छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर, जापानी इंसेफेलाइटिस का जानलेवा हमला, चपेट में आए 15 बच्चे, 2 मरीजों की मौत, बच्चों पर ज्यादा असर
Monsoon wreaks havoc in Chhattisgarh, deadly attack of Japanese encephalitis, 15 children affected, 2 patients died, children affected the most
बस्तर : जापानी इंसेफेलाइटिस का जानलेवा हमला, मानसून की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ गया है. मलेरिया और डेंगू के बाद अब मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) ने पैर पसारना शुरू कर दिया है. जिले में अब तक इस खतरनाक बीमारी के 15 मामले सामने आए हैं. जिनमें से दो बच्चों की दुखद मौत हो गई. इस खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए गए हैं..
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस और कैसे फैलता है?
शिशु विशेषज्ञ डॉ. अनुरुप साहू के मुताबिक, जापानी इंसेफेलाइटिस एक गंभीर वायरल बीमारी है. जो क्यूलेक्स (Culex) प्रजाति के मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलती है. यह मच्छर मुख्य रुप से धान के खेतों, जंगली इलाकों और जहां पानी का जमाव होता है. वहां पनपते हैं. बस्तर संभाग और इसके पड़ोसी राज्यों में पिछले कुछ सालों से इस बीमारी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, टीकाकरण अभियान तेज
जिले में 15 मामलों की पुष्टि और 2 बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है. हालांकि विभाग का कहना है कि मौत के असल कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार है. लेकिन शुरुआती लक्षण जापानी इंसेफेलाइटिस के ही थे. सभी प्रभावित बच्चों का इलाज डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में चल रहा है. जहां इस बीमारी की जांच और इलाज की पूरी सुविधा उपलब्ध है. संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है.
बस्तर में जापानी बुखार नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से यह बीमारी समय-समय पर सक्रिय होती रही है। कुछ प्रमुख आंकड़े:
2016–2017: बस्तर में कोई मामला नहीं, सुकमा में 7 केस, 3 मौतें।
2017: बस्तर में 4 केस, कोई मौत नहीं; दंतेवाड़ा में 6 केस, 2 मौतें; सुकमा में 2 केस, बिना मौत।
2018–2019: AES के 213 मरीजों की जांच में 18 JE पॉजिटिव; 94% मरीज 16 साल से कम उम्र के थे।
2019: जून में डिमरापाल अस्पताल में 4 साल के बच्चे की JE से मौत।
2022: जुलाई में 15–20 दिनों के भीतर बस्तर में 11 केस, 1 मौत।
कैसे करें बचाव? विशेषज्ञ की सलाह
डॉ. साहू ने इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
मच्छरदानी का प्रयोग करें: सोते समय हमेशा मच्छरदानी लगाकर सोएं, खासकर बच्चे और बुजुर्ग.
मच्छर भगाने वाले साधनों का इस्तेमाल: घर में मॉस्किटो रेपेलेंट, कॉइल या लिक्विड का उपयोग करें.
पूरी बांह के कपड़े पहनें: शाम के समय जब मच्छर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं, तो बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं.
साफ-सफाई रखें: अपने घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यहीं मच्छर अंडे देते हैं.
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