कृष्ण कुमार साहू की शिकायत पर शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के भर्ती घोटाला मामले में 18 साल बाद पूर्व जनपद उपाध्यक्ष समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

Three accused, including former district vice-president, arrested after 18 years in the Shikshak Karmachari Class 3 recruitment scam case on the complaint of Krishna Kumar Sahu.

कृष्ण कुमार साहू की शिकायत पर शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के भर्ती घोटाला मामले में 18 साल बाद पूर्व जनपद उपाध्यक्ष समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

धमतरी/मगरलोड : धमतरी जिले का मगरलोड भर्ती घोटाला एक बार फिर गर्म सुर्ख़ियों में है. साल 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़ा यह मामला 2011 से लगातार जांच के घेरे में है. सालों तक फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरी करने वाले अपात्र लोग अब कानून के शिकंजे में आ रहे हैं. ताज़ा कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपियों सीताराम कुर्रे, इशू कुमार साहू और कोमल यदु को गिरफ्तार कर लिया है. ये फिलहाल किसी पद पर पदस्थ नहीं थे. लेकिन जांच में दोषी पाए गए.
धमतरी जिला के जनपद पंचायत मगरलोड में 2007 फर्जी शिक्षा कर्मी भर्ती की घोटाला पर आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू की खबर के अधिकार के तहत पुष्टि करने के बाद अदालत के आदेश के बाद 27. 9 .2011 को अपराध क्रमांक 124/11 सैकड़ो फर्जी शिक्षा कर्मियों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया.
2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने अपनी पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी लोगों को पनाह देकर अपने करीबी रिश्तेदारों को फर्जी नौकरी में लगाकर और कई फर्जी अभ्यर्थियों ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जिसमें अंक को बढ़ाना, नकली खेलकूद का प्रमाण पत्र, राज्यपाल का फर्जी हस्ताक्षर सहित कई दस्तावेजों में कुटरचित कर फर्जी तरीके से शिक्षा कर्मी की भर्ती हुई 
थाना मगरलोड में वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी वर्ग-03 भर्ती प्रक्रिया में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र एवं अंकों में हेरफेर कर चयन कराने के मामले में अपराध क्रमांक 124/11 धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी भादवि तथा 3(9), 4 एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्यवाही की गई.
जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर 17 सितम्बर 2025 को आरोपीगण- (01) ईशु कुमार साहू निवासी कमरौद, थाना मगरलोड, जिला धमतरी (छ.ग.), (02) सीता राम कुर्रे निवासी मेघा, थाना मगरलोड, जिला धमतरी (छ.ग.), और (03) कोमल यदु निवासी मोंहदी, थाना मगरलोड, जिला धमतरी (छ.ग.) को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड में पेश कर जेल भेजा गया है.
आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज पेश कर अपात्र अभ्यर्थियों को चयनित कराने और पात्र अनुसूचित जाति-जनजाति अभ्यर्थियों को जानबूझकर वंचित करने के सबूत मिले हैं. इसके पहले सीईओ के के तिवारी को भी गिरफ्तार किया गया था.
ताजा गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने खुलासा किया कि  183 संदिग्ध शिक्षाकर्मी अभी भी जांच के घेरे में हैं. इनमें से कई अब तक नौकरी कर रहे हैं. सिस्टम की नाकामी पर जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.
लोगों का कहना है कि योग्य उम्मीदवार सालों से इंसाफ की राह देख रहे हैं. जबकि अपात्रों ने सरकारी नौकरी और वेतन का फ़ायदा उठाया. अब तीन गिरफ्तारियों के बाद जनता को उम्मीद है कि बाकी गुनाहगार भी जेल जाएंगे और शिक्षा व्यवस्था से यह काला धब्बा हटेगा.
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