिए अहम है. दरअसल सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना में सरकारी राशन दुकानों पर गरीबों को दिए जाने वाले चावल में घोर लापरवाही सामने आई है. आरंग क्षेत्र के कई सरकारी राशन दुकानों में बेहद ही खराब चावल बांटा जा रहा है. खराब चावल लेने के लिए हितग्राही भी मजबूर हैं. क्षेत्र में खराब चावल वितरण करने के मामले में नागरिक आपूर्ति निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
लगातार मामले की शिकायत मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है. अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने इस पूरे मामले की जांच के लिए 4 सदस्यीय टीम गठित की है और 3 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने की बात कही है. आपको बता दें कि करीब 1-2 महीने से आरंग क्षेत्र के कई राशन दुकानों में बेहद ही खराब चावल बांटा गया है. चावल में कीड़े और कंकड़ पत्थर हैं. चावल की गुणवत्ता खाने लायक भी नहीं है. आरंग क्षेत्र में 112 राशन दुकान है. इनमें कई ऐसे दुकान हैं. जहां पिछले दो महीने तक खराब चावल का वितरण किया गया है.
इस मामले में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के आरंग केंद्र प्रभारी भरत पुरी गोस्वामी ने आरंग क्षेत्र के राशन दुकानों में खराब चावल वितरण होने की बात को कबूल किया है. उन्होंने कहा कि चावल 2 साल पुराने धान का है. आज से ही नया चावल वितरण किया जा रहा है. अधिकारियों के निर्देश के बाद जहां चावल खराब है. वहां बदला जा रहा है. उन्होंने चावल वितरण होने के समय चावल की गुणवत्ता को नहीं देखने की गलती भी कबूल की है.
अब यह सवाल उठ रहा है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) और नागरिक आपूर्ति निगम (नान) को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सार्वजनिक वितरण केंद्रों में राशन कार्डधारी प्रदेश की जनता को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी है. लेकिन ऐसे खराब स्तर के चावल का वितरण कर गरीब जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के प्रति शासन की क्या जिम्मेदारी बनती है. क्या जनता को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण चावल देने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे चावल को अपने परिवार के साथ बैठकर खाना पसंद करेंगे?
इस मामले में जांच टीम गठित होने के बाद देखने वाली बात है कि जांच सिर्फ खानापूर्ति के लिए होगी या गरीबों के हक और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों पर कार्रवाई होगी?.
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