जुड़वा बच्चों के दो अलग-अलग पिता, एक ही रात दो मर्दों से शारीरिक सम्बन्ध बनाकर मां बनी 19 साल की लड़की, DNA टेस्ट से खुला राज
Twins have two different fathers, a 19-year-old girl became a mother after having physical relations with two men on the same night, the secret was revealed by a DNA test
मिनेरोस : सुनील शेट्टी की 'गोपी किशन' फिल्म में एक बच्चे का फेमस डायलॉग था 'मेरे दो दो बाप.. मेरे दो दो बाप..' यह तो बस फिल्म थी. लेकिन आज हम आपको ऐसा ही एक रियल लाइफ मामला बताने जा रहे हैं.
एक महिला ने एक ही दिन दो पुरुषों से संबंध बना लिया. इसके बाद जब वह प्रेग्नेंट हुई तो एक साथ दोनों मर्दों के बच्चों की मां बन गई. महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. लेकिन दोनों बच्चों के पिता अलग-अलग पुरुष निकले.
यह अनोखा मामला पुर्तगाल के गोयस राज्य के मिनेरोस शहर का है. यहां एक 19 साल की महिला ने कुछ समय पहले दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. यह बच्चे जब 8 महीने के हुए तो इनका DNA टेस्ट करवाया गया. हैरत की बात ये रही कि एक बच्चे का डीएनए तो उसके पिता से मैच हो गया. लेकिन दूसरे बच्चे का टेस्ट नेगेटिव आया.
महिला को फिर याद आया कि उसने उसी दिन एक और मर्द से संबंध बनाए थे. फिर उसने उस मर्द के साथ दूसरे बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाया और वह मैच हो गया. मतलब महिला ने एक दिन में दो मर्दों से संबंध बनाए और दोनों के एक-एक बच्चे जुड़वा पैदा हो गए. दोनों की शक्ल भी एक जैसी है. लेकिन इनके डीएनए अलग-अलग मर्दों से मेल खाते हैं.
बच्चों के पिता भले दो अलग-अलग मर्द हो. लेकिन उनके बर्थ सर्टिफिकेट पर एक ही शख्स का नाम लिखा जा सकता है. ऐसे में महिला का एक ही पार्टनर दोनों बच्चों की देखरेख कर रहा है. बर्थ सर्टिफिकेट पर भी उसका ही नाम लिखवाया गया है. महिला के इस अनोखे मामले को देख खुद डॉक्टर भी हैरान हैं.
असामान्य गर्भावस्था पर रिसर्च करने वाले डॉ टुलियो जॉर्ज फ्रेंको कहते हैं कि पूरी दुनिया में अभी तक सिर्फ 20 ऐसे मामले जानकारी में हैं. इनमें जुड़वा बच्चों के पिता अलग-अलग होते हैं। इस कंडिशन को वैज्ञानिकों की भाषा में heteroparental superfecundation कहते हैं.
महिला की डिलीवरी करने वाले डॉक्टर ने बताया कि ऐसा तब होता है जब एक ही मां के दो eggs अलग-अलग पुरुषों द्वारा फर्टिलाइज हो जाते हैं. डॉक्टर ने ये भी बताया कि महिला की प्रेग्नेंसी नॉर्मल हुई. दोनों बच्चे भी हेल्थी पैदा हुए. अभी तक उन्हें कोई सेहत से जुड़ी समस्या भी नहीं हुई. डॉक्टर का कहना है कि ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है. मैंने खुद नहीं सोचा था कि मैं कभी ऐसा कोई केस देख पाऊँगा.
बता दें कि वर्तमान में महिला के बच्चे 1 साल 4 महीने के हैं. यह मामला तब सामने आया जब महिला ने नाम ना बताने की शर्त पर डॉक्टर को ये जानकारी रिविल करने की इजाजत दी.
कानूनी रूप से दोनों बच्चों के पिता अलग हैं. लेकिन जन्म प्रमाण पत्र पर एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया है. वही जो महिला के साथ रिश्ते में बना रहा है. और दोनों बच्चों की परवरिश भी कर रहा है. यह मामला न सिर्फ वैज्ञानिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अनोखा है. जहां एक व्यक्ति ने दोनों बच्चों को अपना नाम और देखभाल दी. भले ही वह दोनों का जैविक पिता न हो.
कई लोग इस पर नैतिक दृष्टिकोण से सवाल उठा सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर यह संभव है और इसमें किसी भी तरह की नाजायज़ बात नहीं है. यह जैविक रुप से एक बेहद दुर्लभ लेकिन सत्य घटना है.
भारत में Heteroparental Super fecundation से जुड़ी कोई सार्वजनिक या पुष्टि की रिपोर्ट नहीं है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा हो सकता है. बस इसकी पहचान नहीं हो पाती या सामाजिक कलंक के डर से छुपा लिया जाता है.
डॉ. एना मारिया, पुर्तगाल के एक प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञ, बताती हैं कि “यह घटना महिला की शारीरिक क्षमता और पुरुष के शुक्राणु की जीवन अवधि पर भी निर्भर करती है. एक ही दिन में दो पुरुषों से संबंध बनाने पर यह संभावना बहुत कम होती है. लेकिन कभी-कभी संभव हो जाती है.”
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि विज्ञान किस हद तक शरीर के रहस्यों को उजागर कर सकता है. दूसरी तरफ, समाज इन घटनाओं को कैसे स्वीकार करता है. यह भी एक बड़ा सवाल है.
Heteroparental Super fecundation हमें सिखाता है कि हर असामान्य चीज़ अस्वीकार्य नहीं होती है. कभी-कभी प्रकृति ऐसे चमत्कार दिखा देती है. जिसे विज्ञान भी हैरानी से देखता है और समाज सोच में पड़ जाता है.
यह मामला सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं. बल्कि पूरे मानव विज्ञान और सामाजिक सोच के बीच संतुलन साधने की मिसाल है. समय आ गया है कि हम ऐसी घटनाओं को सिर्फ सनसनी के नजरिए से न देखें, बल्कि समझदारी और वैज्ञानिक विवेक से उसका विश्लेषण करें.
यह मामला सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि पूरे मानव विज्ञान और सामाजिक सोच के बीच संतुलन साधने की मिसाल है। समय आ गया है कि हम ऐसी घटनाओं को केवल सनसनी के नजरिए से न देखें, बल्कि समझदारी और वैज्ञानिक विवेक से उसका विश्लेषण करें.
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