महिला सरपंच का कार्य उसका पति या देवर नहीं कर सकता, बिना विवाह किए लिव इन में रहना भारत जैसे देश में सही नहीं -किरणमयी नायक

The work of a woman sarpanch cannot be done by her husband or brother-in-law living in a live-in relationship without marriage is not right in a country like India - Kiranmayi Nayak

महिला सरपंच का कार्य उसका पति या देवर नहीं कर सकता, बिना विवाह किए लिव इन में रहना भारत जैसे देश में सही नहीं -किरणमयी नायक

धमतरी : राज्य महिला आयोग ने धमतरी में कुल 26 मामलों की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान किरणमयी नायक ने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए. ये समाज के लिए खतरनाक है.
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने कलेक्ट्रेट में महिला आयोग से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई धमतरी में की. मंगलवार को कुल 26 मामलों की सुनवाई की गई. सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में किरणमयी नायक ने कहा कि महिला सरपंच का काम उसका पति या देवर नहीं कर सकता है. महिला आयोग की अध्यक्ष ने आगे कहा कि बिना विवाह के लिव इन रिलेशनशिप को बढ़ावा नहीं दिया जाए, ये समाज के लिए खतरनाक है.
”लिव इन रिलेशनशिप को बढ़ावा नहीं दें”:
सुनवाई के दौरान डीआरजी में तैनात जवान का भी मामला सामने आया. फरियादी महिला के मुताबिक आरोपी ने 10 से 12 सालों तक उसका शारीरिक शोषण किया. सुनवाई के दौरान डॉ किरणमयी नायक ने कहा कि ”भारत जैसे देश में बिना विवाह किए इस तरह से विदेशी संस्कृति को फॉलो कर रहना गलत है. इस तरह की अंग्रेजी सभ्यता लिव इन रिलेशन गलत है. इस तरह के व्यवहार को भारत को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए”
फरियादी ने कहा ‘मंगलसूत्र पहनाकर की थी शादी’: सुनवाई के दौरान महिला फरियादी ने महिला आयोग की अध्यक्ष को बताया कि ”आरोपी जवान ने उसे मंगलसूत्र पहनाया था और पत्नी की तरह रखता था”. महिला के तर्क पर किरणमयी नायक ने कहा कि ”इस तरह के लोगों को बेनकाब करने की जरुरत है. ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए”. महिला आयोग ने सुनवाई में आए लोगों को बताया कि अब अगली सुनवाई रायपुर में दिसंबर के महीने में होगी.
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सुनवाई के दौरान एक मामले में इसी आवेदिका का एक और फाईल 379 है जिसमें अनावेदकगण अलग है. लेकिन दोनो ही मामलों में मूल मुद्दा यह है कि आवेदिका और अनावेदकगणों के बीच जमीन के विवादों को लेकर दिवाली मामला अदालत में लंबित है. इसलिए उस विषय को छोड़ते हुए गांव का सामाजिक प्रतिबंध वाले क्षेत्रों में अनावेदकगणों का यह कथन है कि आवेदिका पक्ष गांव का अन्य समाज का 10 हजार रुपये और साहू समाज का 12 हजार रुपये रोक कर रखा है. आवेदिका पक्ष का मोबाईल साहू समाज के पास लगभग 14 हजार रुपये का है. जो 3 साल से रखा गया है. अनावेदक पक्ष मोबाईल लेकर और आवेदिका पक्ष 22 हजार रुपये लेकर रायपुर आएंगे. आयोग की तरफ से अधिवक्ता एवं काउंसलर दोनों पक्षों के सहमति को स्टाम्प में लिखा पढ़ी कराएगें. जिसमे अनावेदकगणों को यह घोषणा करनी होगी कि आवेदिका का सामाजिक बहिष्कार रद कर दिया गया है. जिसके लिए 18 सितम्बर .2024 को रायपुर में सुनवाई रखी गई है.
दुसरे मामलों में दोनो पक्षों के बीच तहसील न्यायालय, एसडीएम कोर्ट में वसीयतनामा को लेकर मामले का हल हो गया और वर्तमान में मामला दिवानी अदालत में लंबित है. ऐसी दशा में इस मामले को अदालत मेें होने की वजह से सुना जाना न्यायोचित नहीं है. इस मामले को नस्तीबद्ध किया गया.
दुसरे मामले में आवेदिका गांव की सरपंच है और सभी अनावेदकगण पंच है. उभय पक्षों के बीच मामले की जांच कलेक्टर ऑफिस से किया गया है और आवेदिका ने उच्च न्यायालय में मामला दर्ज की है और हाईकोर्ट स्टे के बाद सरपंच पद भी बनी हुई है और उनका काम उनके देवर द्वारा किया जा रहा है. अनावेदकगणों को इस पर आपत्ति है कि गांव का सारा हिसाब-किताब उनका देवर करता है.
उभय पक्षों को विस्तार से सुना गया कि वह महिला आरक्षण पर चुनाव लड़ना है. तो उन्हे ही सारा काम करना है और ठेका, कार्य खरीदी से अलग रखा जाना है. दोनों पक्षों में सुलह हो चुकी है. इस वजह से इस मामले को नस्तीबद्ध किया गया.
एक और मामले में अनावेदक आरक्षक है और नगरी थाना में डीआरजी में पदस्थ है. उसने आवेदिका का लगभग 10 से 12 साल तक शारीरिक शोषण किया गया. जिसके बाद आवेदिका ने थाना रुद्री में अनावेदक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है जिसका चालान अदालत मे पेश हो गया है और जिला सत्र न्यायालय में अनावेदक के खिलाफ मामला है.
आवेदिका को भी समझाईश दिया गया कि अनावेदक के खिलाफ न्यायालय में अपने मामले की बारीकी से जानकारी हासिल करे. ताकि अनावेदक को सजा मिल सके. आवेदिका को यह भी समझाईश दिया गया कि भारत जैसे देश में बिना शादी किए इस तरह पाश्चात्य लिव-ईन को बढ़ावा न दे. इस पर आवेदिका का कहना है कि उसने मंगलसूत्र पहनाया था और शादी-शुदा हैसियत से रहते थे. इस आवेदिका को समझाईश दिया गया कि इस तरह से लड़के को बेनकाब करे. और कड़ी से कड़ी कार्यवाही कर सजा दिलाई जाए. क्योकि मामला अदालत में है. जिससे मामले को नस्तीबद्ध किया गया.
एक और मामले में दोनो उभय को सुना गया. उभय पक्षों को बहुत ही दस्तावेज है जिससे आवेदिका एवं अनावेदक दस्तोवज एक दूसरे डाक के जरिए भेजे और इसकी सूचना आयोग के लिपिक को भी भेजे. अगली सुनवाई मामले रायपुर में दिसम्बर माह में रखा गया है.
इसी तरह एक और मामले में आवेदिका के मकान जो सरकारी जमीन भूमि पर बना था. उस अनावेदकगणों के द्वारा आपत्ति दर्ज किया गया था. जिस पर तहसीलदार और एसडीएम के निर्णय होने के बाद शासन के अनुमति पर तोड़ा गया था. और भवन निर्माण के पूर्व जो पैसा आवेदिका से मांगा गया था. वह मुद्दा अब खत्म हो गया. आवेदिका का कहना है कि गांव में पांच लोगो का मकान अवैध रुप से बना है. जिससे पैसा लेकर सांठ-गांठ कर छोड़ दिया गया है. बाकी अन्य पांच लोगो का मकान अवैध अतिक्रमण है. जिस पर तहसीलदार एवं एसडीएम ने कोई कार्यवाही नहीं की है. आवेदिका की प्रति मुफ्त प्रदान की जा रही है. जिससे वह कलेक्टर को लिखित शिकायत पेश करे। यह प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया.
अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक उसका पति और 11 साल पहले उसका विवाह हुआ है और वह मानसिक रुप से बीमार होने के कारण बहुत अत्याचार करता है. दोनो बच्चियों का भी जीना मुश्किल हो गया है और आवेदिका भयभीत रहती है कि कब उसके उपर किस तरह से अत्याचार कर बैठे. अनावेदक से उसका पक्ष पूछे जाने पर कुछ भी बोलने समझने की स्थिति में दिखाई नहीं दे रहा है. इससे आवेदिका की शिकायत की पुष्टि होती है.
इस प्रकरण मे अनावेदक की जांच एवं ईलाज शासकीय मनोरोग चिकित्सालय सेंदरी में कराया जाना जरुरी है. इस बाबत् पुलिस अधीक्षक धमतरी से दूरभाष के जरिए चर्चा किया गया. ताकि वह नियमानुसार कार्यवाही कर उचित निर्णय ले और समस्या का निराकरण करें और दो माह के अंदर अपनी रिपोर्ट आयोग को प्रेषित करें. इस निर्देश के साथ प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया है.
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